3 घंटे पहले
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अपनी टीम के साथ खराब व्यवहार की कीमत बहुत भारी हो सकती है, यह न्यूरोसाइंस से भी साबित हुआ है। यदि आप एक हाई-प्रेशर जॉब में हैं और अपने आसपास के लोगों की परफॉर्मेंस से निराश हैं, तो यह मानें कि समस्या का एक हिस्सा आप भी हो सकते हैं। जब आप यह स्वीकार कर लेते हैं, तभी सुधार की शुरुआत होती है।
1) कर्मचारियों की बातों को पूरी जिज्ञासा के साथ सुनना शुरू करें आपकी ‘माइक्रो मैनेजमेंट’ शैली लोगों को ऐसा महसूस करा सकती है कि वे काफी हद तक असफल हो चुके हैं या असफल होने के कगार पर ही हैं। वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों के लिए पहला कदम क्या है? यह है गहराई से सुनना। कर्मचारियों को अपनी ओर से सही संदेश दें। उन्हें यह महसूस होने दें कि उनकी बात सच में सुनी जा रही है।
2) छोटे कदमों से शुरुआत करें, हर दिन एक सरल चेकलिस्ट बनाएं एकदम से बड़े बदलाव लाने की कोशिश न करें। यह ठीक नहीं है। अपने आसपास होने वाले चार व्यवहार चुनें और फिर उन पर धीरे-धीरे काम शुरू करें। हर दिन एक छोटी-सी ऐसी कार्रवाई जरूर करें, जो इन व्यवहारों को बेहतर बनाए। दिन के अंत में एक ‘यस लिस्ट’ भरें। यह एक सरल चेकलिस्ट होगी, जो नई आदतों को मजबूत करती हो।
3) अपने प्रतिक्रिया-स्तर को बेहतर बनाएं लीडर्स की हर प्रतिक्रिया का प्रभाव कई गुना बढ़ता है क्योंकि उनका पद बड़ा होता है। प्रतिक्रिया देते समय एक स्पष्ट परिप्रेक्ष्य दें। उदाहरण, 1 से 10 के पैमाने पर, जहां 10 सबसे महत्वपूर्ण है, इस वेबसाइट के ग्राफिक्स पर मेरी राय ‘3’ है। या ‘मेरी वजह से रिलीज न रोकें।’ यह टीम को बताता है कि किस बात को प्राथमिकता दें।
4) अपनी अपेक्षाओं को स्पष्ट करें, इससे शिकायतें कुछ कम हो जाती हैं जब आपको अपने कर्मचारियों से कुछ ऐसे कार्य करवाने होते हैं, जो उन्हें बिल्कुल भी पसंद न हों, तो उन्हें सबसे पहले तो यह स्पष्ट कर दें कि वे कार्य महत्वपूर्ण क्यों हैं। जब आपका उद्देश्य साफ-सुथरा होता है, तो निश्चित रूप से शिकायतें भी बहुत कम हो जाती हैं और काफी हद तक स्वीकृति बढ़ जाती है। अपेक्षाओं को स्पष्ट करना अच्छा है।
5) काम को हिस्सों में बांट देंगे, तो टीम बेहतर परफॉर्म कर सकती है अपनी टीम को काम के बोझ तले दबा न दें। उनके लिए एक साथ ईमेल, फीडबैक डॉक्यूमेंट और लंबी टु-डु लिस्ट का ढेर न लगा दें। लंबे ईमेल को पांच छोटे ईमेल्स में बांटें और उसके बाद पहले केवल एक ही भेजें। बाकी चार तभी भेजें जब वास्तव में उनकी जरूरत हो। इससे टीम पर दबाव कम होता है और काम का फोकस बेहतर रहता है।








