4 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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देश के कई राज्यों में हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को बड़े उत्साह के साथ छठ पर्व मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठ माता की आराधना का प्रतीक है। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में महिलाएं 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखती हैं और बिना अन्न-जल ग्रहण किए सूर्य देव को दो बार अर्घ्य अर्पित करती हैं।
ये व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि शरीर को डिटॉक्स करने की एक नेचुरल प्रक्रिया भी है। लंबे समय तक व्रत रखने के दौरान शरीर में ‘ऑटोफेजी’ (Autophagy) नामक बायोलॉजिकल प्रोसेस शुरू हो जाती है। इसमें जब शरीर को बाहरी भोजन से पर्याप्त एनर्जी नहीं मिलती तो वह अपनी कमजोर और डैमेज कोशिकाओं को तोड़कर उनसे एनर्जी जुटाता है। इससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और शरीर अधिक सक्षम बनता है।
इसी प्रक्रिया के वैज्ञानिक आधार को समझाने के लिए साल 2016 में जापान के वैज्ञानिक योशिनोरी ओसुमी को फिजियोलॉजी और मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।
तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम छठ व्रत के हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- व्रत कैसे शरीर को डिटॉक्स करने मदद करता है?
- अच्छी सेहत के लिए उपवास क्यों जरूरी है?
एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, न्यूट्रिशनिस्ट और ‘वनडाइटटुडे’ की फाउंडर
सवाल- लंबे समय तक उपवास रखने के क्या फायदे हैं?
जवाब- छठ का पर्व चार दिनों तक चलता है। इसमें व्रती महिलाएं लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं। इस दौरान शरीर एनर्जी के लिए चर्बी और ग्लूकोज स्टोर का इस्तेमाल करता है, जिससे ऑर्गन्स की कार्यक्षमता बढ़ती है। उपवास मेटाबॉलिज्म और इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है। यही कारण है कि छठ जैसे पारंपरिक व्रत केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद हैं। नीचे ग्राफिक से छठ व्रत के हेल्थ बेनिफिट्स समझिए-

सवाल- व्रत शरीर को डिटॉक्स करने में कैसे मदद करता है?
जवाब- व्रत के दौरान शरीर को पाचन की निरंतर प्रक्रिया से आराम और रिफ्रेश होने का मौका मिलता है। इस समय शरीर अपने भीतर जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है, जिससे बॉडी नेचुरली डिटॉक्स होती है और शरीर हल्का व एनर्जेटिक महसूस करता है। नीचे दिए ग्राफिक से इसके हेल्थ बेनिफिट्स समझिए-

सवाल- छठ व्रत के चारों दिनों की प्रक्रिया क्या होती है?
जवाब- छठ व्रत चार दिनों तक चलने वाला अनुशासन और आत्मसंयम का पर्व है, जिसमें हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है।
नहाय-खाय (पहला दिन): इस दिन व्रती महिलाएं घर की साफ-सफाई करके स्नान करती हैं और शुद्ध शाकाहारी भोजन (अक्सर कद्दू-भात और चने की दाल) ग्रहण करती हैं। इसी से व्रत की शुरुआत होती है।
खरना (दूसरा दिन): व्रती पूरा दिन निर्जला उपवास रखती हैं और शाम को गंगा जल या साफ पानी से स्नान कर खीर (गुड़ और चावल से बनी) और रोटी का प्रसाद बनाकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद यही प्रसाद ग्रहण किया जाता है। अब 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं और शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। घाटों पर दीप जलाए जाते हैं और परिवारजन भी पूजा में शामिल होते हैं।
उषा अर्घ्य (चौथा दिन): अंतिम दिन व्रती सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इसके बाद ही व्रत का पारण यानी उपवास तोड़ना होता है।
सवाल- छठ व्रत में कौन-कौन से पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं और उनके क्या हेल्थ बेनिफिट्स होते हैं?
जवाब- छठ पूजा के प्रसाद में गेहूं के आटे और गुड़ से बना ठेकुआ और चावल के आटे से तैयार लड्डू अर्पित किए जाते हैं। ठेकुआ कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है। यह व्रत के बाद शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज की समस्या को कम करता है।
वहीं चावल के लड्डू फाइबर से भरपूर होते हैं, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में मदद करते हैं। चावल का सेवन शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ पाचन क्रिया को भी सुधारता है। गुड़ में मौजूद आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ाता है और एनीमिया की परेशानी को दूर करता है।

सवाल- क्या व्रत से वेट लॉस में मदद मिलती है?
जवाब- न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि हां, व्रत के दौरान कैलोरी इनटेक सीमित होता है और बॉडी ऑटोफेजी प्रोसेस शुरू करती है। इससे फैट बर्न होता है और शरीर से एक्ट्रा वजन कम करने में मदद मिलती है। साथ ही रेगुलर व्रत मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और हेल्दी वेट मैनेजमेंट को सपोर्ट करता है।
सवाल- हार्ट हेल्थ के लिए व्रत कितना फायदेमंद है?
जवाब- व्रत के दौरान शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स लेवल कंट्रोल रहता है, जिससे हार्ट पर दबाव कम होता है। इसके अलावा, सीमित और नेचुरल डाइट ब्लड प्रेशर को संतुलित रखती है और हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाती है।
सवाल- क्या डायबिटिक लोगों को छठ व्रत रखना चाहिए?
जवाब- डायबिटिक लोगों को व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने या निर्जला उपवास से उनके ब्लड शुगर लेवल में अचानक गिरावट या बढ़ोतरी हो सकती है। अगर डॉक्टर कहें तो फल, नारियल पानी और पर्याप्त हाइड्रेशन के साथ सीमित उपवास रखा जा सकता है।
सवाल- किन लोगों को छठ व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए?
जवाब- जिन लोगों को डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम, ब्लड प्रेशर, किडनी या पाचन संबंधी गंभीर समस्याएं हैं, उन्हें छठ व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। इसके अलावा, प्रेग्नेंट या बुजुर्ग लोग भी उपवास से पहले मेडिकल गाइडेंस लें।
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