रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:  जब रूसी राष्ट्रपति ने गाया था राज कपूर का गीत
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रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: जब रूसी राष्ट्रपति ने गाया था राज कपूर का गीत

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रूमी जाफरी3 घंटे पहले

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आज यानी 14 दिसंबर को राज कपूर का जन्मदिन है। फिल्मों से प्यार करने वाला शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो राज कपूर से मोहब्बत न रखता हो। हिंदी सिनेमा में उनका योगदान कितना बड़ा है, यह पूरी दुनिया भली-भांति जानती है। लेकिन अन्य देशों, विशेष रूप से रूस और उन देशों में जो कभी सोवियत संघ का हिस्सा थे, जैसे कजाखिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किरगिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, रोमानिया, बेलारूस, जॉर्जिया वगैरह में भी उन्हें खूब सम्मान मिला। अभी पिछले हफ्ते रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए थे। अपने आधिकारिक भाषण में उन्होंने भी राज कपूर का जिक्र किया, जबकि राज साहब को इस दुनिया से गए 37 साल गुजर चुके हैं। यह बताता है कि कला की सच्ची रोशनी समय की सीमाओं से परे जाकर दिलों में बस जाती है।

राज कपूर की बड़ी बेटी ऋतु नंदा जी का एक प्रसंग मुझे आज भी याद है। यह 1995-96 के आसपास की बात है, जब मैं दिल्ली में था। उन्होंने मुझे अपने घर भोजन पर बुलाया। उस दिन हुई लंबी बातचीत में उन्होंने राज साहब के कई किस्से सुनाए। उसी दौरान उन्होंने एक घटना बताई, जिसे मैं आज आप सबके साथ साझा करना चाहता हूं। बकौल ऋतु नंदा जी, यह 1993 की बात है, जब रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन दिल्ली आए हुए थे। मैंने (ऋतु जी ने) उनसे मिलने की ख्वाहिश जाहिर की और मुझे राष्ट्रपति के यहां से तुरंत निमंत्रण भी मिल गया। जब मैं राष्ट्रपति भवन पहुंची तो येल्तसिन जी ने मेरा बहुत आत्मीयता के साथ स्वागत किया। उनकी आंखों में जो गर्मजोशी थी, वह किसी औपचारिकता से पैदा नहीं हो सकती थी। मेरी किताब पर उन्होंने अपने हाथों से लिखा कि वह मेरे पिता से बहुत प्रेम करते थे और आज भी उन्हें याद करते हैं। किसी दूसरे देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति से यह सुनना केवल सम्मान नहीं, बल्कि एक गहरी मानवीय अनुभूति थी।

राज साहब के बारे में कृष्णा आंटी ने भी एक किस्सा सुनाया था। 50 के दशक में जब वे रूस गए थे तो लाखों लोग उनका स्वागत करने उमड़ पड़े थे। जगह-जगह लोग सड़कों पर खड़े होकर गीत गाते थे- आवारा हूं आवारा हूं या गर्दिश में हूं आसमान का तारा हूं। किसी पराए देश में अपने ही गीत को किसी और की आवाज में सुनना एक अलग ही अनुभव था। बकौल कृष्णा आंटी, फिर मैं 1994 में भी रूस गई। जहां मैं ठहरी थी, वहां के स्टॉफ को जैसे ही पता चला कि मैं राज कपूर की पत्नी हूं तो वे आदर के भाव से भर उठे। उन्होंने मुझसे राज जी के बारे में पूछा। जब मैंने बताया कि राज जी अब इस दुनिया में नहीं हैं तो वे लोग रो पड़े। रूस के लोग राज साहब से इतना प्यार करते थे। राज साहब को गए 37 वर्ष हो चुके हैं, पर रूस के लोगों के दिलों से आज तक नहीं गए। इसी बात पर जलालुद्दीन अकबर का एक शेर याद आता है :

ये भूल भी क्या भूल है ये याद भी क्या याद तू याद है और कोई नहीं तेरे सिवा याद

ऋतु जी ने मुझे एक और किस्सा सुनाया था, जो शायद उन्होंने अपनी किताब में भी लिखा है। इंदिरा गांधी ने उन्हें बताया था कि 1956-57 में जब वे नेहरू जी के साथ सोवियत संघ गई थीं, उस समय के राष्ट्रपति बुलगानिन ने नेहरू जी के भाषण के बाद अपनी स्पीच शुरू करने से पहले ‘आवारा’ फिल्म का टाइटल ट्रैक गाकर सुनाया। सोचिए, एक विदेशी राष्ट्रपति मंच से हिंदी गीत गा रहा हो और पूरा सभागार उस धुन के साथ झूम रहा हो।

एक और घटना मुझे याद आती है। मैं एक फिल्म बनाने की योजना बना रहा था और उसमें ऋषि कपूर मुख्य भूमिका निभाने वाले थे। कहानी विदेश में आधारित थी। प्रोड्यूसर ने कहा कि हम जार्जिया में शूटिंग करते हैं। उन्होंने वहां की मिनिस्ट्री से कांटैक्ट किया कि उन्हें परमिशन कैसे मिलेगी, क्या-क्या फेसिलिटीज मिलेंगी और खर्चा कितना होगा। जब मिनिस्ट्री ने स्टार कास्ट में ऋषि कपूर का नाम देखा तो प्रोड्यूसर से कहा कि अगर आप राज कपूर के बेटे को जार्जिया लेकर आते हैं तो हर सरकारी चीज आपको फ्री मिलेगी। ऋषि कपूर स्टेट गेस्ट होंगे और उनका आवास, उनकी कार, उनकी सिक्योरिटी, सबकी व्यवस्था की जिम्मेदारी सरकार की होगी। एयरपोर्ट पर हमारे राष्ट्रपति खुद आकर उनको रिसीव करेंगे।

अब इसके आगे क्या लिखूं। राज कपूर साहब ने दुनिया में कितनी इज्जत कमाई थी, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। आज राज कपूर की याद में उनकी फिल्म ‘श्री 420’ का ये गाना सुनिए, अपना ख्याल रखिये, खुश रहिए :

मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंग्लिस्तानी सर पर लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी।



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