इंस्पायरिंग:  असल में ताकतवर वह है, जो बदलते माहौल के साथ खुद को ढाल सके – कुमार मंगलम बिरला
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इंस्पायरिंग: असल में ताकतवर वह है, जो बदलते माहौल के साथ खुद को ढाल सके – कुमार मंगलम बिरला

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1 घंटे पहले

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उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला हाल ही में लंदन यूनिवर्सिटी की मानद डॉक्टरेट से सम्मानित हुए हैं, उनकी कुछ प्रेरक बातें… बैच ऑफ 2025… सबसे पहले, मेरी ओर से आप सभी को दिल से बधाई। आज आप अपने जीवन के एक नए मोड़ पर खड़े हैं। दुनिया तेजी से बदल रही है और यह बदलाव बिल्कुल साधारण नहीं है। पिछले कई दशकों में जिस स्थिरता और वैश्विक सहमति पर दुनिया चलती आ रही थी, वह अब टूट चुकी है। जिन मान्यताओं पर हमने करियर, कारोबार और देशों का भविष्य खड़ा किया- ग्लोबलाइजेशन, फ्री ट्रेड, खुले बाजार… ये सब अब नए सवालों के घेरे में हैं। कई दशक पहले भारत के आईटी सेक्टर ने लाखों युवाओं को पश्चिमी देशों में काम के नए रास्ते दिखाए। हम सबने गर्व के साथ देखा कि सत्या नडेला और सुंदर पिचाई जैसे भारतीय युवा कुछ ही सालों में दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के शीर्ष पर पहुंच गए। लेकिन आज के हालात बदल चुके हैं। अमेरिका का ट्रेड वॉर, चीन की बढ़ती आत्मनिर्भरता और नई टेक्नोलॉजी की होड़… इन सबने पुराने बिजनेस मॉडल को तोड़कर नई हकीकत खड़ी कर दी है। अब जरूरत है खुद को फिर से गढ़ने की… री-इन्वेंट करने की। पुराने तरह की सीढ़ी-दर-सीढ़ी बढ़ने वाली करियर सोच अब कारगर नहीं। आज के समय में असली ताकत उसके पास है, जो बदलते माहौल के साथ खुद को ढाल सके, जल्दी सीख सके और भावनात्मक रूप से मजबूत रह सके। बदलती दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बड़ा गेम-चेंजर है। एआई सिर्फ आपका काम तेज नहीं करता, सोचने की क्षमता भी बढ़ाता है। कोई एनालिस्ट अगर 10 साल का मार्केट डेटा कुछ मिनटों में एआई से समझता है, तो वह और क्रिएटिव हुआ है। एआई को मैं ‘मल्टिप्लिकेटिव माइंड’ कहता हूं यानी एक इंसान की सोच को कई गुना बढ़ाने वाली ताकत। एआई से रिसर्च कम वक्त में हो रही है, सीखना तेज हुआ है और इंसान की क्षमता कई गुना बढ़ गई है। करियर में सबसे बड़ी चाल अब ‘एक्सपोनेंशियल’ होती है, जहां आपकी ताकत आपकी कल्पनाशक्ति है। विशाल घरेलू बाजार, बदलती वैश्विक राजनीति और नई मैन्युफैक्चरिंग नीतियां भारत को अगले दो दशकों का सबसे बड़ा अवसर बनाती हैं। लेकिन इन अवसरों को पकड़ने से अधिक जरूरी है… आपका चरित्र, आपके मूल्य। ईमानदारी, भरोसा और वचन निभाने की आदत। ये बातें कभी पुरानी नहीं होतीं। एआई के शोर और दुनिया की अनिश्चित राजनीति के बीच असली पहचान आपके व्यवहार से बनती है। क्या आप कठिन समय में लोगों के साथ खड़े रहे? यही वो पूंजी है, जो जीवनभर ब्याज देती है। बदलाव हर पल होगा। हालात कभी परफेक्ट नहीं होंगे लेकिन इन्हीं अनिश्चित पलों में आपकी असली ताकत छिपी है। शुरुआत हिम्मत के साथ करें। अपने भरोसे को मजबूत रखें। बड़े सपने देखें, बड़ी उड़ान भरें पर अपने मूल्यों को थामे रखें।

अपने करियर को स्टार्टअप की तरह लें अब हर करियर को एक स्टार्टअप की तरह देखना होगा… हल्का, चुस्त और हमेशा सीखने को तैयार। भविष्य उनका है, जो अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़कर बड़ी तस्वीर देखते हैं। जो डॉट्स कनेक्ट कर पाते हैं। आज के जमाने में पढ़ा-लिखा वह नहीं है जो किताबें पढ़ सके, बल्कि वह है जो सीख सके, पुराना भूलकर नए को अपना सके। (बिट्स पिलानी की 2025 की कन्वोकेशन सेरेमनी में)



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