रश्मि बंसल का कॉलम:  इस साल कुछ ऐसे रिजॉल्यूशंस लें- जो छोटे हैं, पर खोटे नहीं…
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रश्मि बंसल का कॉलम: इस साल कुछ ऐसे रिजॉल्यूशंस लें- जो छोटे हैं, पर खोटे नहीं…

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3 घंटे पहले

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रश्मि बंसल, लेखिका और स्पीकर - Dainik Bhaskar

रश्मि बंसल, लेखिका और स्पीकर

छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी। नए साल में लिखेंगे, मिल कर नई कहानी… हर साल ऐसे ही खयाल आते हैं। दस दिन बाद चले जाते हैं। वो इसलिए कि आप पहाड़ चढ़ने की सोचते हैं, जबकि आज की तारीख में चार सीढ़ी चलने में सांस फूल जाती है। तो इस साल ऐसे रिजॉल्यूशन लें- जो छोटे हैं, पर खोटे नहीं। हर इंसान तीन तरह के सुख चाहता है- पैसे का सुख, परिवार का सुख और स्वास्थ्य का सुख। तो आइए, कुछ नन्हे कदम बढ़ाएं, जिनसे जीवन का सफर थोड़ा और आनंदमय हो।

पैसा : 1. नो ईएमआई : इस साल प्रण लें कि किश्तों पर कुछ नहीं लेना है। घर की ईएमआई चल रही है- ठीक है। मगर लेटेस्ट मॉडल का फोन लेना जरूरी नहीं। किसी ब्रांड के जोर पर जो अपनी शख्सियत बनाता है, वो खोखली शख्सियत होती है। इस ढकोसले में न पड़िए।

2. असली बचत : दुनिया में एक ही चीज है जो आपके और अम्बानी के पास एक ही मात्रा में है- और वो है समय। अकसर हम थोड़ा पैसा बचाने के चक्कर में अपना समय बर्बाद कर देते हैं। पैसा आप और कमा सकते हो, समय वापस नहीं आएगा।

3. समस्या है तो समाधान भी : मान लो घर में पैसों की तंगी है- क्यों न हर मेंबर थोड़ा कॉन्ट्रिब्यूट करे? दसवीं का बच्चा भी शाम को छोटों की ट्यूशन लेकर कुछ कमा सकता है। गृहिणी अपने मोहल्ले में स्वादिष्ट खाना सप्लाई कर सकती है। हर किसी में क्षमता है, चांस तो दीजिए।

स्वास्थ्य : 1. रोज का रिचार्ज : आपकी दिनचर्या में एक कोई ऐसी एक्टिविटी होनी चाहिए, जो सिर्फ आपके आनंद के लिए हो। योग-व्यायाम, मेडिटेशन, नृत्य और संगीत, शायरी- अपने मन को लुभाने वाली कोई एक चीज पकड़ लो। जैसे हम मोबाइल का रिचार्ज करते हैं, वैसे ही मन का रिचार्ज भी जरूरी है।

2. सोने से पहले : पुराने जमाने में जब कारवां चलता था, रात को सराय में विश्राम लेता था। अपनी चिंताओं के कारवां को भी रात में विश्राम दीजिए। लुईस हे की किताब ‘यू कैन हील योर लाइफ’ पढ़िए, आप समझ जाएंगे कि निगेटिव इमोशंस का शरीर पर कितना असर पड़ता है।

3. डिनर जल्दी करो : सात बजे खाना, नो बहाना। यह आज के ऑफिस रूटीन में थोड़ा मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं। 12-14 घंटे खाने पर संयम रखना ‘इंटरमिटेंट फास्टिंग’ के नाम से पॉपुलर हुआ है। वैसे हमारी दादी भी ऐसा ही करती थीं। हफ्ते में तीन दिन करके देखिए, फर्क महसूस होगा।

परिवार : 1. चुप रहो : झगड़े में जब कड़वे शब्दों का तीर इस्तेमाल करने को दिल मचले, तो गहरी सांस लो। अपने अंदर का गुस्सा कागज पर लिख डालिए। अगर दो दिन बाद भी कहने का मन हो, तो शांत और शालीन तरह से बातचीत करें। आप मैच्योरिटी से पेश आएंगे तो रिस्पेक्ट बढ़ेगा। असर पड़ेगा।

2. जो दिखता है, वो बिकता है : समय से उठना, बड़ों का आदर करना, मोबाइल कम इस्तेमाल करना- आप चाहते हैं कि बच्चे ऐसी अच्छी आदतें अपनाएं। तो पहले आपको उनके सामने यह सब करना पड़ेगा। समझो बाय वन-गेट वन फ्री ऑफर अवेल कर रहे हैं- बच्चे का उद्धार, अपना भी सुधार।

3. मिलना-जुलना जरूरी है : जिंदगी की भाग-दौड़ में दोस्त, भाई, बहन, चाचा-बुआ : सारे रिश्ते हम वॉट्सएप पर निभाते हैं। लेकिन यह काफी नहीं। फेस-टु-फेस मिलना जरूरी है। दिल की बात शेयर करना जरूरी है। अब यह न सोचें कि वो पहले फोन करेंगे या आप। नहीं तो मिलेगा अकेलेपन का श्राप। कहना आसान, करना मुश्किल। कोशिश कर, ना बन बुजदिल। नया साल है, नई उमंगें- लिख ले नई कहानी। (ये लेखिका के अपने विचार हैं)

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