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आज एक नवंबर है, रविवार है यानी मेरे कॉलम का दिन। और आज ही पूरी दुनिया की, हमारी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे खूबसूरत हीरोइन, बल्कि उससे भी ज्यादा खूबसूरत दिल और रूह की मालकिन ऐश्वर्या राय का जन्मदिन है। तो मुझे ख्याल आया कि पिछले तीन साल से मैं लगातार कॉलम लिख रहा हूं, मगर जिस शख्स पर मुझे सबसे पहले लिखना चाहिए था, उसी पर आज तक नहीं लिखा। इसकी एक वजह यह भी है कि ऐश्वर्या से मेरा बहुत ही करीबी ताल्लुक रहा है। जितनी मोहब्बत से वो मुझे रूमी भाई बुलाती थी और आज भी बुलाती है, वैसे मुझे आज तक किसी ने नहीं बुलाया। मुझे अच्छी तरह याद है कि जब ऐश्वर्या मिस वर्ल्ड बनीं तो पूरे हिंदुस्तान में हर शख्स उनका दीवाना हो गया था। ऐश्वर्या मेरे प्रोड्यूसर वाशु भगनानी जी की बिल्डिंग में रहती थीं। एक दिन वाशु जी का फोन आया कि बिल्डिंग में ऐश्वर्या के स्वागत का कार्यक्रम रखा है, कुछ लिखकर दे दो। मैंने ऐश्वर्या से मिले बिना ही उनके लिए एक खूबसूरत लेख लिखा और कुछ शेर भी लिखकर दिए। उन दिनों फिल्म इंडस्ट्री का कोई डायरेक्टर या प्रोड्यूसर ऐसा नहीं था, जो ऐश्वर्या के घर के चक्कर न लगा रहा हो। हर किसी की ख्वाहिश थी कि वह ऐश्वर्या राय को लॉन्च करे और उनकी पहली फिल्म उसी के साथ हो। लेकिन यह हमारी खुशकिस्मती थी कि ऐश ने अपनी पहली फिल्म हमारी चुनी। मैं फिल्म लिख रहा था, डायरेक्टर राहुल रवैल थे और प्रोड्यूसर सोहेल मकलाई। मैं जिंदगी का वह पल कभी नहीं भूल सकता, जब मैंने पहली बार ऐश को देखा था। राहुल जी ने अपने घर पर डिनर के साथ एक मीटिंग रखी थी और हम सबको बुलाया था, ताकि ऐश्वर्या से अच्छी तरह मुलाकात हो सके। मुझे आज भी वह नजारा याद है। मैं जैसे ही घर में दाखिल हुआ और दरवाजे से हॉल की तरफ नजर पड़ी, तो देखा कि पीले रंग का कुर्ता-पायजामा और दुपट्टा पहने ऐश बैठी हैं। ऐसा लगा जैसे कोई परी जमीन पर उतर आई हो या फिर भारतीय कपड़ों में कोई बार्बी डॉल बैठी हो। उन्हें देखते ही मेरे जेहन में एक ख्याल आया था। बाद में जब मैं ऐश के करीब आया तो मैंने उन्हें वह ख्याल सुनाया। उसके बाद तो जब भी हम शूटिंग के दौरान सेट पर होते या कहीं डिनर पर जाते, मैं वहां मौजूद दूसरे एक्टर्स की तरफ ऐश को दिखाकर अक्सर कहता, ‘यह चेहरा झूठ बोल रहा है। कोई इतना खूबसूरत कैसे हो सकता है!’ यह सुनकर ऐश्वर्या हमेशा शरमा जातीं और जोर से बोलतीं, ‘रूमी भाई!’ उनकी यह झिझक और मुस्कराहट मुझे आज भी याद है। मुझे अच्छी तरह याद है कि मैंने ऐश्वर्या को कुछ गजलों और नज्मों की किताबें दी थीं, ताकि वह उर्दू जुबान से और अच्छी तरह वाकिफ हो सकें। उन किताबों के साथ मैंने अपने बड़े अब्बा की गजल का एक शेर भी लिखकर दिया था : ‘किसकी बाहों में झूलोगी, किसके मन का धीर बनोगी,
जाने कौन है वो शहजादा, जिसकी तुम तकदीर बनोगी,
आंखों में पंजाब का जादू, जुल्फों में गुजरात की रात,
जाने किस अख्तर की सलमा, किस रांझा की हीर बनोगी।’ बाद में पता चला कि उस शेर का वह अख्तर, वह शहजादा भी मेरे परिवार और मेरे दिल के बेहद करीब अभिषेक बच्चन निकले। खैर, धीरे-धीरे ऐश से मुझे बिल्कुल अपनी सगी छोटी बहन जैसी मोहब्बत हो गई। उन्होंने भी मुझे हमेशा एक बड़े भाई जैसी इज्जत और प्यार दिया। यहां तक कि ऐश के मम्मी-पापा यानी अंकल और आंटी का भी मेरे प्रति बड़ा स्नेह रहा। इत्तेफाक से उस दौर में उनकी पहली, दूसरी और तीसरी, लगभग सारी फिल्में मैं ही लिख रहा था। ‘और प्यार हो गया’, ‘आ अब लौट चलें’, ‘अलबेला’ और 2001 में ‘हम किसी से कम नहीं’। भारत में शूटिंग हो या अमेरिका, यूरोप या मलेशिया में, हम ज्यादातर साथ ही रहते थे। साथ घूमते, शूटिंग करते, खूब मजाक-मस्ती करते। वे दिन इतने अच्छे और यादगार हैं कि एक कॉलम में समा ही नहीं सकते। शूटिंग और आउटडोर के दौरान साथ बिताए उन दिनों के सारे किस्से, सारी यादें लिखने बैठूं तो शायद एक पूरी किताब लिखनी पड़े। हां, मगर एक बात जरूर कहना चाहता हूं कि मैंने अपनी जिंदगी में ऐश्वर्या से ज्यादा दिल की साफ, अच्छी, मोहब्बती और खुदा से डरने वाली लड़की आज तक नहीं देखी। आज ऐश्वर्या के जन्मदिन पर उन्हें ढेर सारी मुबारकबाद। उनकी अच्छी सेहत और खुशियों से भरी लंबी जिंदगी की कामना करता हूं। आज कॉलम खत्म करते हुए ऐश्वर्या राय की पहली फिल्म ‘और प्यार हो गया’ का यह खूबसूरत गाना सुनिए, अपना ख्याल रखिए, खुश रहिए : सितारों सी जगमगा रही हैं तुम्हारी आंखें…
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