मृदुला द्विवेदी3 घंटे पहले
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बूंदी स्थित तारागढ़ किला।
कबिनी नेशनल पार्क कर्नाटक स्थित नागरहोल नेशनल पार्क का दक्षिणी हिस्सा है। इसका नाम कबिनी नदी से पड़ा है, जो इस क्षेत्र से होकर बहती है। यह इस इलाके का एक लोकप्रिय सफारी जोन है। यहां अन्य राष्ट्रीय उद्यानों की तरह सामान्य जंगल सफारी तो होती ही है, लेकिन रिवर सफारी एक अतिरिक्त आकर्षण है, जिसे कर्नाटक वन विभाग द्वारा संचालित किया जाता है। जीप या कैंटर सफारी : जमीन पर होने वाली सफारी के लिए जीप और कैंटर दोनों विकल्प उपलब्ध हैं। कैंटर सस्ता होता है और उसी मार्ग पर चलता है, जिस मार्ग पर जीप सफारी की जाती है। लेकिन इसकी गति धीमी होती है। हालांकि जंगल के गाइड काफी अनुभवी होते हैं और आप दोनों में से किसी भी विकल्प को चुन सकते हैं। पार्क में बाघ और तेंदुएं काफी संख्या में हैं, लेकिन यहां का असली आकर्षण ‘साया’ नाम का काला पैंथर है। ये तमाम जानवर जंगल में मुक्त भाव से घूमते हैं। हालांकि किसी भी वन्यजीव की तरह इनका दिखना पूरी तरह किस्मत पर निर्भर करता है और इसकी कोई गारंटी नहीं होती है। आप जितनी बार सफारी करेंगे, उनके दिखने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। जानवरों के अलावा जंगल भी अपने आप में अद्भुत है, इसलिए खुले मन से जाएं और यहां जो भी नजर आए, उसे खुशी से स्वीकार करें।
बोट सफारी : कबिनी की बोट सफारी जंगल का एक अलग रूप दिखाती है। यहां मगरमच्छ, नदी किनारे घूमते हाथी और पेड़ों पर बैठे पक्षी मुख्य आकर्षण होते हैं। नाव से दिखने वाला प्राकृतिक दृश्य बेहद सुंदर लगता है। इस समय भांति-भांति के पक्षियों को देखने का भी मौका मिलता है। बोट्स पर वन विभाग का गाइड होता है जो इलाके और दिखने वाली प्रजातियों के बारे में जानकारी देता है। सफारी की बुकिंग नागरहोल नेशनल पार्क की वेबसाइट पर ऑनलाइन की जा सकती है। यदि यह असुविधाजनक लगे तो जिस रिसॉर्ट में आप ठहरे हैं, वे भी आपके लिए बुकिंग कर सकते हैं क्योंकि उनके पास वन विभाग की ओर से एक निश्चित कोटा होता है।
हाथियों का माइग्रेशन सीजन: हाथियों का माइग्रेशन सीजन नवंबर से मई तक होता है, लेकिन सबसे अच्छे नजारे उन महीनों में देखने को मिलते हैं, जब बारिश ना हो रही हो। इन महीनों में बड़ी संख्या में हाथियों के झुंड नदी किनारे, कीचड़ वाले मैदानों और बैकवॉटर के पास इकट्ठा होते हैं। यह देखने लायक दृश्य होता है। बारिश आते ही हाथी तितर-बितर हो जाते हैं। इस अद्भुत प्राकृतिक घटना को देखने के लिए बोटी सफारी बहुत अच्छा विकल्प है। पानी के पास बने रिसॉर्ट्स से भी यह दृश्य देखा जा सकता है।
आदिवासी गांवों की यात्रा: आपका रिसॉर्ट पास के गांवों की सैर भी करवा सकता है। कई रिसॉर्ट आसपास के गांवों के लोगों को रोजगार देते हैं, जो बाद में गाइड बन जाते हैं। वे वहां के लोगों की जीवन शैली समझाते हैं जो कांक्रीट के ढांचों में रहने के बजाय प्रकृति के साथ रहने के आदी हैं। सरकार ने कई गांवों में पक्के मकान बनवा दिए हैं, लेकिन लोग अक्सर उन घरों का उपयोग स्टोर रूम की तरह करते हैं और रहना अपनी झोपड़ियों में ही पसंद करते हैं, जो उन्हें प्रकृति के ज्यादा करीब महसूस होती हैं। भाषा में कठिनाई हो सकती है, लेकिन गाइड समझा देता है और मुस्कान से बाकी दूरियां मिट जाती हैं।
मैसूर से सिर्फ 70 किमी दूर – कैसे पहुंचें? नजदीकी हवाई अड्डा मैसूर है जो कबिनी से लगभग 70 किलोमीटर दूर है। हालांकि बेंगलुरु हवाई अड्डे पर अधिक उड़ानें मिलती हैं, लेकिन वह कबिनी से 200 किलोमीटर दूर है। मैसूर रेल नेटवर्क से भी अच्छे से कनेक्टेड है। तो रेलयात्रा करने वाले भी मैसूर से कबिनी आ सकते हैं। मैसूर और बेंगलुरु दोनों से बसें उपलब्ध हैं। – कहां ठहरें? कबिनी नदी के पास कई उच्च स्तरीय रिसॉर्ट्स हैं। बजट रिसॉर्ट्स भी पार्क के आसपास मिल जाते हैं। डॉरमेट्री और टेंट जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं। – कब जाएं? अक्टूबर से फरवरी तक की ठंड का मौसम हाई सीजन माना जाता है, जब मौसम अच्छा होता है लेकिन कीमतें ज्यादा और भीड़ भी अधिक होती है। मार्च से सितंबर गर्म महीने हैं, पर इस समय कीमत और भीड़ दोनों कम होती है। जून से सितंबर बारिश का मौसम होता है, लेकिन पार्क खुला रहता है। हाथियों का माइग्रेशन मार्च से मई के बीच होता है, जो रोमांचक होता है।
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