5 घंटे पहले
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आज (14 अप्रैल) मेष संक्रांति है। सूर्य ने मेष राशि में प्रवेश कर लिया है। अब यह ग्रह 15 मई तक इसी राशि में रहेगा। धर्म और ज्योतिष के नजरिए से सूर्य के राशि परिवर्तन का महत्व काफी ज्यादा माना जाता है। सूर्य जब अपनी राशि बदलता है तो इस घटना को संक्रमण यानी संक्रांति कहा जाता है। संक्रांति का नाम उस राशि के आधार पर तय होता है, जिसमें सूर्य प्रवेश करता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, मीन राशि से निकलकर सूर्य मेष राशि में आ गया है, इसके साथ ही खरमास खत्म हो गया है। अब विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत जैसे मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त मिलने लगेंगे।
मेष संक्रांति से जुड़ी परंपराएं
मेष संक्रांति के अवसर पर नदी में स्नान, पूजा, सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना, दान-पुण्य करने की परंपरा प्रचलित है। अभी गर्मी का समय है, इसलिए आज पानी, मटका, छाता, जूते-चप्पल का दान जरूर करें। किसी मंदिर या सार्वजनिक जगह पर छायादार पेड़ का पौधा लगाएं और उसकी देखभाल करने का संकल्प लें। मेष संक्रांति का जिक्र सूर्य सिद्धांत, भविष्य पुराण और विष्णु धर्मोत्तर पुराण जैसे ग्रंथों में भी है।
मेष संक्रांति पर करें ये शुभ काम
- इस दिन विशेष रूप से गंगा, यमुना, गोदावरी, शिप्रा, नर्मदा और कावेरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा प्रचलित है। यदि नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
- स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। इसके लिए तांबे के पात्र में जल भरें, उसमें लाल फूल, चावल और कुमकुम डालें, इसके बाद सूर्य मंत्र और गायत्री मंत्र का जप करते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। पूजा में आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी कर सकते हैं।
- संक्रांति पर पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण आदि शुभ कर्म भी करना चाहिए। पितरों के लिए धूप-ध्यान दोपहर में करीब 12 बजे करना चाहिए। दोपहर में गाय के गोबर से बने उपले (कंडे) जलाएं और जब उसमें से धुआं निकलना बंद हो जाए, तब उस पर पितरों का स्मरण करते हुए गुड़ और घी अर्पित करें। हथेली में जल लेकर अंगूठे की दिशा में पितरों को जल अर्पित करें।
- जिन लोगों की कुंडली में सूर्य की स्थिति अच्छी नहीं है, उन्हें संक्रांति पर सूर्य देव की विशेष पूजा करनी चाहिए। सूर्य नवग्रहों के राजा माने जाते हैं, इसलिए इनकी कृपा से कुंडली के कई ग्रह दोष शांत हो सकते हैं।
- घर में विराजित बाल गोपाल का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। इसके लिए शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और फिर भगवान को स्नान कराएं। दूध के बाद शुद्ध जल अर्पित करें। भगवान को नए वस्त्र पहनाएं। हार-फूल से श्रृंगार करें। धूप-दीप जलाएं। माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।
- किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं। जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं।









