रसरंग में बच्चों की बात:  दूध के दांतों में इस तरह रोकें कैविटी
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रसरंग में बच्चों की बात: दूध के दांतों में इस तरह रोकें कैविटी

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डॉ दीपक उग्रा2 घंटे पहले

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भारत में स्कूल जाने वाले बच्चों में ओरल हेल्थ को लेकर ज्ञान और जानकारी विकसित देशों के बच्चों की तुलना में काफी कम होती है। माता-पिता अपने बच्चों में स्वस्थ ओरल आदतों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अभिभावकों को दूध के दांतों के महत्व और नियमित रूप से डेंटिस्ट के पास जाने की जरूरत के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है। अधिकांश बच्चों के लिए नियमित दंत चिकित्सा देखभाल एक वर्ष की उम्र से शुरू होनी चाहिए और साल में कम से कम दो बार दंत चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।

क्या दूध के दांत महत्वपूर्ण हैं? यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि जब दूध के दांत अंततः गिर ही जाते हैं तो क्या इनकी इतनी अहमियत होती है? बिल्कुल होती है। दूध के दांत बच्चे के चेहरे के आकार को बनाए रखते हैं और स्थायी दांतों को सही स्थान पर आने में मदद करते हैं। वे खाने और बोलने की सीखने की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दूध के दांत लगभग 12 वर्ष तक रहते हैं। स्वस्थ दूध के दांत भोजन चबाने, भाषा विकास, जबड़े की वृद्धि, मांसपेशियों के समन्वय और सौंदर्य के लिए आवश्यक होते हैं, जिससे बच्चे का आत्मविश्वास भी बढ़ता है। इसलिए इनकी देखभाल करना बहुत जरूरी है।

दूध के दांतों में कैविटी कैसे होती है? दूध के दांतों की बाहरी परत (एनामेल) स्थायी दांतों की तुलना में पतली होती है। इससे उनमें दंत क्षय (कैविटी) की आशंका अधिक होती है। कैविटी बैक्टीरिया के कारण होती है और यह तब तेजी से बढ़ती है, जब दांत बार-बार मीठे तरल पदार्थों जैसे कि फॉर्मूला मिल्क, साधारण दूध, जूस, शेक और आइसक्रीम आदि के संपर्क में आते हैं। अगर दांतों को नियमित रूप से साफ नहीं किया जाता है तो मुंह में मौजूद बैक्टीरिया इस चीनी को एसिड में बदल देते हैं, जो दांतों को नुकसान पहुंचाता है। अगर बच्चे को सोते समय या झपकी के दौरान मीठे पेय दिए जाते हैं, तो यह अधिक नुकसानदायक होता है क्योंकि सोते समय लार का प्रवाह कम हो जाता है। दांतों की सड़न दर्द पैदा कर सकती है, जिससे बच्चे को सोने, खाने या बोलने में कठिनाई हो सकती है। इससे बच्चे की ध्यान केंद्रित करने और सीखने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

दांतों की सड़न की पहचान कैसे करें? कैविटी के शुरुआती संकेत सफेद धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं। इसके बाद हल्के भूरे रंग के धब्बे विकसित होते हैं, जो धीरे-धीरे गहरे रंग में बदल सकते हैं और दांतों में छेद (कैविटी) हो सकता है। मीठे और ठंडे पेय या भोजन से संवेदनशीलता महसूस हो सकती है।

कैविटी को कैसे रोका जा सकता है? अच्छी ओरल हैबिट्स के साथ कैविटी को रोका जा सकता है। अच्छी आदतें डलवाने की जिम्मेदारी अंतत: माता-पिता की ही होती है। बच्चे को दिन में कम से कम दो बार (भोजन के बाद) ब्रश करने और नियमित रूप से फ्लॉस करने की आदत डालनी चाहिए। बच्चे को मीठे खाद्य पदार्थ, जूस, कैंडी (विशेष रूप से चिपचिपी गमी कैंडी, गमी विटामिन या फ्रूट रोल-अप) से बचाना चाहिए या अगर वे खाते हैं तो उन्हें खाने के बाद मुंह को अच्छी तरह कुल्ला करने के लिए कहना चाहिए।

कैसे करें बच्चों की दांतों की देखभाल? 6-12 महीने के शिशु – इस अवधि के दौरान बच्चे का पहला दांत आमतौर पर निकल जाता है। लेकिन अगर 15 महीने की उम्र तक दांत नहीं आता है, तब भी चिंता की कोई विशेष बात नहीं है। – प्रत्येक फीडिंग के बाद और सोने से पहले बच्चे के दांतों पर माता-पिता अपनी उंगली से हल्की ब्रशिंग करें। आप बहुत छोटे और बेहद नरम ब्रिसल वाले ब्रश से भी बच्चे के दांत साफ कर सकते हैं। – टूथपेस्ट बहुत कम मात्रा में लगाएं, केवल चावल के दाने के बराबर। – जैसे-जैसे बच्चा चलना सीखता है, दांत या चेहरे की संभावित चोटों के प्रति सतर्क रहें। 1-3 वर्ष के बच्चे – बच्चे के दंत चिकित्सक द्वारा सुझाए गए नियमित दंत परीक्षण और क्लीनिंग के शेड्यूल का पालन करें। – लगभग 3 वर्ष की आयु में, जब बच्चा कुल्ला करना और थूकना सीख जाता है, तो उसे मटर के दाने के बराबर टूथपेस्ट से ब्रश कराया जा सकता है। – यह आम बात है कि छोटे बच्चों में दूध या जूस की बोतल मुंह में लेकर सोने की आदत के कारण कैविटी हो जाती है। इस आदत को सख्ती से हतोत्साहित किया जाना चाहिए। – जब बच्चा अपने पहले जन्मदिन के करीब पहुंचे तो माता-पिता को चाहिए कि उसे दूध और पानी कप से पीने के लिए प्रोत्साहित करें। – यदि बच्चे के दांत सीधे नहीं हैं, तो ऑर्थोडेन्टिस्ट (दंत चिकित्सक) से परामर्श लें। कम उम्र में दांतों को सही आकार में लाना आसान और अधिक प्रभावी होता है।



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