शनि जयंती और ज्येष्ठ अमावस्या आज:  शनि देव को तेल क्यों चढ़ाते हैं, हनुमान जी से जुड़ी है इस परंपरा की कथा
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शनि जयंती और ज्येष्ठ अमावस्या आज: शनि देव को तेल क्यों चढ़ाते हैं, हनुमान जी से जुड़ी है इस परंपरा की कथा

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10 घंटे पहले

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आज (16 मई) शनि जयंती और ज्येष्ठ अमावस्या हैं। आज शनि देव की विशेष पूजा की जाएगी। खासतौर पर शनि को तेल चढ़ाने की परंपरा है। इस परंपरा के पीछे हनुमान जी से जुड़ी मान्यता है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, शनि को तेल चढ़ाने से कुंडली के शनि दोष शांत होते हैं। कहा जाता है कि तेल चढ़ाने और इसका दान करने से शनि की साढ़ेसाती और ढय्या के अशुभ फलों में भी कमी आती है। जानिए शनिदेव को तेल इतना प्रिय क्यों है?

शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है?

मान्यता है कि शनिदेव को तेल चढ़ाने से उनके कष्ट दूर होते हैं और वे प्रसन्न होकर भक्त को आशीर्वाद देते हैं। तेल विशेष रूप से सरसों का होता है, जिसे दान करना बहुत शुभ माना जाता है। इस परंपरा के संबंध में प्रचलित पौराणिक कथा के मुताबिक, एक बार रावण ने सभी ग्रहों को बंदी बना लिया था। उसने शनिदेव को भी बंदीगृह में उल्टा लटका दिया था। इस कारण शनिदेव को बहुत पीड़ा हो रही थी।

उस समय हनुमान जी, देवी सीता की खोज करने लंका पहुंचे हुए थे। वहां उन्होंने पूरी लंका को जला दिया था, इस घटना के बाद सभी नौ ग्रह रावण की कैद से मुक्त हो गए।

जब हनुमान जी ने शनि देव को देखा तो वे अत्यंत पीड़ा में थे, क्योंकि वे उल्टा लटके हुए थे। हनुमान जी ने उन्हें नीचे उतारा और उनके घावों पर सरसों का तेल लगाया। इससे शनिदेव को बहुत आराम मिला और उनकी पीड़ा दूर हो गई। इसके बाद शनि देव ने कहा कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से मुझे तेल चढ़ाएगा, उसके कष्ट कम होंगे और उसे शांति मिलेगी।

दूसरी कथा: हनुमान जी और शनि देव के बीच हुआ युद्ध

एक अन्य कथा के अनुसार एक बार शनि देव को अपनी शक्ति पर बहुत घमंड हो गया था। उन्होंने सोचा कि वे किसी को भी पराजित कर सकते हैं। इसी अहंकार में वे भगवान हनुमान जी के पास पहुंच गए और उन्हें युद्ध के लिए ललकारने लगे।

हनुमान जी उस समय भगवान श्रीराम का ध्यान कर रहे थे। उन्होंने शनि देव को समझाने और युद्ध टालने की बहुत कोशिश की, लेकिन अहंकार की वजह से शनि देव नहीं माने।

इसके बाद दोनों के बीच युद्ध हुआ। युद्ध में शनि देव बुरी तरह घायल हो गए और उन्हें अत्यधिक पीड़ा होने लगी। तब हनुमान जी ने दया दिखाते हुए उनके घावों पर तेल लगाया। तेल लगते ही शनि देव को बहुत आराम मिला और उनका दर्द समाप्त हो गया।

इसके बाद शनि देव ने हनुमान जी से कहा कि अब से जो भी व्यक्ति सच्चे मन से मुझे तेल चढ़ाएगा, उसके जीवन के कष्ट दूर हो जाएंगे।

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