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उम्र बढ़ना स्वाभाविक है, पर खुश रहना आपके हाथ में है। बुजुर्गों के स्वास्थ्य व मानसिक संतुलन पर हुए शोध कहते हैं कि 60 वर्ष के बाद खुशी का स्तर आपकी जीवनशैली तय करती है। इसमें खुशी के 4 नियम- उद्देश्य, सामाजिक जुड़ाव, सक्रियता व कृतज्ञता अहम हैं। उद्देश्य- खुद के लिए उपयोगी महसूस करें मेडिकल जर्नल जामा नेटवर्क की एक स्टडी में पाया गया कि जिन बुजुर्गों के पास कोई नियमित जिम्मेदारी या लक्ष्य होता है, उनके जीवन में अवसाद कम और आत्मसम्मान अधिक होता है। क्या करें? – हफ्ते में 2 दिन बच्चों को पढ़ाएं। – मंदिर, सोसायटी, सीनियर क्लब में सक्रिय रहें। – अपनी रुचि- लेखन, बागवानी, संगीत को समय दें। – रोज खुद से पूछें-आज मैं किस काम से उपयोगी बनूंगा। सक्रियता – चलते रहने से जिंदगी में उत्साह बढ़ता है जर्नल ऑफ हैप्नीनेस स्टडीज में पाया गया कि हल्की गतिविधि से खुशी का हार्मोन एंडोर्फिन रिलीज होता है। मूड बेहतर रहता है। यह बुजुर्गों को नींद की समस्या से भी बचाता है। क्या करें? – हफ्ते में 150 मिनट यानी प्रतिदिन 20 से 30 मिनट तेज चाल से चलें। – हफ्ते में 2 दिन कुर्सी से उठें-बैठें या स्ट्रेचिंग करें। – प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट धूप में बैठें। – सुबह पार्क में वॉक से शुरुआत करें। यह न सिर्फ शरीर फिट रखता है, बल्कि यहां दोस्तों से मिलना होता है, जो खुशी दोगुनी करता है। जुड़ाव – सामाजिक मेलजोल बनाए रखें डब्ल्यूएचओ की एक रिसर्च में अकेलेपन को हृदय रोग और मानसिक तनाव का बड़ा कारण माना है। जूलियन होल्ट-लुनस्टैड की रिसर्च भी कहती है कि अकेलापन स्वास्थ्य पर धूम्रपान जितना घातक है। क्या करें? – रोज 1 दोस्त/रिश्तेदार से बात करें। – हफ्ते में एक सामूहिक गतिविधि जैसे- भजन कार्यक्रम, योग, पार्क में समूह चर्चा में भाग लें। – मोबाइल पर परिवार के साथ वीडियो कॉल करें। कृतज्ञता -: मानसिक संतुलन बेहतर बना रहता है रोज कृतज्ञता व्यक्त करने से तनाव कम होता है। जर्नल ऑफ पॉजिटिव साइकोलॉजी के मुताबिक इससे दिमाग में सेरोटोनिन-डोपामाइन(खुशी के हार्मोन) रिलीज होते हैं, जो चिंता से बचाते हैं। क्या करें? – प्रतिदिन रात के वक्त सोने से पहले 3 अच्छी बातों को याद करें। – 10 मिनट गहरी सांस लें या ध्यान करें। – समाचार सीमित समय तक ही देखें। – डायरी से इसकी शुरुआत करें। उसमें लिखें कि आज क्या अच्छा हुआ? जैसे परिवार से बात, अच्छा खाना या बेहतर महसूस किया।
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