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बचपन में मां-बाप का प्यार सबके लिए एक जैसा नहीं होता। वॉशिंगटन की नीरा कहती हैं कि मेरी मां ने मुझे तमाम सुख-सुविधाओं के बीच पाला। अच्छे स्कूल, सुंदर कपड़े, विदेश यात्राएं, म्यूजिक क्लास व हर जरूरत पूरी की, पर भावनात्मक सहारा देने के लिए कभी नरम व्यवहार नहीं अपनाया। मां मानती थीं कि बच्चों को प्यार से नहीं, सख्ती से पालना चाहिए ताकि वे ‘मजबूत’ बनें। आज जब मैं अपनी बेटी को उसी प्यार और नरमी के साथ सफल होते देखती हूं, तो मां का वो पुराना भ्रम टूट जाता है। हाल ही में जब मैं अपनी बेटी के साथ शॉपिंग पर गई और हम दोनों ने खूब हंसी-मजाक किया, तो यह जानने के बाद मेरी मां खुद को कोसने लगती हैं कि उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया। शुरुआत से बच्चों से दूरी हमेशा के लिए लगाव छीन लेती है नीरा कहती हैं कि मेरी मां अब अक्सर उन छोटी-छोटी खुशियों के लिए माफी मांगती हैं, जो हमने कभी साथ नहीं बिताईं। वे खुद को कोसती हैं कि उन्होंने कोमलता दिखाने को ‘कमजोरी’ क्यों समझा। उन्हें अब अहसास होता है कि गले लगाने या प्यार जताने से बच्चे बिगड़ते नहीं, बल्कि और ज्यादा भरोसेमंद बनते हैं। उन्हें लगता है कि जिस कड़े अनुशासन की खातिर उन्होंने हमारा रिश्ता कमजोर किया। बच्चों को सख्ती नहीं प्यार से भी मजबूत बना सकते हैं नीरा की मां अब ज्यादा सहज और प्यार भरा होना चाहती हैं, लेकिन अब नीरा के लिए ये संभव नहीं है। एक उम्र के बाद इंसान गलतियों का बोझ हल्का करना चाहता है, लेकिन पीड़ित हर बार उसे उठाने के लिए तैयार नहीं होता। बचपन के वो खाली दिन अब वापस नहीं आ सकते। नीरा कहती हैं कि काश वे उस वक्त इतनी कठोर न होतीं और मुझे कभी दोस्त की तरह गले लगाया होता। मैं उन्हें समझाती हूं कि बिना अति सख्त व्यवहार के भी बच्चा मां-बाप के भावनात्मक सहारे के दम पर दुनिया जीत सकता है। नीरा की बेटी स्कूली दिनों में जब संवेदनशील थी तब उन्होंने नरमी के साथ उसे हर वक्त संभाला। अब नीरा की मां अपनी गलतियों को याद कर खुद को परेशान करती हैं, जो आपसी जुड़ाव के लिए सही नही है। अनुशासन के नाम पर दूरी हमेशा के लिए लगाव से दूर रखती है – एक्सपर्ट के मुताबिक जो प्यार और सुरक्षा का अहसास बच्चे को बचपन में चाहिए था, उसे बुढ़ापे में शब्दों में सुनाने से पूरा नहीं किया जा सकता। इससे पुराने जख्म और हरे हो जाते हैं। यह कड़वी सच्चाई है कि माता-पिता का देर से जागा हुआ पछतावा बच्चों के लिए नया मानसिक बोझ बन जाता है। – यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर आप धैर्य और नरम स्वभाव से बच्चे की मदद करते हैं, तो इससे परिवार का जुड़ाव लंबा और मजबूत रहता है।
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