![]()
किताबों से जानिए, आखिर कैसे खुद के प्रति करुणा का मतलब कमजोर होना नहीं? इंतजार छोड़कर इसी क्षण अपना पहला कदम उठाएं
हम अक्सर टालमटोल को आलस्य का नाम देते हैं जबकि इसकी जड़ें डर, असफलता की आशंका या मानसिक दबाव में हैं। मन कहता है किसी बेहतर मौके का इंतजार करें। लेकिन वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत तब होती है, जब हम इंतजार छोड़कर इसी क्षण पहला कदम उठाते हैं। (द नाउ हैबिट -नील फिओरे ) अपने दर्द और असफलता को भी अपनाना शुरू करें
खुद के प्रति करुणा का मतलब कमजोर होना नहीं, खुद को इंसान समझना है। अपनी गलतियों पर खुद को कोसने के बजाय खुद को समझना शुरू करें। आत्म-आलोचना हमें भीतर से तोड़ती है। अपने दर्द और असफलता को भी अपनाएं, जैसे आप किसी प्रिय व्यक्ति के साथ व्यवहार करते हैं। (सेल्फ-कम्पैशन -क्रिस्टिन नेफ) इसको समझें कि हर चीज आपके नियंत्रण में नहीं है
अक्सर लोग बाहरी चीजों में खुशी खोजते हैं, लेकिन स्थायी संतोष वहां नहीं मिलता। जीवन की अनिश्चितताओं को स्वीकार करना और अपनी अपेक्षाओं को नियंत्रित करना मानसिक शांति की शुरुआत है। जब हम यह समझते हैं कि हर चीज हमारे नियंत्रण में नहीं है, तो अनावश्यक तनाव कम होने लगता है। (ए गाइड टु द गुड लाइफ -विलियम इरविन) किसी खास क्षण के बाद ही खुशी की उम्मीद न रखें
हम सोचते हैं कि किसी खास उपलब्धि या स्थिति के बाद हम खुश रहेंगे, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। इंसान किसी भी परिस्थिति के साथ धीरे-धीरे अनुकूल होता है। खुशी अंतिम पड़ाव नहीं है। यह बदलते अनुभवों के बीच चलने वाली स्थिति है। जब हम यह समझते हैं, तब खुश रहना सीखते हैं। (स्टंबलिंग ऑन हैप्पीनेस -डैनियल गिल्बर्ट)
Source link








