वैशाख मास में जल दान करने की परंपरा:  1 मई तक रहेगा वैशाख, 13 और 27 अप्रैल को किया जाएगा एकादशी व्रत, 19 तारीख को भगवान परशुराम का प्रकट उत्सव
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वैशाख मास में जल दान करने की परंपरा: 1 मई तक रहेगा वैशाख, 13 और 27 अप्रैल को किया जाएगा एकादशी व्रत, 19 तारीख को भगवान परशुराम का प्रकट उत्सव

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हरिद्वार9 घंटे पहले

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अभी वैशाख मास चल रहा है, यह हिन्दी पंचांग का दूसरा महीना है। इसे माधव मास भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी महीने से त्रेता युग शुरू हुआ था। इस महीने के संबंध में शास्त्रों में कहा गया है कि जिस प्रकार विद्याओं में वेद और वृक्षों में कल्पवृक्ष श्रेष्ठ है, उसी प्रकार सभी महीनों में वैशाख मास सर्वोत्तम है। इस महीने में भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है और जल दान करने की परंपरा है। जानिए इस महीने के खास तीज-त्योहार

  • वरुथिनी एकादशी (13 अप्रैल): वैशाख कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का व्रत रखने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। भक्त के पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन अन्न दान खासतौर पर करना चाहिए।
  • मेष संक्रांति (14 अप्रैल): इस दिन सूर्य ग्रह मीन से मेष राशि में प्रवेश करेगा। इस संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य पूजा करने की परंपरा है।
  • वैशाख अमावस्या (17 अप्रैल): इस दिन पितर देव के लिए विशेष धूप-ध्यान करना चाहिए। अमावस्या पर नदी स्नान और दान-पुण्य भी करना चाहिए।
  • अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती (19 अप्रैल): यह इस महीने का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। इसे ‘अबूझ मुहूर्त’ भी कहा जाता है यानी इस दिन बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। अक्षय तृतीया पर बिना मुहूर्त देखे विवाह किया जा सकता है। इसी तिथि पर भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी अवतरित हुए थे।
  • गंगा सप्तमी (23 अप्रैल): मान्यता है कि इस तिथि पर मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में पधारी थीं। इस दिन गंगा पूजन किया जाता है।
  • सीता नवमी (25 अप्रैल): वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी को माता सीता का प्राकट्य हुआ था। इस दिन महिलाएं भगवान राम और माता सीता की विशेष पूजा करनी चाहिए।
  • मोहिनी एकादशी (27 अप्रैल): समुद्र मंथन के समय जब असुरों ने अमृत छीन लिया था, तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण करके देवताओं की रक्षा की थी और देवताओं को अमृत पान कराया था। यह व्रत मोह-माया के बंधनों से मुक्ति दिलाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।।
  • नृसिंह जयंती (30 अप्रैल): वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
  • वैशाख पूर्णिमा / बुद्ध पूर्णिमा (1 मई): यह वैशाख मास का अंतिम दिन है। इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। पूर्णिमा पर दान-पुण्य और सत्यनारायण कथा का विशेष महत्व है।

वैशाख मास में कौन-कौन से शुभ काम करें

  • चूंकि वैशाख का महीना ग्रीष्म ऋतु का समय होता है, इसलिए इस महीने में ठंडक प्रदान करने वाली वस्तुओं के दान पर जोर दिया गया है। राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना, मिट्टी के घड़े का दान करना, पंखा, छाता और सत्तू का दान इस महीने में अक्षय पुण्य देता है। जल की रक्षा करना और पौधों को पानी देना इस समय की सबसे बड़ी पूजा मानी गई है।
  • इस महीने में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने की परंपरा है। तुलसी के पौधे में नियमित जल देना और शाम को दीपदान करना घर में सुख-समृद्धि लाता है। भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा करें।
  • भोजन के मामले में इस महीने तेल-मसाले वाली चीजों का प्रयोग कम करना चाहिए। सात्विक आहार लेना सेहत के लिहाज से उत्तम है।
  • यदि आप गृह प्रवेश, व्यापार की शुरुआत या विवाह जैसे कार्यों की योजना बना रहे हैं, तो 19 अप्रैल (अक्षय तृतीया) का दिन सबसे श्रेष्ठ है।
  • सूर्योदय से पूर्व स्नान (खासकर पवित्र नदियों में) करना बहुत शुभ माना गया है।

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