सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन में भगवान महाकाल की सवारी निकाली गई।
मध्यप्रदेश में सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन के लिए 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे। तड़के 2.30 बजे महाकालेश्वर मंदिर के कपाट खोले गए थे। शाम 4 बजे महाकाल की सवारी निकाली गई। शिप्रा नदी के घाट में पूजन के बाद सवारी मंदिर लौट
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इधर, प्रदेश में खंडवा के ओंकारेश्वर में सुबह 5 बजे मंगला आरती हुई। ओंकार महाराज का फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। नैवेद्य में 56 भोग अर्पित किए गए। मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर, रायसेन के भोजपुर मंदिर में भी रात तक श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़े।
तस्वीरों में देखिए महाकाल की सवारी

भगवान महाकाल की सवारी में डमरू बजाते हुए मंडली।

महाकाल की सवारी में एक मंडली में शामिल सभी महिलाओं ने हरे रंग की साड़ी पहनी।

सवारी में शामिल भजन मंडली भजन गाते हुए आगे बढ़ रही।

सीधी मध्यप्रदेश से आया दल सवारी में घसिया बाजा बजाते हुए शामिल हुआ।
भगवान के अभिषेक से जुड़ी तस्वीरें

बाबा महाकाल का भस्म चढ़ाने के बाद श्रृंगार किया गया।

भगवान ओंकार का नर्मदा जल से अभिषेक हुआ।

कुंड में दर्शन के बाद जटाशंकर को बेल पत्र चढ़ाए गए।

अचलेश्वर महादेव का दूध से अभिषेक कर मंगल कामना की गई।

भगवान पशुपतिनाथ के अभिषेक के लिए भक्त कांवड़ में नर्मदा जल लेकर पहुंचे।

बड़वाले महादेव का जलाभिषेक और पूजन-अर्चन किया गया।

भोजेश्वर मंदिर में श्रद्धालु परिवार समेत दर्शन करने पहुंचे।

अष्टमुखी पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे।

खजुराहो के मतंगेश्वर मंदिर में 18 फीट ऊंचे शिवलिंग का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है।

रायसेन के सोमेश्वर धाम के पट बंद होने पर भक्तों ने पाइप से शिवलिंग का अभिषेक किया।

नर्मदापुरम में सेठानी घाट से नर्मदा जल लेकर कांवड़िए पचमढ़ी के जटाशंकर महादेव मंदिर निकले।

उज्जैन में महाकाल मंदिर का ड्रोन व्यू। यहां 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे।
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