युवाओं में जोखिम का भय बुजुर्गों से ज्यादा:  जेन-जी में ठुकराए जाने का डर रिश्ते प्रभावित कर रहा
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युवाओं में जोखिम का भय बुजुर्गों से ज्यादा: जेन-जी में ठुकराए जाने का डर रिश्ते प्रभावित कर रहा

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सोशल मीडिया और आभासी दुनिया में ज्यादा सक्रिय रहना आज की युवा पीढ़ी को वास्तविकता से दूर ले जा रहा है। कुछ रिसर्च और स्टडी के मुताबिक करियर, आर्थिक असुरक्षा, सोशल मीडिया के दबाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंता के बीच युवा किसी भी ऐसी स्थिति से बचना चाहते हैं, जिसमें अस्वीकृति, शर्मिंदगी या भावनात्मक चोट का खतरा हो। विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रवृत्ति उनकी डेटिंग लाइफ और रिश्तों को भी प्रभावित कर रही है। ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी के व्हीटली इंस्टीट्यूट और गैर-लाभकारी संस्था इंस्टीट्यूट फॉर फैमिली स्टडीज की एक स्टडी के मुताबिक अमेरिका में 22 से 35 वर्ष की आयु के 3 में से 2 पुरुषों और 5 में से 4 महिलाओं ने कहा कि उनमें किसी से रोमांटिक रिश्ता शुरू करने को लेकर आत्मविश्वास नहीं है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में अट्रैक्शन और रिलेशनशिप रिसर्च लैब के डायरेक्टर पॉल ईस्टविक ने कहा, आजकल युवा रिश्तों के कारण जीवन में परेशानी आने के डर का सामना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर मजाक बनने के डर से डेटिंग से बच रहे न्यू जर्सी की मोंटक्लेयर स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गेब्रियल रुबिन ने एक अध्ययन में पाया कि पिछली पीढ़ियों की तुलना में जेनरेशन जी के बीच में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति कुछ ज्यादा है। इसमें प्यार करना और डेटिंग भी शामिल है। डिजिटल युग में पले-बढ़े जेन जी पीढ़ी के सदस्य जानते हैं कि उनकी कोई भी हरकत सोशल मीडिया पर आ सकती है। इसलिए किशोर उम्र से लेकर 29 साल तक की युवा पीढ़ी ऐसे किसी भी काम से बचती है जो सोशल मीडिया पर शर्मिंदगी की वजह बन जाए।



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