9 घंटे पहलेलेखक: संदीप सिंह
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हाल ही में मुंबई में ‘क्रेडिट कार्ड से कैश दिलाने’ के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले में यूट्यूबर और भोजपुरी एक्टर दिलीप कुमार साहू पर 3.5 लाख रुपए की ठगी का आरोप लगा है। इस साइबर फ्रॉड की शुरुआत एक सड़क किनारे लगे पोस्टर से हुई, जिस पर लिखा था ‘क्रेडिट कार्ड से कैश पाइए, सिर्फ 2.5% कमीशन पर’।
एक आम व्यक्ति ने पोस्टर पर लिखे नंबर को सेव किया और कुछ दिनों बाद जरूरत पड़ने पर संपर्क किया। पहली बार आरोपी ने भरोसा जीतने के लिए पीड़ित से क्रेडिट कार्ड डिटेल्स और ओटीपी मांगी और 20 हजार रुपए के ट्रांजैक्शन के बाद 500 रुपए काटकर 19,500 रुपए वापस भेजे। इससे पीड़ित को यह सब असली और भरोसेमंद लगा।
इसके बाद पीड़ित ने 3.5 लाख रुपए नकद के लिए दो और क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स और ओटीपी शेयर किए। लेकिन इस बार उसके अकाउंट्स से कई ट्रांजैक्शन कर 3,50,020 रुपए डेबिट कर लिए गए और बदले में एक रुपया भी वापस नहीं आया। इस तरह स्कैमर ने ठगी को अंजाम दिया।
तो चलिए, आज साइबर लिटरेसी कॉलम में हम क्रेडिट कार्ड से होने वाले स्कैम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- स्कैमर कैसे क्रेडिट कार्ड से फ्रॉड कर सकते हैं?
- इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

सवाल- ‘क्रेडिट कार्ड स्कैम’ क्या होता है?
जवाब- क्रेडिट कार्ड स्कैम एक तरह की साइबर ठगी है, जिसमें स्कैमर धोखे या चालाकी से आपकी कार्ड डिटेल्स जैसे कार्ड नंबर, CVV, एक्सपायरी डेट, ओटीपी या पिन जैसी सेंसिटिव जानकारी हासिल कर लेते हैं। इन जानकारियों का इस्तेमाल करके वे आपके अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं या ऑनलाइन खरीदारी कर लेते हैं।
अक्सर पीड़ित को इसका पता तब लगता है, जब अकाउंट से रकम कट जाती है या क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखाई देने लगते हैं।
सवाल- क्रेडिट कार्ड स्कैम को कैसे अंजाम दिया जाता है?
जवाब- ये आमतौर पर धोखे और चालाकी से किया जाता है, जहां ठग फेक कॉल, ईमेल या मैसेज के जरिए आपकी कार्ड डिटेल्स, ओटीपी या पिन हासिल कर लेते हैं। कई बार वे बैंक प्रतिनिधि या भरोसेमंद कंपनी बनकर बात करते हैं और नकली ऑफर या कैश का लालच देकर जानकारी ले लेते हैं। एक बार ये डिटेल्स मिल जाने पर स्कैमर कार्ड से ट्रांजैक्शन कर पैसे निकाल लेते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्रेडिट कार्ड फ्रॉड से बचने के क्या तरीके हैं?
जवाब- इसके लिए सतर्कता और सही जानकारी सबसे जरूरी है। क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते वक्त थोड़ी सी सावधानी आपको फ्रॉड से बचा सकती है। जैसेकि-
कार्ड की जानकारी किसी से भी न शेयर करें
अपना पिन, पासवर्ड या ओटीपी किसी को न बताएं। चाहे वो दोस्त हो, रिश्तेदार या कोई फोन पर बात कर रहा हो।
इनाम या लॉटरी वाले झांसे में न आएं
अगर कोई ईमेल या मैसेज भेजकर कहे कि ‘आपने लॉटरी जीती है या आपको पैसा मिलने वाला है, लेकिन पहले कुछ टैक्स या फीस जमा करनी है’ तो ये फ्रॉड है। ऐसे लोगों को कभी पैसा न दें।
भुगतान करने से पहले सोचें
कभी-कभी ऑफर के नाम पर जल्दी में पेमेंट करवाया जाता है। इसलिए कोई भी पेमेंट करने से पहले जांचें कि वेबसाइट असली है या नहीं और प्रोडक्ट वाकई काम का है या नहीं।
फिशिंग और वायरस से सावधान रहें
ईमेल या मैसेज के जरिए लोग नकली वेबसाइट या लिंक भेजते हैं, जो असली की तरह दिखती है। इस पर क्लिक करके अपनी जानकारी न भरें। असली बैंक कभी कॉल या ईमेल से आपकी पर्सनल डिटेल्स नहीं मांगते हैं।
कार्ड को कभी नजर से ओझल न होने दें
अगर आप रेस्टोरेंट या पेट्रोल पंप पर कार्ड दे रहे हैं तो ध्यान रखें कि वह आपके सामने ही स्वाइप हो। अगर मशीन अजीब लगे तो सतर्क हो जाएं।
एक कार्ड ऑटोपे के लिए रखें, दूसरा रोजमर्रा के लिए
ऑनलाइन बिल या सब्सक्रिप्शन के लिए एक अलग कार्ड रखें और रोज के खर्च के लिए दूसरा। इससे एक कार्ड चोरी हो जाए तो दूसरा सुरक्षित रहेगा।
मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करें
मोबाइल वॉलेट जैसे गूगल पे, फोनपे या पेटीएम ज्यादा सुरक्षित होते हैं क्योंकि इनमें फिंगरप्रिंट या पासवर्ड से सुरक्षा रहती है और कार्ड डिटेल शेयर नहीं होती है।
ट्रांजैक्शन की लिमिट सेट करें
अपने कार्ड की लिमिट (जैसे ATM, ऑनलाइन या दुकानों की खरीदारी) कम करके रखें। इससे ज्यादा रकम अपने आप खर्च नहीं हो पाएगी।
इसके अलावा कुछ और बातों का भी ध्यान रखें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- कौन-कौन सी डिटेल्स कभी भी किसी के साथ नहीं शेयर करनी चाहिए?
जवाब- कुछ फाइनेंशियल जानकारियां ऐसी होती हैं, जिन्हें कभी भी किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहिए। चाहे सामने वाला खुद को बैंक का अधिकारी, कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव या कोई जान-पहचान वाला ही क्यों न बताए। ये जानकारियां केवल आपके लिए होती हैं। इनके लीक होने से आपका पूरा बैंक खाता या कार्ड खाली हो सकता है।

सवाल- क्रेडिट कार्ड डिटेल्स को हाइड करके रखना क्यों जरूरी है?
जवाब- साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट राहुल मिश्रा बताते हैं कि किसी भी व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड का एक्सपायरी डेट, कार्ड और CVV नंबर पता है तो वह किसी इंटरनेशनल गेटवे का इस्तेमाल करके ऑनलाइन शॉपिंग कर सकता है। इसलिए कार्ड की इन डिटेल्स को हाइड करना जरूरी है।
कई बार मॉल, पेट्रोल पंप जैसी जगहों पर CCTV के जरिए क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स चोरी होने का डर रहता है। इससे बचने का एक अच्छा तरीका ये है कि CVV नंबर को हाइड कर दें या उसे किसी परमानेंट मार्कर से ब्लैक कर दें।
सवाल- क्या बैंक फोन करके कार्ड ब्लॉक या वेरिफिकेशन की बात करते हैं?
जवाब- नहीं, बैंक कभी फोन करके आपके कार्ड को बंद करने की धमकी नहीं देते और न ही वेरिफिकेशन के नाम पर कार्ड या OTP मांगते हैं। ऐसा करने वाले 100% ठग होते हैं। कोई कॉल आए तो तुरंत फोन काटें और बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट से नंबर लेकर पुष्टि करें।
सवाल- क्या इंटरनेशनल वेबसाइट पर कार्ड यूज करना सुरक्षित है?
जवाब- अगर वेबसाइट भरोसेमंद और सिक्योर (https:// के साथ) है तो हां, लेकिन फर्जी साइट्स पर ट्रांजैक्शन से बचें। इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन के लिए कार्ड की लिमिट सीमित रखें और बैंक अलर्ट ऑन रखें।
सवाल- क्या कार्ड इस्तेमाल करने के बाद ट्रांजैक्शन हिस्ट्री चेक करना जरूरी है?
जवाब- साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट राहुल मिश्रा बताते हैं कि हां, हर क्रेडिट कार्ड यूजर को महीने में एक बार अपने स्टेटमेंट की जांच जरूर करनी चाहिए। इससे अगर कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन हुआ है तो जल्दी पकड़ में आ जाता है।
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