रूमी जाफरी4 घंटे पहले
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आज बात मेरे सबसे करीबी दोस्त की, जिसके साथ मैंने सबसे ज्यादा हिट फिल्में की हैं। उस हीरो की, जिसने मुझे डायरेक्टर बनाया और जो इस वक्त का सबसे बड़ा सुपरस्टार है। मैं बात कर रहा हूं सलमान खान की। दुनिया जानती है कि सलमान का दिल कितना बड़ा है और वो सब लोगों के प्रति कितने हमदर्द हैं। सलमान उन नेक लोगों में से हैं, जो मानते हैं कि एक हाथ से दो तो दूसरे हाथ को पता भी नहीं लगना चाहिए। मुझे याद है, यह 2004-05 की बात है। मैंने एक अंग्रेजी मैगजीन को दिए इंटरव्यू में सलमान की नेकियों और अच्छाइयों के किस्से सुना दिए थे कि किस तरह उन्होंने कई लोगों की पैसों से मदद की, कई बार दूसरों की जान बचाई। ये सुनकर सलमान मुझसे नाराज हो गए थे। उनका मानना था कि गुप्त दान या गुप्त मदद ही असली नेकी है।
मैंने एक फिल्म बनाई थी ‘गली गली चोर है’। इसकी शूटिंग के फ्री टाइम में हम सब बैठकर बातें करते रहते थे। एक दिन मैंने टीम को सलमान का एक किस्सा सुनाया। मैंने बताया कि एक रात सलमान टाउन से लौट रहे थे। तभी उनके सामने ही एक कार डिवाइडर से टकरा गई। उसका बहुत बड़ा एक्सीडेंट हो गया था। सलमान ने अपनी गाड़ी रोकी, दौड़कर उस कार तक पहुंचे तो देखा कि दो लड़के लहूलुहान हालत में पड़े थे। उन्होंने तुरंत उन्हें अपनी कार में डाला, अस्पताल ले गए और एडमिट कराया। इसके बाद एक लड़के का पता लेकर वो आधी रात को उसके घर पहुंचे। उन्होंने घर की घंटी बजाई। जब घरवालों ने दरवाजा खोला और सामने सलमान खान को देखा तो वे सब एक्साइटेड हो गए। सलमान उनको बताना चाह रहे थे कि आपके लड़के का एक्सीडेंट हो गया है। वो बात उनको थोड़ी देर से समझ में आई। पहले तो वो यही देखकर हैरान थे कि सलमान उनके घर पर हैं। उसके बाद सलमान उनको लेकर अस्पताल पहुंचे। ये किस्सा सुनकर मेरी फिल्म में राम का किरदार निभा रहे अमित मिस्त्री खड़े हो गए और बोले, ‘रूमी भाई, आपको पता है जिन लड़कों को उस रात सलमान ने बचाया था, उनमें से एक मैं था।’ यह जानकर मैं चौंक गया। उन्होंने कहा, ‘हां, मेरे घरवाले आज भी सलमान को दुआएं देते रहते हैं। आदमी अगर हो तो ऐसा नेक और हमदर्द।’
इस वाकये पर मुझे कैसर-उल-जाफरी का शेर याद आता है: जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो कि आस-पास की लहरों को भी पता न लगे एक और किस्सा मेरे अपने ही घर का है। 2003-04 की बात है। रात के करीब साढ़े तीन बजे सलमान का फोन आया। मैं और मेरी पत्नी गहरी नींद में थे। मैंने घबराकर फोन उठाया। सलमान ने पूछा, “हनान (मेरी पत्नी का नाम) कहां है?” मैंने कहा, “यहीं पास में बैठी हैं, बताइए क्या हुआ?”
सलमान ने बताया कि हनान की बहन के दोनों बेटों का एक्सीडेंट उनके घर के सामने ही हुआ है और वो उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे हैं। मेरी पत्नी की बहन के दो बेटे थे। एक का नाम अंजर था। दूसरे का नाम तुराब है। अंजर की तो मौके पर ही डेथ हो गई थी। यह सुनकर मैं हक्का-बक्का रह गया। मैं और हनान तुरंत सीधे लीलावती पहुंचे। वहां अंजर की बॉडी रखी हुई थी। वहां सलमान ने बताया, ‘रूमी भाई, मैं बस सोने जा रहा था। बाहर हल्की बारिश हो रही थी। तभी जोर का धमाका सुना। बाहर निकला तो एक कार उलटी पड़ी थी। तीन लड़के खून से लथपथ थे। दो को रिक्शा में डालकर अस्पताल भिजवाया, लेकिन तीसरे (अंजर) का वजन ज्यादा था। उसे निकालना मुश्किल हो रहा था। फिर भी किसी तरह निकाला और जब वह रिक्शे में फिट नहीं हुआ तो मैं अपनी कार ले आया। उसके पैर गाड़ी से बाहर लटक रहे थे। मैंने जाफर (सलमान के नौकर) से कहा कि दरवाजा पकड़े रहो और मैं तेजी से गाड़ी चलाता हुआ अस्पताल पहुंचा। लीलावती पहुंचकर जब अंजर को कार से बाहर निकाला और रोशनी उसके चेहरे पर पड़ी, तब जाफर बोल पड़ा कि अरे, ये तो रूमी भाई की बीवी की सिस्टर का बेटा है। इसके बाद मैंने फोन करके आप लोगों को बुलाया।’
आज भी मेरे ससुरालवाले, मेरी साली, तुराब और उसका दोस्त सलमान को दुआएं देते रहते हैं। अंजर तो इस दुनिया से चला गया, लेकिन तुराब और उसका दोस्त सिर्फ सलमान की वजह से बच पाए। सलमान की इंसानियत और नेकियों के इतने किस्से हैं कि अगर लिखने बैठूं तो एक कॉलम में तो समा ही नहीं सकते। शायद एक किताब लिखनी पड़े। बस यही दुआ है कि सलमान को उनकी अच्छाइयों का सिला हमेशा मिलता रहे और ऊपरवाला उन्हें हर मुसीबत और हर परेशानी से महफूज रखे। आज सलमान की याद में मेरी पहली फिल्म, जो मैंने उनके साथ डायरेक्ट की थी ‘गॉड तुस्सी ग्रेट हो’ का गाना सुनिए, अपना खयाल रखिए, खुश रहिए। ओ गॉड तुस्सी ग्रेट हो…








