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इंडियन सेलिब्रिटी शेफ संजीव कपूर ने बताया कि जब बनारस के एक होटल में उनकी पहली नौकरी लगी थी, तब वहां के डीएम और एसएसपी की पत्नियों को खाना बनाना सिखाया। कपूर ने बताया कि डीएम और एसएसपी अपनी पत्नियों के साथ होटल में खाना खाने आए थे। उनकी पत्नियों ने खाना सिखाने की गुजारिश की। तब मैंने जीवन में पहली बार किसी को खाना बनाना सिखाया था। तभी लगा कि आगे भी लोगों को ट्रेनिंग देनी चाहिए। वहीं से करियर ने नया मोड़ लिया और आज वे दुनिया भर में मशहूर हैं। दरअसल, संजीव कपूर एक निजी कार्यक्रम को लेकर मंगलवार को उदयपुर आए थे, इस दौरान भास्कर ने उनसे बातचीत की। उन्होंने खाने के बदलते ट्रेंड्स और हेल्दी फूड पर अपने अनुभव साझा किए। सवाल: आपका उदयपुर कैसे आना हुआ? संजीव कपूर: पिछले कुछ सालों में उदयपुर में डेस्टिनेशन वेडिंग का ट्रेंड काफी बढ़ा है। हमें पता चलता रहता है कि कभी इसकी शादी है, उसकी शादी है। सारी बड़ी शादियां उदयपुर में हो रही हैं। इस समय भी एक शादी हो रही है, लेकिन मैं यहां आराम करने आया हूं। उदयपुर में वर्ल्ड क्लास होटल्स हैं, लोग भी बहुत अच्छे हैं। हर कोई यहां आने का बहाना ढूंढ़ता है। मेरा मानना है कि लोगों को विदेश घूमने से बेहतर इंडिया घूमना चाहिए। भारत का टूरिज्म हर स्तर पर बढ़ना चाहिए। दुनिया भर से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या कम हो गई है, लेकिन घरेलू टूरिज्म बढ़ा है। सवाल: आपने एक शेफ के तौर पर अपनी पहचान बनाई, फिर टीवी, किताबों और उद्योग की दुनिया में कदम रखा। इस सफर के पीछे क्या प्रेरणा रही? संजीव कपूर: खाना ऐसा फील्ड है जो मेरा बिजनेस है। जिसे मैं और आगे बढ़ाउंगा। जब मैंने होटल में शेफ के तौर पर काम शुरू किया, तो सीढ़ियां चढ़ता गया और धीरे-धीरे टॉप पर पहुंच गया। 28 साल की उम्र में मुझे बेस्ट एग्जीक्यूटिव शेफ ऑफ द कंट्री का अवॉर्ड मिला। समय के साथ कुछ न कुछ नया होता गया, पहले टीवी, फिर इंटरनेट, किताबें, प्रोडक्ट्स और रेस्टोरेंट। जीवन में आप कुछ भी करें, तो उसे अच्छे से करने की कोशिश करें। मैंने भी वही किया। सवाल: बीते कुछ सालों में इंडियन फूड का ट्रेंड बदला है। जेन जी की नई-नई पसंद है। हमारा किचन भी बदला है। इसको आप किस तरह से देखते हैं? संजीव कपूर: समय के साथ बदलाव जरूरी है और होगा भी, चाहे हम कितना भी विरोध करें। चेंज हमेशा होता है। लोग कितना भी कहें कि ये सही है या गलत, लेकिन हमें जजमेंटल नहीं होना चाहिए। ढाई अरब साल पहले डार्विन थ्योरी की बात करें, तो आज हम इंसान हैं, पहले बंदर थे। समय के साथ बदलाव आएगा। जिस समय में आप हैं, वही सबसे अच्छा समय है। सवाल: आपने बनारस में एक होटल से अपना कॅरियर शुरू किया। जहां से आप अपने खाना खजाना और ट्रेनिंग देने, सिखाने की शुरुआत कैसे मानते हैं? संजीव कपूर: जब बनारस में मेरी पहली जॉब लगी, तब गर्मियों में होटल की ऑक्यूपेंसी कम होती थी। हमारे होटल में उस वक्त के डीएम और एसएसपी अपनी पत्नियों के साथ खाना खाने आए थे। पत्नियों ने कहा कि हमारी नई शादी हुई है, हमें खाना बनाना नहीं आता। आप सिखा सकते हैं? मैंने सोचा होटल खाली है, तो कोई दिक्कत नहीं। वहां पहली बार किसी को खाना बनाना सिखाया। तभी सिखाने की ललक जागी। फिर धीरे-धीरे ट्रेनिंग देते हुए खाना खजाना का सफर शुरू हुआ। लोगों को खाना बनाना सिखाने की शुरुआत वहीं से हुई। बीज वहीं से पड़ा। सवाल: आपके अनुभव के अनुसार आज के दौर में एक सफल शेफ बनने के लिए कौन सी तीन बातें सबसे जरूरी है? संजीव कपूर: किसी भी फील्ड की स्किल सीखनी पड़ती हैं। चाहे म्यूजिक हो, क्रिकेट हो या कोई और। उसमें नियमित रियाज या ट्रेनिंग जरूरी है। दूसरा, उस फील्ड की गहरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि और बेहतर कर सकें। तीसरा, सबसे जरूरी वैल्यू सिस्टम, जो घर में माता-पिता, स्कूल में टीचर या दोस्त सिखाते हैं: हार्ड वर्क करो, ईमानदारी से काम करो। ये तीन चीजें अगर करें, तो दुनिया का बेस्ट बनने से कोई नहीं रोक सकता। सवाल: पीएम मोदी भी ज्यादा ऑयल का सेवन नहीं करने का आह्वान कर चुके। आज की लाइफस्टाइल में कम तेल और मसालों के कैसे हेल्दी खाना बनाया जा सकता है? संजीव कपूर: हम नमक और चीनी बहुत ज्यादा खाते हैं। मसालों के साथ तेल भी कम करना चाहिए। घर का खाना सब्जी में ज्यादा तेल डालने से स्वादिष्ट नहीं बनता। गोल गप्पे के पानी में तेल कहां है, लेकिन स्वाद आता है। कभी-कभी ये चीजें ठीक हैं, लेकिन हमेशा कचौड़ी-समौसा या फ्रेंच फ्राइज खाना गलत है। अति कभी न करें। जंक फूड खाना है तो घर में बनाकर खाएं, बाजार से बेहतर होगा। घर में कम तेल में खाना बनाएं। आजकल ऐसे बर्तन हैं जिनमें तेल की जरूरत ही नहीं। सवाल: कई तरह की नई-नई डिशेज मार्केट में आती है जो लोगों को पसंद भी आती है। इनके डिजाइन और क्रिएशन के पीछे क्या विशेष होमवर्क होता है? संजीव कपूर: खाने में क्रिएटिविटी से पहले आप उसे विजुअलाइज करते हैं। आंख बंद करके सोचते हैं कि कैसा होगा। खाने में सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि दिखता कैसे है, खुशबू कैसी है, आवाज में क्रंची है या नहीं, सारे सेंस काम करते हैं। मैं एक शाम होटल के बाहर बैठा सूर्यास्त देख रहा था। उसके रंगों को सोचा कि प्लेट में कितने अच्छे लगेंगे। वो रंग टमाटर से नहीं आएंगे। लाल शिमला मिर्च भूनकर ग्रेवी बनाऊं तो वैसा रंग आएगा। ये विजुअलाइजेशन है। आप पेंटर है तो उसे ये स्किल आनी चाहिए कि पीला और नीला रंग मिलाएंगे तो हरा हो जाएगा। नमक डालो तो नमकीन, मीठी चीज में जरा सा नमक तो मिठास बढ़ जाती है। ये खाने का साइंस है। सवाल: भारतीय कुकिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने के लिए आप आने वाले वर्षों में किस दिशा में काम करना चाहेंगे? संजीव कपूर: मैं काफी सालों से इंडियन फूड का प्रचार कर रहा हूं। इसमें नई नई चीजें जोड़ी। इसमें मिलिट्स की बात शुरू हुई तो वर्ष 2017 में मिलिट्स की खिचड़ी बनाई। जिसका गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। पीएम मोदी ने भी उसे काफी पॉपुलर कर दिया है। हाल ही में मेरी मुलाकात राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू से हुई। उन्हें मैंने निवेदन किया कि ट्राइबल फूड्स के बारे में लोगों को बताएं। प्रोत्साहित करें। वहां पर क्या उगता है, वे कैसे आगे बढ़े। पॉपुलेरिटी होगी तो उनका रहन सहन और आर्थिक स्थिति अच्छी होगी। मैं तो हमेशा सभी से कहता हूं कि हमें गर्व से कहना चाहिए कि हम भारतीय खाते हैं। हमें सबसे ज्यादा पसंद भारतीय है। अगर हलवाई अपनी मिठाई को मिठाई नहीं बोलेगा तो गलत है। सवाल: आपको कौनसी राजस्थानी डिश पसंद है। संजीव कपूर: मुझे बहुत सारी राजस्थानी डिश अच्छी लगती हैं, लेकिन चक्के की सब्जी खास पसंद है जो आजकल कम होती जा रही है। इसके साथ केर सांगरी, मंगोड़ी या गट्टे की सब्जी भी पसंदीदा है। येये सब्जियां घरों में कम बन रही हैं, रेस्टोरेंट्स में भी कम मिलती हैं।
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