22 घंटे पहले
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आज (29 जून) ज्येष्ठ मास की अंतिम तिथि यानी पूर्णिमा है। इस बार अधिकमास की वजह से ज्येष्ठ मास 59 दिनों का रहा। इसी पूर्णिमा पर संत कबीर दास की जयंती भी मनाई जाती है। मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा पर स्नान, दान, देव पूजा और पितरों का स्मरण करने से अक्षय पुण्य मिलता है, ऐसा पुण्य जिसका शुभ असर जीवनभर बना रहता है। कल यानी 30 जून से आषाढ़ मास की शुरुआत होगी।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें और ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जप करें। मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सूर्य पूजा करने से कुंडली के कई ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में ऊर्जा, आरोग्य और आत्मबल आते हैं। इसके बाद घर के मंदिर में अपने इष्टदेव की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।
दोपहर में करें पितरों के लिए धूप-ध्यान
ज्येष्ठ पूर्णिमा की दोपहर पितरों के लिए धूप-ध्यान करना चाहिए। मान्यता है कि दोपहर लगभग 12 बजे श्रद्धापूर्वक पितरों का धूप-ध्यान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। घर-परिवार के दिवंगत सदस्यों को पितर देव का स्थान दिया गया है। इनकी प्रसन्नता से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता आती है। ऐसी मान्यता है।

आज कर सकते हैं ये शुभ काम
- पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान की भी परंपरा है। गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा और अलकनंदा जैसी नदियों में स्नान करना शुभ माना गया है। यदि नदी तक जाना संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान के समय सभी पवित्र नदियों, तीर्थों और देवस्थानों का स्मरण करने से घर पर ही तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिल सकता है।
- सुबह घर के मंदिर में सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश का पूजन करें। गणेश जी पंचामृत अर्पित करें। पंचामृत दूध, दही, घी, मिश्री और शहद मिलाकर बनाना जाता है। इसके बाद भगवान को मिठाई का भोग लगाएं। दूर्वा चढ़ाएं। ॐ गं गणपतयै नम: मंत्र का जप करें। धूप-दीप जलाएं, आरती करें।
- गणेश पूजन के बाद भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करें। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिला दूध लेकर विष्णु-लक्ष्मी का अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर पीले वस्त्र अर्पित करें, सुगंधित पुष्प चढ़ाएं और तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करते हुए आरती करें और प्रसाद सभी में वितरित करें। समय हो तो श्रीमद्भगवद्गीता या विष्णु पुराण का पाठ भी किया जा सकता है।
- घर के मंदिर में विराजित बाल गोपाल की विशेष पूजा का करें। बाल गोपाल का अभिषेक कर नए वस्त्र पहनाएं, फूलों से श्रृंगार करें और तुलसी के साथ माखन-मिश्री का भोग अर्पित करें। कृं कृष्णाय नमः मंत्र का जप करते हुए धूप-दीप और आरती करें।
- पूर्णिमा पर भगवान शिव और हनुमान की पूजा भी करनी चाहिए। शिवलिंग पर जल और बिल्वपत्र अर्पित कर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें। हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। पर्याप्त समय हो, तो सुंदरकांड या रामनाम का जप भी किया जा सकता है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ने या सुनने की भी परंपरा है।
- दान-पुण्य के बिना पूर्णिमा का महत्व अधूरा माना जाता है। इस दिन गोशाला में हरी घास या गायों की सेवा के लिए आर्थिक सहयोग देना शुभ माना गया है। मंदिरों में पूजा सामग्री का दान किया जा सकता है। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, धन, जूते-चप्पल और दैनिक उपयोग की चीजें दान कर सकते हैं।
- ज्येष्ठ पूर्णिमा संत कबीर दास जयंती के कारण भी विशेष महत्व रखती है। संत कबीर ने अपने दोहों और वाणी के माध्यम से सत्य, सादगी, समानता और मानवता का संदेश दिया। इस अवसर पर उनके दोहों का अध्ययन, सत्संग और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेना चाहिए।









