मेंटल हेल्थ– मैं अपने मोटापे को लेकर शर्मिंदा हूं:  अपनी फोटो नहीं खिंचाती, दोस्तों के साथ शॉपिंग नहीं जाती, इस डर से कैसे लडूं
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मेंटल हेल्थ– मैं अपने मोटापे को लेकर शर्मिंदा हूं: अपनी फोटो नहीं खिंचाती, दोस्तों के साथ शॉपिंग नहीं जाती, इस डर से कैसे लडूं

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14 घंटे पहले

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सवाल– मेरी उम्र 26 साल है। मैं मुंबई बेस्ड टेक प्रोफेशनल हूं। मैं बचपन से ही ओवरवेट रही हूं। स्कूल में भी बच्चे मोटी-मोटी कहकर चिढ़ाते थे। घर में भी अक्सर कजिन्स मेरे वजन को लेकर टॉन्ट कर देते थे।

हालांकि मम्मी-पापा ने कभी टॉन्ट तो नहीं किया, लेकिन मम्मी हमेशा कंसर्न्ड जरूर रहती थीं। फिर भी कॉलेज जाने से पहले तक मुझे कभी लगा नहीं कि मैं अपनी बॉडी को लेकर अनकंफर्टेबल हूं। अब ये फीलिंग बहुत स्ट्रॉन्ग हो गई है। मैं ग्रुप में फोटो खिंचाने से कतराती हूं। सोशल मीडिया पर कभी अपनी फोटो नहीं डालती। यहां तक कि मैं अपनी कजिन्स या फ्रेंड्स के साथ कभी शॉपिग करने भी नहीं जाती क्योंकि वो लोग नॉर्मल मीडियम साइज कपड़े ट्राय करते हैं और मैं प्लस साइज सेक्शन में।

कहीं मैं बॉडी डिस्मॉर्फिया का शिकार तो नहीं हो रही हूं? मैं बॉडी पॉजिटिविटी में यकीन करना चाहती हूं, लेकिन हो नहीं पा रहा है। मैं अपनी बॉडी को लेकर बहुत ज्यादा नेगेटिव फील करती हूं। प्लीज हेल्प मी।

एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर।

सवाल पूछने के लिए आपका बहुत शुक्रिया। आपने पूछा है कि “कहीं मैं बॉडी डिस्मॉर्फिया का शिकार तो नहीं हो रही हूं।” इस सवाल का जवाब देने के लिए पहले हमें बॉडी डिस्मॉर्फिया और नेगेटिव बॉडी इमेज के फर्क को समझना होगा।

आगे हम इन दोनों चीजों के बारे में डिटेल में बात करेंगे और मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टूल दूंगा, जिसकी मदद से आप बेहतर समझ सकती हैं कि साइकोलॉजिकली अभी आप किस इस्टेट में हैं।

बॉडी डिस्मॉर्फिया डिसऑर्डर (BDD) क्या है?

BDD को कुछ इस तरह परिभाषित किया जा सकता है-

  • अपनी शारीरिक बनावट में एक या एक से ज्यादा तथाकथित खामियों के बारे में लगातार चिंतित रहना।
  • ये खामियां ऐसी होती हैं, जो अमूमन दिखाई नहीं देतीं या दूसरों को बहुत मामूली लगती हैं।
  • BDD का शिकार व्यक्ति बार-बार एक ही तरह का व्यवहार करता है (जैसे हर वक्त आईने में खुद को देखना, दूसरों से तुलना करना, खुद को छिपाना, बार-बार आश्वासन चाहना।)
  • BDD का शिकार व्यक्ति अपने शरीर को लेकर काफी परेशानी, सामाजिक दूरी और अपने भीतर एक तरह की कमजोरी महसूस करता है।

महत्वपूर्ण बात:

“यहां सबसे महत्वपूर्ण और जरूरी बात ये है कि व्यक्ति को लगता है कि वो “बदसूरत” है या “असामान्य” है, लेकिन ये बात सच नहीं होती। उसकी सेल्फ बॉडी इमेज वास्तविकता से मेल नहीं खाती।”

BDD का क्लिनिकल उदारहण

इस उदाहरण से समझिए कि एक व्यक्ति की नाक बिल्कुल सामान्य है, लेकिन उसे हमेशा ये लगता है कि उसकी नाक “खराब और भद्दी” है। वह घंटों अपनी नाक को देखता रहता है, फोटो नहीं खिंचवाता, कॉस्मैटिक सर्जरी करवाने के बारे में सोचता है। जबकि उसके आसपास के सब लोग कह रहे होते हैं कि उसकी नाक बिल्कुल नॉर्मल है।

ओवरवेट लोगों में नेगेटिव बॉडी इमेज

ऊपर हमने BDD के बारे में पढ़ा। अब समझिए कि ओबिसिटी या मोटापे को लेकर नेगेटिव बॉडी इमेज क्या है और यह BDD से किस तरह अलग है।

  • नेगेटिव बॉडी इमेज में व्यक्ति को पता होता है कि उसका वास्तविक शारीरिक आकार कैसा है। यह काल्पनिक बात नहीं है।
  • इसमें व्यक्ति लोगों के तानों, कमेंट, दूसरों से कंपैरिजन किए जाने या सुंदरता के दुनियावी मानकों पर खरा न उतरने के कारण शर्मिंदगी महसूस करता है।
  • व्यक्ति कपड़े खरीदने, अपनी तस्वीरें खिंचवाने से बचता है क्योंकि इसके कारण तुलना होती है।
  • व्यक्ति दूसरों से “कमतर” महसूस करता है। किसी झूठी कमी के कारण नहीं, बल्कि सीखी हुई शर्मिंदगी के कारण ऐसा होता है।
  • यहां पर हेल्थ से जुड़ी चिंताएं वास्तविक हो सकती हैं क्योंकि ज्यादा वजन के कारण डायबिटीज समेत कई गंभीर हेल्थ कंडीशन पैदा हो सकती हैं।
  • यह रीअल बॉडी वेट से जुड़ा शारीरिक असंतोष है, न कि कोई मानसिक विकार है।

सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट

यहां मैं एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में तीन सेक्शंस में 5-5 सवाल हैं। सेक्शन A में BDD (बॉडी डिस्मॉर्फिया डिसऑर्डर) से जुड़े सवाल हैं और सेक्शन B में नेगेटिव बॉडी इमेज से जुड़े। सेक्शन C में जेनेरिक सवाल हैं, जो दोनों पर लागू हो सकते हैं।

आपको इन सवालों को ध्यान से पढ़ना है और 0 से 3 के स्केल पर इसे रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल का आपका जवाब अगर ‘कभी नहीं’ है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब ‘लगभग हर बार’ है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें।

नंबर के हिसाब से उसका इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया है। जैसेकि अगर सेक्शन A में आपका स्कोर 10 से ज्यादा है तो इसका मतलब है कि आप BDD से पीड़ित हैं और आपको प्रोफेशनल हेल्प की जरूरत है।

अपनी स्थिति को बेहतर समझने के लिए एक बार टेस्ट करके अपना स्कोर चेक करें।

बॉडी शेमिंग के संकेत

कई बार बॉडी वेट से जुड़ा हमारा कंसर्न बहुत वाजिब भी हो सकता है। लेकिन सवाल ये है कि हम खुद से बात कैसे करते हैं। खुद को शर्मिंदा महसूस कराते हैं या प्यार और कंपैशन के साथ अपने शरीर और सेहत के प्रति जागरूक होते हैं।

नीचे ग्राफिक में देखिए कि बॉडी शेमिंग के संकेत क्या हैं। ये चीजें दूसरे भी हमारे साथ कर सकते हैं और खुद के साथ हमारा संवाद भी बॉडी शेमिंग वाला हो सकता है। चाहे हम खुद को कमतर महसूस कर रहे हों या कोई और अपने कमेंट और कंपैरिजन से हमें कमतर महसूस करवा रहा हो।

हेल्दी डायलॉग और बॉडी शेमिंग के बीच के फर्क को समझना जरूरी है। तभी हम अपने शरीर और सेहत के लिए सही और जरूरी कदम उठा सकते हैं।

शरीर के साथ हेल्दी डायलॉग

अब बात करते हैं कि यही संवाद अगर हेल्दी हो तो वो कैसा दिखेगा। जैसेकि कई बार हमारे पेरेंट्स, भाई–बहन या हमारे बहुत करीबी, अपने लोग सेहत के प्रति चिंतित हो सकते हैं और फूड हैबिट, लाइफस्टाइल को बदलने की बात कर सकते हैं। लेकिन अगर उसमें परवाह और जिम्मेदारी का भाव है तो शेमिंग नहीं होगी। ठीक वैसे ही, अगर खुद अपने प्रति हमारा संवाद हेल्दी है तो उसमें शेमिंग नहीं, बल्कि कंसर्न होगा।

शरीर के साथ हेल्दी डायलॉग क्यों जरूरी

अपने शरीर का ख्याल रखना और फिट रहना जरूरी है। कारण सुंदरता के दुनियावी पैमाने नहीं हैं। कारण है हमारी सेहत। आज सैकड़ों साइंटिफिक अध्ययनों से यह साबित हो चुका है कि मोटापा यानी ओबिसिटी अनेकों लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के प्रमुख कारणों में से एक है।

कई बार ऐसा भी होता है कि आसपास के लोग सचमुच प्यार और परवाह में अपना ख्याल रखने या वजन कम करने की बात करते हैं, लेकिन हम इसे बॉडी शेमिंग समझने लगते हैं और बॉडी शेमिंग को एक हथियार की तरह भी यूज करने लगते हैं।

इसलिए खुद से ये सवाल भी पूछिए और नीचे ग्राफिक में देखिए कि ओबिसिटी से किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है।

अपनी मदद कैसे करें:

सेल्फ हेल्प स्ट्रेटजी

स्टेप 1

ग्राउंड रिएलिटी पर फोकस करना

  • हेल्थ पर फोकस करें, लुक्स पर नहीं।
  • सेल्फ इस्टीम को मजबूत करें।
  • मन में आने वाले हर ख्याल को एविडेंस के ग्राउंड पर परखें। क्या ये ख्याल सही है।
  • खुद से सवाल पूछें कि “मेरा दुख बॉडी वेट के कारण है या लोगों के तुलना करने और शर्मिंदा करने के कारण है।”
  • जैसेकि, आपके मन में ये ख्याल आया- “मैं बहुत खराब दिखती हूं।” उसका एविडेंस बेस्ड जवाब ये होगा, “ये सच नहीं है। मेरे वेट को थोड़ा हेल्थ अटेंशन की जरूरत है और मैं थोड़ा डिसिप्लिन से इसे मैनेज कर सकती हूं।”

स्टेप 2

सोशल कंपैरिजन न करना

  • ट्रिगर करने वाले इंस्टा अकाउंट्स म्यूट करें।
  • अनरिएलिस्टिक ब्यूटी फिल्टर्स यूज न करें।
  • बॉडी सेंट्रिक अकाउंट्स फॉलो न करें।
  • हेल्थ से जुड़े अकाउंट्स फॉलो करें।
  • न्यूट्रिशन का नॉलेज देने वाले अकाउंट्स फॉलो करें।

स्टेप 3

हेल्थ फोकस्ड वेट प्लान बनाना

छोटे कदमों से शुरुआत करें। जैसेकि–

  • रोज 10 मिनट वॉक
  • जंक की जगह कोई एक हेल्दी स्नैक
  • वीकेंड में पूरे हफ्ते की मील प्लानिंग
  • दिन भर 9 लीटर पानी पीने का टारगेट
  • टाइम पर सोने और उठने का टारगेट
  • थोड़ी-थोड़ी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

स्टेप 4

इमोशनल स्ट्रेंथ हासिल करना

रोज अपने साथ CBT (कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी) आधारित एक प्रैक्टिस करें। जब भी कोई आपके वेट, बॉडी शेप पर कुछ कमेंट करे तो खुद से पूछें-

“क्या मेरे अपीयरेंस के बारे में ये कमेंट हेल्थ के लिए यूजफुल है?”

No- अगर नहीं तो उसे “शोर” या “बकवास” की कैटेगरी में डालें।

Yes- अगर हां तो उसे अपने हेल्थ प्लान में शामिल करें।

स्टेप 5

अपनी सेल्फ इस्टीम को प्रोटेक्ट करना

  • खुद से प्यार और कंपैशन से बात करें: “वजन से मेरा महत्व नहीं तय होता।”
  • फोटो खींचना अवॉइड न करें, हर महीने प्राइवेटली अपनी 1-2 फोटो लें।
  • ऐसे कपड़े पहनें, जो आपको ठीक से फिट होते हों। खुद को छिपाने के लिए ओवरसाइज्ड कपड़े न पहनें।

पॉजिटिव कम्युनिकेशन की प्रैक्टिस करें-

“मैं इस वक्त अपनी हेल्थ पर फोकस कर रही हूं। मैं वेट के बारे में डिसकस नहीं करना चाहती।”

स्टेप 6

हेल्थ बेस्ड सपोर्ट मांगना

अपने आसपास के भरोसेमंद लोगों से हेल्थ बेस्ड सपोर्ट लें। जैसे:

  • पेरेंट्स
  • डॉक्टर
  • न्यूट्रिशनिस्ट
  • ट्रेनर

खुद से साफ-साफ कहें:

“मैं अपनी हेल्थ को बेहतर करने के लिए गाइडेंस चाहती हूं, ब्यूटी स्टैंडर्ड्स पर फिट होने के लिए नहीं।”

स्टेप 7

प्रोफेशनल मेंटल हेल्थ हेल्प लेना

अगर इनमें से कोई संकेत दिखे तो क्लिनिकल मेंटल हेल्थ हेल्प लें-

  • दिन में एक घंटे से ज्यादा अपनी बॉडी या शरीर की किसी कमी के बारे में सोचना।
  • यह मानना कि दूसरों को आपके शरीर की वो कमी तुरंत दिखाई देती है।
  • हर वक्त आईना देखना या आईने के सामने जाना अवॉइड करना।
  • डिप्रेशन, निराशा महसूस होना या सेल्फ इस्टीम बहुत कम होना।

बॉडी शेम करने वालों से कैसे बात करें

दोस्त, कजिन्स, घरवाले या वो करीबी लोग, जो आपके बॉडी वेट को लेकर कमेंट करते हैं, उनके साथ भी एक स्पष्ट संवाद जरूरी है। अगर आप सीधे–सीधे उनसे बात नहीं कर सकतीं तो उन्हें एक चिट्‌टी, ईमेल या मैसेज लिख सकती हैं। नीचे मैं एक सैंपल दे रहा हूं। आप इस तरह का एक मैसेज ड्राफ्ट करके सबको भेज सकती हैं।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर अगर आपकी सिर्फ नेगेटिव बॉडी इमेज का शिकार हैं तो आपको एक हेल्दी शुरुआत करनी चाहिए। खुद से पॉजिटिव संवाद करना चाहिए और अपनी लाइफस्टाइल व फूड हैबिट्स को बदलना चाहिए। बदलाव की शुरुआत कभी भी हो सकती है। आप आज से ही शुरू करें।

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