राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला उजागर होने के बीस दिन बाद सवालों से घिरे चंपत राय और अनिल मिश्रा इस्तीफा दे चुके हैं। पहले एफआईआर और फिर उसके कुछ घंटे बाद दोनों का इस्तीफा सवाल खड़े करता है। क्या इस्तीफे को ढाल बनाकर एफआईआर से बचने की कोशिश है? इसके लिए क्या दिल्ली से कोई आदेश-निर्देश मिले थे? क्योंकि आशंका है कि इस्तीफे के जरिए सब कुछ रफादफा करने की जद्दोजहद है।
पहले दिन से चंपत और अनिल पर आरोप लग रहे हैं, लेकिन इस्तीफा नहीं दिया था। जैसे ही एफआईआर हुई, वैसे ही इस्तीफा दे दिया गया था। इसके पीछे कई कयास लगाए जा रहे हैं, खासकर सोशल मीडिया पर। एक चर्चा यह है कि मामले में सरकार संदेश देगी कि जो आपराधिक साजिश में संलिप्त थे, उन पर केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया। वहीं, जिन पर सवाल उठ रहे थे, उन पदाधिकारियों ने खुद ही ट्रस्ट से अपने आपको अलग कर लिया, जिससे मामला शांत हो जाए। उसी दिशा में पूरा मामला जाता दिखाई दे रहा है।
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नृपेंद्र मिश्र ने खोल दी थी पोल
चोरी का मामला खुलने के बाद चंपत राय ने आठ जून को एक वीडियो बयान जारी किया था, जिसमें कहा था कि कोई गड़बड़ी नहीं मिली है, सब कुछ ठीक है। सामान्य ऑडिट प्रक्रिया हर बार की तरह चल रही है। लेकिन कुछ ही दिन बाद राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने उनकी पोल खोल दी थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि चोरी नहीं, बल्कि डाका पड़ा था। यहीं से चंपत राय पर और सवाल उठने लगे थे। शंका गहरा गई थी। अब इस्तीफा देकर प्रकरण से साइड होने की फिराक में हैं, जिससे एफआईआर व अन्य कार्रवाई से बचा जा सके।
नहीं आया कोई बयान
चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर मामला गर्माया हुआ है। हालांकि, मामले में अब तक इन दोनों का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं, ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों ने भी इस बारे में कुछ नहीं कहा है। केवल निर्माण सहायक गोपाल राव ही सवाल का जवाब देते नजर आए, जिन्होंने इस्तीफे की बात से इनकार किया है।








