पास में काम कर रहे प्रदीप शर्मा निवासी खिरनी मोहल्ला बड़ौत, साकिब व हामिद निवासी मोदीनगर, अमरनाथ पांडेय व दीपक दौड़कर सुरेश शर्मा को उठाने गए लेकिन वह भी बेहोश हो गए। साथी मजदूर अपने मुंह पर कपड़ा बांधकर गए और बेहोश हुए मजदूरों को खींचकर बाहर ले आए। इसके बाद चारों को सीएचसी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने सुरेश शर्मा को मृत बता दिया। हामिद व साकिब की हालत गंभीर होने पर रेफर कर दिया। सुरेश के परिजनों ने मिल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
पुलिस ने किसी तरह उन्हें शांत कराया। सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय, तहसीलदार श्वेताभ व अन्य अधिकारियों ने सीएचसी पहुंचकर जानकारी हासिल की। बताया गया कि मिल के ईटीपी में मीथेन, कार्बन-डाई-ऑक्साइड हाईड्रोजन सल्फाइड गैस होती है। इन गैसों की अधिकता खतरनाक होती है, जो जान ले सकती है। एसपी के अनुसार घटना की जांच कराई जा रही है और कार्रवाई की जाएगी।
सुरेश को बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगाते रहे मजदूर
बागपत के बड़ौत मलकपुर शुगर मिल का पेराई सत्र एक अप्रैल को खत्म हो गया था मगर अभी वहां काम चल रहा था। ईटीपी में लाइट जलाने के बाद गिरे सिक्योरिटी गार्ड सुरेश शर्मा की जिंदगी बचाने के लिए साथी मजदूरों ने अपनी जिंदगी भी दांव पर लगा दी। वह सुरेश को बचाने के लिए प्लांट में जाते रहे और बेहोश होकर गिरते रहे। इसके बाद अन्य मजदूरों ने हिम्मत जुटाकर चेहरों पर कपड़े लपेटकर चारों को किसी तरह बाहर निकाला, जिससे पांच मजदूरों की जान बचाई जा सकी।
मलकपुर मिल बंद होने के कारण मंगलवार शाम सिक्योरिटी गार्ड सुरेश शर्मा के अलावा करीब 30 मजदूर काम कर रहे थे। शाम होने पर अंधेरा छा गया और सुरेश शर्मा ईटीपी में लाइट जलाने के लिए चले गए। मजदूर संजय, विकास ने बताया कि लाइट जलाते ही सुरेश शर्मा को गैस लीक होने की वजह से घुटन महसूस हुई तो उन्होंने एक बार चिल्लाकर भागने का प्रयास भी किया। चीख सुनकर सभी उस तरफ देखने लगे तो सुरेश दो-तीन कदम ही चल पाए और प्लांट के अंदर ही गिर गए।












