मृदुला द्विवेदी21 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

जैसलमेर एक छोटे कस्बे जैसा सुकूनभरा एहसास कराता है। यहां कई खूबसूरत दर्शनीय स्थल हैं। अगर आप रेत के टीलों या धोरों को देखना और असली रेगिस्तान का अनुभव करना चाहते हैं तो यह घूमने के लिए एक आदर्श जगह है। इसे ‘गोल्डन सिटी’ नाम से भी जाना जाता है और यह नाम पुराने शहर में बलुआ पत्थरों से निर्मित घरों की वजह से मिला है।
जैसलमेर का किला: इसे ‘गोल्डन फोर्ट’ भी कहा जाता है। इसे जैसलमेर के संस्थापक राजा जैसल ने बनवाया था। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। यह एक जीवंत किला है, क्योंकि इसकी दीवारों के भीतर लोग रहते हैं और यहां कई होटल भी बने हुए हैं। इसका निर्माण 1156 ईस्वी में हुआ था, जिससे जैसलमेर शहर की नींव पड़ी। यह विशाल किला राजस्थानी स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण है। किले के भीतर खूबसूरत नक्काशीदार मंदिर हैं और स्मृति-चिह्नों की दुकानें भी मिलती हैं।
गडीसर झील: यह जैसलमेर का प्रमुख पर्यटन स्थल है। इसे 14वीं सदी में रावल जैसल और रावल गडसी सिंह ने बनवाया था। झील के बीच में कृष्ण मंदिर है और किनारों पर सुंदर नक्काशीदार छतरियां बनी हुई हैं। खासकर सूर्यास्त के समय झील का नजारा बेहद मनमोहक हो जाता है, जब पानी के ऊपर सुनहरी रोशनी का प्रतिबिंब झिलमिलाने लगता है। झील में नौका विहार का अनुभव भी यादगार रहता है।
सैम और लखमन के रेतीले टीले: असल रेगिस्तान को देखने के लिए ये सबसे मुनासिब जगह मानी जाती हैं। यहां आपको अथाह रेत का नजारा देखने को मिलता है। सैम ज्यादा लोकप्रिय है, जबकि लखमन अपेक्षाकृत शांत और सुकूनभरा स्थान है। सैम में ड्यून बैशिंग (जीप से रेत के टीलों पर सवारी) का मजा लिया जा सकता है। ये दोनों जैसलमेर शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित हैं।
कुलधारा गांव: कुलधारा एक परित्यक्त गांव है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह भूतिया है। गांव के मकान और ढांचे खंडहर हो चुके हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षित रखा गया है। सूर्यास्त के बाद यहां जाना मना है। इस गांव के खाली होने के पीछे कई अलग-अलग कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार कभी यह समृद्ध गांव हुआ करता था, पर यहां के सामंत या राजा ने इतने अधिक लगान लगा दिए थे कि लोग परेशान हो गए। जब उसने यहां के एक समुदाय के मुखिया की बेटी पर नजर डाली तो उस समुदाय के लोगों ने 84 अन्य गांवों के साथ एक ही रात में कुलधारा छोड़ दिया और तभी से यह गांव वीरान पड़ा है। सैम और लखमन के टीलों की ओर जाते समय यहां घूमना अच्छा अनुभव रहता है। किराडू मंदिर:
किराडू के मंदिरों को जैसलमेर से एक दिन की यात्रा में देखा जा सकता है। ये जैसलमेर से करीब 155 किलोमीटर दूर बाड़मेर के पास स्थित हैं। यहां पांच मंदिर हैं, जिनमें विष्णु और शिव मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। माना जाता है कि इन मंदिरों का निर्माण 11-12वीं सदी में चालुक्य राजाओं के अधिकारियों द्वारा करवाया गया था।
स्थानीय खरीदारी: जैसलमेर अपने शीशे की कढ़ाई वाले कपड़ों, कैमल लेदर वस्तुओं और आभूषणों के लिए मशहूर है। यहां कई स्थानीय बाजार हैं, जहां से आप ये और अन्य हस्तशिल्प खरीद सकते हैं। प्रमुख बाजारों में सदर बाजार, भाटिया बाजार और मानक चौक शामिल हैं। प्रसिद्ध स्मारकों के पास भी कई जगह स्मृति-चिह्न उपलब्ध रहते हैं।
रैगिस्तान कैंप में रहने का अनूठा अनुभव कब जाएं: नवंबर से फरवरी तक का समय यहां जाने का सबसे अच्छा मौसम माना जाता है। इस समय मौसम सुहावना होता है। मार्च, सितंबर और अक्टूबर को शोल्डर सीजन कहा जाता है, जब मौसम ठीक-ठाक रहता है। अप्रैल से अगस्त ऑफ-सीजन होता है, क्योंकि इस दौरान यहां बहुत गर्मी होती है। कहां ठहरें: जैसलमेर में हर जेब के हिसाब से होटल मौजूद हैं। यहां ठहरने के दो अनोखे विकल्प भी हैं। पहला, जैसलमेर किला जिसके भीतर अनेक होटल बने हैं। दूसरा, रेगिस्तान कैंप जहां आप टेंट में रह सकते हैं और रेत के बीच सूर्योदय व तारों भरी रात का आनंद उठा सकते हैं। कैसे पहुंचें: जैसलमेर में रेलवे स्टेशन है, जहां भारत के कई बड़े शहरों से ट्रेनें आती हैं। निकटतम हवाई अड्डा जोधपुर में है, जो यहां से करीब 288 किलोमीटर दूर है। बस सेवाएं भी जोधपुर, जयपुर आदि शहरों से उपलब्ध हैं।








