राजदीप सरदेसाई का कॉलम:  2026 के इस नए साल में हमारा भारत कैसा हो?
टिपण्णी

राजदीप सरदेसाई का कॉलम: 2026 के इस नए साल में हमारा भारत कैसा हो?

Spread the love


  • Hindi News
  • Opinion
  • Rajdeep Sardesai’s Column What Should Our India Be Like In This New Year Of 2026?

4 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
राजदीप सरदेसाई वरिष्ठ पत्रकार - Dainik Bhaskar

राजदीप सरदेसाई वरिष्ठ पत्रकार

‘जहां मन भय से मुक्त हो और मस्तक ऊंचा हो; जहां ज्ञान स्वतंत्र हो; जहां दुनिया संकीर्ण दीवारों से टूटकर टुकड़ों में न बंटी हो… स्वतंत्रता के उस स्वर्ग में, मेरे देश को जाग्रत होने दो।’ (रबींद्रनाथ ठाकुर) ये पंक्तियां लिखे जाने के एक सदी से भी अधिक समय बाद भारत के विचार को नई दृष्टि से देखने का समय आ गया है। लिहाजा, इनसे प्रेरित होकर 2026 के भारत के लिए एक प्रार्थना प्रस्तुत है।

एक ऐसा भारत, जो वर्तमान और भविष्य को रियर-व्यू मिरर से देखकर न तय करे। जहां हमारे सांसद इस पर बहस में घंटों न बिताएं कि 1930 के दशक में वंदे मातरम् से किसने कौन-सा अंतरा हटाया था या 1950 के दशक में नेहरू ने क्या किया था, बल्कि इस पर ध्यान केंद्रित करें कि हमारा वर्तमान नेतृत्व एक बेहतर भारत बनाने के लिए आज क्या कर रहा है।

एक ऐसा भारत, जहां वोट जातिगत और धार्मिक विभाजनों को भड़काकर नहीं, बल्कि शासन से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर मांगे जाएं। जहां इतिहास को ‘व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी’ के पाठ्यक्रम तक सीमित न कर दिया जाए। जहां ध्यान अधिक उपासना-स्थलों के निर्माण पर नहीं, इस पर हो कि कितने गुणवत्तापूर्ण स्कूल और अस्पताल बनाए जा रहे हैं।

एक ऐसा भारत, जहां समुदायों के बीच किसी भी प्रकार के वैमनस्य को केवल शब्दों में ही नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई के माध्यम से भी अस्वीकार किया जाए। जहां कानून का राज हर नागरिक पर समान रूप से लागू हो। जहां नफरत को इस तरह ‘सामान्य’ न कर दिया जाए कि समुदायों का ‘अन्यीकरण’ उनके सामाजिक बहिष्कार का कारण बन जाए।

एक ऐसा भारत, जहां पर्यावरण संरक्षण हर सरकार का मंत्र हो। जहां मुख्यमंत्रीगण एक्यूआई के महत्व को समझें और इसके लिए मिलकर काम करें, ताकि नागरिक स्वच्छ हवा में सांस ले सकें। जहां पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को बेलगाम खनन और रियल एस्टेट माफियाओं द्वारा नष्ट न किया जाए। जहां जलवायु परिवर्तन केवल सेमिनार कक्षों में बहस का विषय न रह जाए, बल्कि जमीनी कार्रवाई में तब्दील हो।

एक ऐसा भारत, जहां वास्तविक आंतरिक पार्टी-लोकतंत्र हो और असहमति को विद्रोह न माना जाए। जहां ईडी को हथियार बनाकर केवल विपक्ष-शासित राज्यों पर न आजमाया जाए। जहां चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का निर्वहन करे। जहां एसआईआर पारदर्शी ढंग से हो और जहां धनबल व संस्थागत-ताकत बराबरी के आदर्श को विकृत न कर दे।

एक ऐसा भारत, जो कश्मीर से केरल तक हर देशवासी को अपनाए। जहां दक्षिण बनाम उत्तर, तमिल बनाम हिंदी जैसे विभाजनों को नकारा जाए। जो ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ को नारे से आगे बढ़ाकर वास्तविकता में उतारे।

जहां मनुष्य की गरिमा का महत्व जीडीपी से कम न माना जाए। जहां गरीबों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक पहुंच मिले और समान अवसर हर सरकार का लक्ष्य बने। जहां यह संभव न हो कि गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाएं, जबकि अमीर और प्रभावशाली लोगों की अवैध बसाहटों का बाल भी बांका न हो।

जहां हर बड़ी परियोजना चुनिंदा कारोबारियों को न सौंप दी जाए, जबकि अनेक मेहनती उद्यमी ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’ की जटिलताओं से जूझते रहें। जहां बड़ी अर्थव्यवस्था बनना तो उत्सव का विषय हो, लेकिन प्रति व्यक्ति नॉमिनल जीडीपी में 130वें पायदान पर होना भी चिंता का कारण बना रहे।

एक ऐसा भारत, जहां छात्र पेपर लीक और परीक्षा में हेरफेर के शिकार न बनें, जहां परीक्षाएं आपराधिक नेटवर्कों के दबाव में आए बिना पूरी सतर्कता और निष्पक्षता के साथ कराई जाएं, जहां कॉलेजों और विशेष पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया योग्यता से संचालित हो, न कि ‘सिफारिश’ से। जहां कौशल विकास और रोजगार के अवसर साथ-साथ आगे बढ़ें।

एक ऐसा भारत, जहां नेताओं-नौकरशाहों के रूप में ऐसे लोग हों, जिनकी ईमानदारी एक मिसाल बन जाए। जहां जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की संपत्तियों की निगरानी हो। जहां किसी व्यक्ति का मूल्य उसके ज्ञान से आंका जाए, न कि उसके बैंक बैलेंस से। और हां, एक ऐसा भारत, जहां मीडिया की भूमिका एक सजग पहरेदार की हो।

जहां सत्ता से असुविधाजनक सवाल पूछना हमारा फर्ज हो। जहां किसी रिपोर्टर का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाए कि वह सच्चाई को उजागर करने का कितना साहस रखता है। स्वतंत्रता के उसी स्वर्ग में, मेरा भारत जाग्रत हो। नववर्ष की शुभकामनाएं!

एक ऐसा भारत, जहां नेताओं और नौकरशाहों की ईमानदारी एक मिसाल बन जाए। जहां किसी व्यक्ति का मूल्य उसके ज्ञान से आंका जाए, उसके बैंक-बैलेंस से नहीं। जहां मीडिया की भूमिका एक सजग पहरेदार की हो।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *