9 घंटे पहले
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सवाल– मेरी उम्र 49 साल है। मैं पिछले 15 सालों से लिव इन रिलेशनशिप में थी। हम दोनों फिल्म लाइन से जुड़े थे और फ्रीलांस काम करते थे। हम 15 साल साथ रहे, लेकिन कभी शादी नहीं की। शादी न करने का फैसला भी मेरा नहीं था। मेरे पार्टनर का शादी में यकीन नहीं था। वो कहता था कि ये एक पुरातनपंथी और सामंती संस्था है। हम किसी संस्था में बंधकर साथ नहीं हैं बल्कि इसलिए हैं क्योंकि साथ रहना चाहते हैं। 15 सालों में मुझे उसकी, उस घर, रिश्ते और जिंदगी की इतनी आदत हो गई थी कि पति-पत्नी जैसा ही महसूस होता था।
और फिर अचानक एक दिन वो रिश्ता टूट गया। 15 साल बाद उसने मुझसे कहा कि अब हम साथ नहीं रह सकते। वो अलग हो रहा है। कोई कारण नहीं बताया, कोई सफाई नहीं दी। चूंकि हमारी कभी शादी भी नहीं हुई थी तो कोई कानूनी पेंच भी नहीं था। घर किराए का था। वो छोड़कर चला गया और मैं 49 साल की उम्र में मुंबई छोड़कर अपने पेरेंट्स के पास जमशेदपुर आ गई। मैं पिछले एक साल से डिप्रेशन में हूं। 15 साल के रिश्ते के बाद कोई ऐसे कैसे छोड़कर जा सकता है। क्या उसकी जिम्मेदारी नहीं बनती थी। मैं खुद को कैसे समझाऊं, क्या करूं कि मन को थोड़ा चैन आए।
एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर।
आपके सवाल के लिए शुक्रिया। सबसे पहले तो मैं यह स्वीकार करना चाहता हूं कि आप जिस तकलीफ से गुजर रही हैं, वो बहुत गहरी और सच्ची है। 15 साल तक एक व्यक्ति के साथ घर और जिंदगी साझा करना सिर्फ एक रिश्ता नहीं होता, बल्कि यह आपके जीवन और पहचान का एक अभिन्न हिस्सा हो जाता है। एक लंबे रिश्ते का अचानक इस तरह टूट जाना आसान नहीं है। वो भी तब, जब आपको उसका कारण न पता हो। कोई ठोस क्लैरिफिकेशन और एक्सप्लेनेशन न हो तो इसे स्वीकार करना और भी मुश्किल होता है। इसके साथ-साथ भारतीय समाज में लिव इन रिश्तों के और भी वृहत्तर मायने हैं। सोशली, लीगली और इमोशनली यह शादी से बहुत अलग है।
यहां मैं एक-एक करके आपके कंसर्न को एड्रेस करने की कोशिश करूंगा, जिसमें प्रोफेशनल एसेसमेंट के साथ प्रैक्टिकल सुझाव भी होंगे। साथ ही हम सेल्फ हेल्प पर भी बात करेंगे कि अपनी सेल्फ इस्टीम को बचाते हुए जीवन में आगे कैसे बढ़ा जाए।

केस की क्लिनिकल अंडरस्टैंडिंग
जैसाकि आपने अपने सवाल में बताया है कि आप ब्रेकअप के बाद पिछले एक साल से दुख, निराशा और अवसाद से जूझ रही हैं। ये सब एडजेस्टमेंट डिसऑर्डर के संकेत हैं, जिसमें मुख्य रूप से डिप्रेसिव लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसके मुख्य कारण इस प्रकार हैं-
- यहां सबसे बड़ा और प्रमुख डिस्ट्रेसर है- ब्रेकअप और मुंबई छोड़कर वापस जमशेदपुर लौटना।
- इन लक्षणों का ब्रेकअप के कुछ हफ्ते के भीतर दिखाई देना।
- आपका भावनात्मक दुख सामान्य ब्रेकअप के मुकाबले कहीं ज्यादा गहरा है।
- इस दुख का असर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी और बेसिक फंक्शन पर पड़ रहा है।
लेकिन इस केस में दिख रहे लक्षण मेजर डिप्रेसिव एपिसोड नहीं है। और उसके कारण ये हैं-
- आपका स्ट्रेस सीध-सीधे एक घटना से जुड़ा हुआ है।
- ब्रेकअप से पहले आप तनाव में नहीं थीं और इस तरह का कोई लक्षण नहीं था।
- बीच-बीच में संभवत: ऐसा भी होता होगा, जब डिस्ट्रैक्शन के कारण आप बेहतर महसूस करती होंगी। एडजेस्टमेंट डिसऑर्डर में ऐसा होता है। लेकिन मेजर डिप्रेसिव एपिसोड में ऐसा नहीं होता।
आप दुखी हैं या डिप्रेशन में हैं
अपने इमोशनल रिस्पांस को समझें
आपके मन में यह सवाल हो सकता है कि आप जिस स्थिति से गुजर रही हैं, वो दुख है या डिप्रेशन है। आपके केस में यह दुख है, जो ब्रेकअप के कारण महसूस हो रहा है। हालांकि इसके लक्षण कई बार डिप्रेसिव हो सकते हैं। नीचे ग्राफिक में देखें कि ग्रीफ यानी दुख और एडजेस्टमेंट डिसऑर्डर के क्या लक्षण होते हैं।

लिव–इन रिश्ते टूटने का असर मेंटल हेल्थ पर
एडजेस्टमेंट डिसऑर्डर (डिप्रेसिव टाइप) स्क्रीनिंग टेस्ट
आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने इमोशनल स्टेट को बेहतर समझने के लिए दो सेल्फ स्क्रीनिंग टूल दे रहा हूं। नीचे दो अलग–अलग स्क्रीनिंग टेस्ट में कुछ सवाल दिए हैं। इन सवालों को आपको 0 से 3 के स्केल पर रेट करना है। 0 का अर्थ है- ‘बिल्कुल नहीं’ और 3 का अर्थ है, ‘रोज, हर समय’। हर सवाल को उसके जवाब के हिसाब से स्कोर देने के बाद आपको अपना स्कोर चेक करना है।
सवाल नीचे ग्राफिक में हैं। स्कोर का इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया है। पहले सवालों के जवाब दीजिए और फिर अपने स्कोर के हिसाब से उसका इंटरप्रिटेशन चेक करिए।

घोस्टिंग का मेंटल हेल्थ पर असर: स्क्रीनिंग टेस्ट 2
आप जिस इमोशनल दौर से गुजर रही हैं, वो एडजेस्टमेंट डिसऑर्डर है या घोस्टिंग ग्रीफ, इसे समझने के लिए ये अगला स्क्रीनिंग टेस्ट है। इन दोनों स्क्रीनिंग टेस्ट से आपको अपने इमोशनल स्टेट को समझने और उसके मुताबिक एक्शन लेने में मदद मिलेगी।

भारत में लिव इन रिलेशनशिप के मायने
आपकी कहानी को आपके देश–काल के संदर्भों में ही समझा जा सकता है। भारत में चूंकि शादी सिर्फ एक इमोशनल रिश्ता ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक और कानूनी संस्था भी है, इसलिए शादी के भीतर महिलाओं को बहुत सारे अधिकार और सुरक्षा मिलती है। लेकिन लिव–इन रिश्तों के साथ ऐसा नहीं होता।
जैसे अगर मैं यूके और आयरलैंड की बात करूं तो यहां पर 20% कपल बिना शादी के साथ रहते हैं, जबकि भारत में ये आंकड़ा सिर्फ 1% है। इसके अलावा यहां लीगल राइट्स और प्रोटेक्शन भी ज्यादा है। साथ ही लिव–इन की सामाजिक स्वीकार्यता है और यह स्टिग्मा नहीं है।
भारत में कई सामाजिक, पारिवारिक और कानूनी कारणों से लिव–इन ज्यादा चुनौतपूर्ण होते हैं। ऐसे में अगर ये रिश्ते टूटते हैं तो उसके परिणाम महिलाओं के लिए ज्यादा तकलीफदेह होते हैं।

अगर कोई महिला लिव–इन रिश्ते में है तो वह क्या करे
आपके लिए एक कंप्रेहेन्सिव सेल्फ हेल्प प्लान देने से पहले मैं एक और बात यहां थोड़ा जोर देकर कहना चाहता हूं कि महिलाओं को हमेशा अपनी आर्थिक आजादी और आत्मनिर्भरता को प्रिऑरिटी पर रखना चाहिए। यूं तो यह शादी में भी जरूरी है, लेकिन अगर आप एक महिला हैं और लिव–इन रिश्ते में हैं तो आपको विशेष तौर पर ये कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए ।

ब्रेकअप की तकलीफ से कैसे उबरें?
चार हफ्तों का सेल्फ हेल्प प्लान
पहला सप्ताह
- अपने रिलेशनशिप और ब्रेकअप की पूरी टाइमलाइन तैयार करें। एक कागज पर लिखें कि कब, क्या हुआ।
- फिर एक लिस्ट बनाएं। उसमें मुख्य रूप से दो बातें लिखें। एक जो आपका लॉस है और दूसरी वो चीजें जो अब भी आपके पास हैं।
- किसी भी रिश्ते के खत्म होने से जीवन तो खत्म नहीं होता। जैसे आपकी बुद्धि, आपका टैलेंट, आपका काम, स्किल, दोस्त, परिवार और वो तमाम रिश्ते, जिन्हें आप वैल्यू करती हैं, वो अब भी आपके साथ हैं।
- कागज पर लिखने से कई बार ये बातें बेहतर समझ में आती हैं कि हमारे पास अब भी कितना कुछ ऐसा है, जो बहुत मूल्यवान है।
दूसरा सप्ताह
- अपने नेगेटिव ख्यालों को फैक्ट के साथ देखने का अभ्यास करें।
- जैसेकि ये ख्याल कि मेरा जीवन खत्म हो गया है। खुद से कहें कि मेरे पास अब भी काम करने का टैलेंट है, फैमिली है, फ्रेंड्स हैं। अतीत में जब भी कुछ बुरा हुआ था और ऐसा लगा था कि जीवन खत्म हो गया, तो भी जीवन तो खत्म नहीं हुआ। मैं उस दुख से उबर भी गई। इस तरह हर नकारात्मकता को फैक्ट के साथ देखें।
- फिर से कोई पुरानी हॉबी या शौक शुरू करें या कोई नई चीज सीखें। जैसे आर्ट, क्राफ्ट, पेंटिंग, ड्रामा या कुछ भी और।
- सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम करें। एक्स को सोशल मीडिया पर ढूंढने या देखने कोशिश न करें।
तीसरा सप्ताह
- अपने दोस्तों के साथ कनेक्ट करें। उनसे अपनी फीलिंग्स शेयर करें, उनके साथ समय बिताएं।
- ग्रैटीट्यूड डायरी लिखना शुरू करें। उन चीजों के बारे में लिखें, जो जीवन में सुंदर हैं और जिनके लिए आप शुक्रगुजार हैं।
- माइंडफुलनेस का अभ्यास करें।
- रोज थोड़ी एक्सरसाइज करें। भले ही सामान्य वॉकिंग या योग से शुरुआत करें।
चौथा सप्ताह
- अपने लिए कुछ नए शॉर्ट टर्म गोल बनाएं और उन्हें पूरा करें।
- अपना प्रोफेशनल काम फिर से शुरू करें।
- भविष्य में रिश्तों के लिए हेल्दी बाउंड्रीज तय करें।

निष्कर्ष
आप जिस अनुभव से गुजरी हैं, वो बहुत तकलीफदेह है। लेकिन याद रखें कि इस रिश्ते का खत्म होना आपको डिफाइन नहीं करता है। आपका जीवन सिर्फ रिलेशनशिप से तय नहीं होता है। यह उससे कहीं बड़ा है। आप में इतनी ताकत है कि आप फिर से खुद को जोड़कर उठ खड़ी हो सकती हैं और एक नई जिंदगी की शुरुआत कर सकती हैं। अगर जरूरत हो तो प्रोफेशनल हेल्प लें। आपके भविष्य का रिश्ता गुजरे हुए कल से ज्यादा सुंदर, सकारात्मक और फुलफिलिंग हो सकता है।
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आपने जो अनुभव किया है, वह काफी तकलीफदेह है। अगर मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखें तो एक बहुत पर्सनल और इंटिमेट रिलेशनशिप में मिले इस धोखे ने आपको इमोशनल दुख पहुंचाने के साथ आपके आत्म-सम्मान, आइडेंटिटी और सेल्फ वर्थ को भी नुकसान पहुंचाया है। पूरी खबर पढ़िए…








