मृदुला द्विवेदी16 मिनट पहले
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गंगटोक के पास से बहती रंजीत नदी।
गंगटोक एक सुंदर शहर है, जो सिक्किम की राजधानी भी है। यह शहर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक माना जाता है। इस शहर के लोगों को स्वयं को स्वच्छ बनाए रखने में गर्व महसूस होता है। गंगटोक और उसके आस-पास देखने और गतिविधियां करने के लिए बहुत कुछ हैं। आइए, एक-एक करके इनका जायजा लेते हैं छांगू झील यह ऊंचाई पर स्थित एक बहुत ही खूबसूरत झील है जो सर्दियों में बर्फ से ढकी रहती है। इसकी नीली जलधारा ताजगी देने वाली होती है। यहां आपको आसपास गरमा-गरम खाने की चीजें और चाय भी मिल जाएगी, जिससे इस क्षेत्र में आना सार्थक हो जाता है। यहां याक की सवारी भी मिलती है, लेकिन झील के चारों ओर टहलना भी उतना ही शानदार अनुभव होता है।
नाथुला दर्रा यह दर्रा भारत और चीन के बीच की सीमा है। केवल भारतीय पर्यटक जिन्हें परमिट मिला हो, ही नाथुला दर्रा जा सकते हैं। विदेशी पर्यटक केवल छांगू झील तक ही जा सकते हैं, जो नाथुला के रास्ते में पड़ती है। नाथुला गंगटोक से एक दिन की यात्रा है और भारतीय पर्यटक किसी भी पर्यटन एजेंसी से परमिट बनवा सकता है। ये यात्राएं केवल बुधवार, गुरुवार, शनिवार और रविवार को आयोजित की जाती हैं। यहां चीनी सैनिक भी मिल जाते हैं, जो कई बार भारतीय पर्यटकों से हाथ भी मिलाना पसंद करते हैं।
बाबा हरभजन सिंह स्मारक मंदिर जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इसे भारतीय सेना के एक सैनिक बाबा हरभजन सिंह की स्मृति में बनाया गया है। यहां एक पुराना और एक नया मंदिर है। नया मंदिर नाथुला से लौटते समय आसानी से देखा जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि इस क्षेत्र में शहीद हुए इस वीर सैनिक की आत्मा इस मंदिर में आती है। छांगू झील, नाथुला और बाबा मंदिर एक ही पर्यटन मार्ग (सर्किट) का हिस्सा हैं और एक साथ देखे जा सकते हैं। लेकिन विदेशी पर्यटक नाथुला नहीं जा सकते।
कंचनजंगा व्यूपाॅइंट गंगटोक से कंचनजंगा पर्वत के सूर्योदय और सूर्यास्त के अद्भुत दृश्य देखने के कई स्थान हैं। हनुमान टोक, गणेश टोक और ताशी व्यूपॉइंट से दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी को उसके पूरे वैभव में देखा जा सकता है। हालांकि पहाड़ों के दृश्य मौसम पर निर्भर होते हैं। अगर बादल आ जाए तो दृश्य दिखाई नहीं देंगे। इन स्थानों तक पहुंचने के लिए स्थानीय टैक्सी ली जा सकती है।
रुमटेक मठ इस मठ की स्थापना 1734 में हुई थी। यह सिक्किम का सबसे बड़ा बौद्ध मठ है। यह पहाड़ियों के बीच स्थित है और यहां से गंगटोक शहर के अद्भुत नजारे देखे जा सकते हैं। मठ का परिसर विशाल भी है और सुंदर भी। आप वहां की प्रार्थना सेवा में भी भाग ले सकते हैं।
बैगुनेय यह रंजीत नदी के किनारे बसा एक छोटा और सुंदर कस्बा है। अगर आप प्रकृति के बीच एक दिन बिताना चाहते हैं तो यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सिक्किम में पेल्लिंग और लाचुंग जैसे कई अन्य खूबसूरत स्थान हैं, लेकिन वहां जाने के लिए एक दिन से ज्यादा समय की दरकार रहेगी।
एमजी रोड एमजी मार्ग गंगटोक का मुख्य बाजार है जहां केवल पैदल चलने की अनुमति है। इसमें कैफे, दुकानें और होटल हैं। यह शहर का मुख्य केंद्र है और शाम के समय इसकी रोशनी इसे और भी खूबसूरत बना देती है। यहां आपको स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के व्यंजनों का स्वाद चखने को मिल जाएगा।
देओराली रोपवे यह लगभग 1 किलोमीटर लंबा रोपवे है और इस पर से भी गंगटोक के शानदार दृश्य देखे जा सकते हैं। यह एक रोमांचकारी सवारी है। यह देओराली बाजार से ताशीलिंग तक जाती है और बीच में नाम नांग पर रुकती है। कौन-सा मौसम सबसे अच्छा? गंगटोक घूमने के लिए सबसे अच्छे महीने मार्च से मई और फिर सितंबर से मध्य दिसंबर तक माने जाते हैं। सिक्किम में काफी भारी बारिश होती है। इसलिए वर्षा ऋतु में यहां की यात्रा से बचना चाहिए। सर्दियों में ठंड होगी, लेकिन फिर भी जाया जा सकता है।
कैसे पहुंचें?: रेल द्वारा गंगटोक पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी है, जो लगभग 118 किलोमीटर दूर है। हवाई यात्रा के लिए बागडोगरा निकटतम हवाई अड्डा है, जो यहां से 121 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।








