पर्णश्री देवी3 घंटे पहले
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नुब्रा घाटी में दो-कूबड़ वाले ऊंटों की सवारी आकर्षण का केंद्र होती है।
नुब्रा घाटी लद्दाख की सबसे मनोहारी घाटियों में से एक है, जो अपने शानदार लैंडस्केप और विस्मयकारी दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। लेह से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस घाटी में क्या नहीं हैं- ऊंचे पर्वत, बीहड़ भू-भाग, शांत मठ, रेत के टीले और मनमोहक गांव। इन्हें देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। यह ऐसा स्थल है, जहां ऊंचाई वाले शुष्क रेगिस्तानों की कठोरता और बहती नदियों व हरियाली से भरे खेतों की कोमलता साथ-साथ देखने को मिलती है। लद्दाख के उत्तर-पूर्वी कोने में स्थित करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित नुब्रा प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और रोमांच चाहने चालों के लिए आदर्श स्थल है। नुब्रा केवल अपनी प्राकृतिक भव्यता से ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी आकर्षित करती है।
‘दुनिया की छत’ से गुजरकर नुब्रा पहुंचने के लिए यात्रियों को खारदुंग ला दर्रा पार करना होता है, जो दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़कों में से एक है। यह दर्रा अपने आप में एक रोमांच है। यहां घुमावदार सड़कें, बर्फ से ढके शिखर और सिंधु घाटी के विहंगम दृश्य देखने को मिलते हैं। जैसे ही आप नुब्रा में उतरते हैं, पूरा भू-परिदृश्य बदलने लगता है। बीहड़ पर्वत रेत के टीलों, चमकती नदियों और हरी-भरी घाटियों में तब्दील हो जाते हैं। यह परिवर्तन इतना अद्भुत होता है कि यात्रा खुद में ही मंजिल बन जाती है।
हुंदर: आसमान में रेगिस्तान नुब्रा के सबसे प्रतिष्ठित स्थलों में से एक है हुंदर, जो भारत के एकमात्र ठंडे रेगिस्तान का घर है। यहां बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच रेतीला रेगिस्तान फैला मिलता है। यहां यात्री बैक्ट्रियन ऊंट की सवारी का आनंद ले सकते हैं। ये दो-कूबड़ वाले ऊंट मध्य एशिया के मूल निवासी हैं और पहले ऊंचाई वाले व्यापार मार्गों पर माल ढोने के काम आते थे। सूर्यास्त के समय जब सुनहरी रोशनी घाटी को एंबर और गुलाबी रंगों में रंग देती है, तब ऐसा लगता है मानो हुंदर के टीले जीवंत हो उठे हैं।
दिस्कित मठ: शांति का प्रतीक यह नुब्रा का सांस्कृतिक दिल है, जो घाटी का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। यहां स्थित दिस्कित मठ लद्दाख के सबसे पुराने व सबसे बड़े मठों में से एक है। यह मठ तिब्बती बौद्ध धर्म के गेलुग्पा (येलो हैट) संप्रदाय से संबंधित है और इसकी स्थापना 14वीं सदी में हुई थी। मठ से घाटी के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं। यहां मैत्रेय बुद्ध की एक विशाल प्रतिमा भी स्थापित है, जो शांति और सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है। मठ परिसर में भित्तिचित्र, ग्रंथ और डोसमोचे नामक एक वाइब्रेंट उत्सव भी होता है, जिसमें पारंपरिक मुखौटा नृत्य और अनुष्ठान शामिल हैं।
तुर्तुक: बाल्टिस्तान संस्कृति का द्वार नुब्रा घाटी के और उत्तर में स्थित है तुर्तुक, जो लद्दाख के अन्य गांवों से बिलकुल अलग है। यह कराकोरम पर्वतों की गोद में बसा है और यहां संस्कृति, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह गांव खुबानी के बागों के लिए प्रसिद्ध है, जो वसंत और गर्मियों में रंग-बिरंगे फूलों से भर जाते हैं। यहां का बाल्टी हेरिटेज म्यूजियम बाल्टी समुदाय की परंपराओं, कलाकृतियों और जीवनशैली को दर्शाता है। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण इस गांव में रॉयल पैलेस भी स्थित है, जहां पर्यटक स्थानीय राजा से मिल सकते हैं और तुर्तुक के शाही इतिहास को जान सकते हैं।
पनामिक: हिमालय की गरम जलधाराएं यह नुब्रा घाटी के पूर्व में स्थित है, जो यहां के सल्फर युक्त गरम पानी के स्रोतों के लिए प्रसिद्ध है। माना जाता है कि इन जलस्रोतों में औषधीय गुण होते हैं। यहां से बर्फ से ढका एन्सा मठ और दूर स्थित सियाचिन ग्लेशियर के दृश्य दिखाई देते हैं। पनामिक भारत-चीन सीमा से पहले के अंतिम गांवों में से एक है। यहां के थर्मल स्प्रिंग्स में स्नान करने के अलावा पर्यटक पास ही स्थित यारब त्सो नामक एक पवित्र झील तक भी जा सकते हैं, जो थोड़ी-सी चढ़ाई के बाद मिलती है और गहन शांति का अनुभव कराती है।
ध्यान रखें ये बातें परमिट: यह एक संरक्षित क्षेत्र में आती है। भारतीय नागरिकों के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) अनिवार्य है, जबकि विदेशी नागरिकों को प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) की आवश्यकता होती है। ये परमिट लेह में प्राप्त किए जा सकते हैं। ठहरने के विकल्प: नुब्रा में होमस्टे, गेस्टहाउस और कैंप्स जैसे ठहरने के विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं। स्थानीय परिवारों के साथ रहना लद्दाखी मेहमाननवाजी का अनुभव करने का एक शानदार तरीका है। अनुकूलन करें: ऊंचाई अधिक होने के कारण शरीर को मौसम के अनुरूप ढालना जरूरी है। नुब्रा जाने से पहले लेह में कम से कम दो दिन बिताना उचित होता है। पर्याप्त पानी पिएं और यात्रा के पहले 24 घंटे में भारी परिश्रम से बचना चाहिए।








