मेंटल कोच की सलाह; सोशल मीडिया दबाव से ऐसे उबरें:  ट्रोल्स को हावी न होने दें, दुनिया को ‘म्यूट’ कर ‘न्यूट्रल थिंकिंग’ से जीत तय करें
अअनुबंधित

मेंटल कोच की सलाह; सोशल मीडिया दबाव से ऐसे उबरें: ट्रोल्स को हावी न होने दें, दुनिया को ‘म्यूट’ कर ‘न्यूट्रल थिंकिंग’ से जीत तय करें

Spread the love


न्यूयॉर्क30 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
अमेरिकी मेंटल परफॉर्मेंस कोच जेफ ट्रोश कहते हैं, ऑनलाइन ट्रोलिंग, दूसरों से  तुलना..जैसी चिंताएं एथलीट्स को परेशान करने लगी हैं। इससे प्रदर्शन पर भी असर पड़ता है। - फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

अमेरिकी मेंटल परफॉर्मेंस कोच जेफ ट्रोश कहते हैं, ऑनलाइन ट्रोलिंग, दूसरों से तुलना..जैसी चिंताएं एथलीट्स को परेशान करने लगी हैं। इससे प्रदर्शन पर भी असर पड़ता है। – फाइल फोटो

‘आज के एथलीट मैदान के साथ सोशल मीडिया के मोर्चे पर भी मानसिक लड़ाई लड़ रहे हैं…’ 40 साल से एथलीट्स की मानसिक स्थिति दुरुस्त रखने में जुटे दिग्गज अमेरिकी मेंटल परफॉर्मेंस कोच जेफ ट्रोश कहते हैं, ऑनलाइन ट्रोलिंग, दूसरों से अंधी तुलना और ‘क्या वह मुझसे ज्यादा फिट है या क्या लोग मुझ पर नकारात्मक टिप्पणियां कर रहे हैं… जैसी चिंताएं एथलीट्स को परेशान करने लगी हैं। इससे प्रदर्शन पर भी असर पड़ता है। ‘न्यूट्रल थिंकिंग’ की मदद से इस स्थिति से उबरना संभव है, जानिए कैसे…

फ्लॉप होने का डर

‘एक आक्रामक बल्लेबाज लगातार तीन मैचों में कम स्कोर पर आउट हुआ। सोशल मीडिया पर मीम्स और ट्रोल्स ने उसे ‘फिनिश्ड’ कह दिया। दिमाग में इतना दबाव बढ़ा कि प्रैक्टिस के दौरान भी वह गेंद पर ध्यान देने के बजाय अगले मैच में फ्लॉप होने और कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने की चिंता करता रहा।

न्यूट्रल थिंकिंग

मैंने उसे सलाह दी ‘जबरदस्ती पॉजिटिव सोचने’ का ढोंग (जैसे-मैं दुनिया का सर्वश्रेष्ठ प्लेयर हूं) नहीं करें। इसके बजाय ‘न्यूट्रल थिंकिंग’ अपनाएं और खुद से कहें- ‘मैं पिछले मैचों में फेल रहा, यह सच (तथ्य) है। इस समय जो बॉल सामने आ रही है, उसका मेरी पुरानी हार से कोई लेना-देना नहीं है।’ इसके अलावा उसके फोन से सोशल मीडिया एप डिलीट करवा दिए। नतीजा यह रहा कि तनाव कम हुआ, उसने सिर्फ बॉल की लाइन और लेंथ पर फोकस किया और अगले ही मैच में मैच-विनिंग पारी खेली।

तुलना का जाल

‘एक इंटरनेशनल बैडमिंटन प्लेयर चोट के बाद वापसी कर रही थी। सोशल मीडिया पर विरोधियों के ट्रेनिंग वीडियो और एंडॉर्समेंट देखकर वह हीन भावना से घिर गई। नींद गायब हो गई, कोर्ट पर उतरते ही थकान हावी होने लगी। उसे लगता था कि वह सबसे पीछे छूट गई है।

न्यूट्रल थिंकिंग – उसने अपनी स्थिति को न्यूट्रल तरीके से देखा-‘विरोधी प्लेयर फिट है क्योंकि चोटिल नहीं है, मैं चोटिल हूं, यह सच है। अब चोट से उबरना है ताकि बेहतर कर सकूं।’ दिमाग से तुलना का बोझ हटते ही स्पीड पर नियंत्रण लौटा, नींद सुधरी और उसने शानदार वापसी की।

ट्रोलिंग से जंग

एक स्प्रिंटर बड़ी रेस में फाउल स्टार्ट से अयोग्य हुआ। ट्रोलिंग से इतना टूट गया कि अगली रेस के स्टार्टिंग ब्लॉक पर भी कानों में ट्रोल्स गूंजते रहे, इससे आत्मविश्वास डगमगा गया।

न्यूट्रल थिंकिंग– ट्रोल्स को गलत साबित करने की जिद छोड़कर उसने कहा – ‘पिछली रेस में गलती मेरी थी। लोग क्या कह रहे हैं, मैं नहीं बदल सकता। मेरे नियंत्रण में मेरी अगली सांस और गन-शॉट पर प्रतिक्रिया है।’ इस सोच ने एंग्जायटी शांत की और उसने सर्वश्रेष्ठ टाइमिंग से स्वर्ण पदक जीता।’

एक कड़ा फैसला

मैं सोशल मीडिया का विरोधी नहीं हूं, पर इसे बहुत महत्व देना भी उचित नहीं… विफलता के बाद जब खिलाड़ी सोशल मीडिया को म्यूट करते हैं, तो वे ‘क्या हो सकता था’ या ‘लोग क्या कहेंगे’ के मोड से निकलकर ‘अभी क्या करना है’ पर आ जाते हैं। यही न्यूट्रल थिंकिंग की ताकत है।’- जेफ



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *