45 मिनट पहले
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- किताबों से जानिए, आत्म-स्वीकृति हार मानना कैसे नहीं है? हम अहंकार के साथ चिपके रहते हैं तो क्या हासिल नहीं होता?
अपनी अपूर्णताओं को स्वीकार करना जरूरी है हममें से ज्यादातर लोग जीवन का बड़ा हिस्सा खुद को सुधारने या किसी आदर्श रूप तक पहुंचने की कोशिश में बिता देते हैं। लेकिन असली आजादी तब आती है जब हम खुद को उसी रूप में अपनाते हैं जैसे हम हैं। आत्म-स्वीकृति हार मानना नहीं है, बल्कि यह साहस है कि हम अपने भीतर की सच्चाई को देखें और उससे भागें नहीं। जब हम अपनी अपूर्णताओं को स्वीकारते हैं, तो आत्मविश्वास से भर जाते हैं। (रैडिकल एक्सेप्टेंस-तारा ब्राख)
अहंकार की पकड़ को छोड़ देना भी साहस है हमारी सबसे बड़ी बाधा हमारा अहंकार है। जब तक हम अहंकार के साथ चिपके रहते हैं, तब तक हमें कभी सच्ची शांति नहीं मिल सकती। इस बात को समझें कि आप अपने विचारों और पहचान से कहीं ज्यादा बड़े हैं। हर क्षण में पूरी तरह सजग होकर जीना ही हमें स्वतंत्र बनाता है। साहस यह है कि हम अहंकार की पकड़ को छोड़ें और वर्तमान की शांति को अपनाएं। यही असली खुशी और संतोष का स्रोत भी है। (ए न्यू अर्थ-एक्हार्ट टॉल)
अपने शब्दों को बेहद ईमानदारी से बोलिए हमारी बहुत-सी तकलीफें उन समझौतों से आती हैं, जो हमने खुद से और दुनिया से अनजाने में कर लिए हैं। हमें नए समझौते करने होंगे। जैसे- अपने शब्दों को ईमानदारी से बोलना, किसी बात को व्यक्तिगत रूप से न लेना, अनुमान न लगाना, अपनी पूरी क्षमता से काम करना। जब हम इन सिद्धांतों को अपनाते हैं तो जीवन सरल होता है। असली शक्ति उसी क्षण पैदा होती है, जब हम सच्चाई के साथ जीना शुरू करते हैं। अपने शब्दों को बेहद ईमानदारी से बोलिए। (द फोर एग्रीमेंट्स-डॉन मिगुएल)
सारी शक्तियां आपके भीतर ही छिपी हुई हैं असली युद्ध बाहर की दुनिया में नहीं, हमारे भीतर चलता है- डर, आलस्य, लालच और भ्रम के साथ। जब हम इन आंतरिक शत्रुओं को पहचान लेते हैं, तभी हमारे अंदर असली साहस जन्म लेता है। जीवन का हर पल एक शिक्षक की तरह ही तो है और हर अनुभव हमें परखता है। शांति पाने का रास्ता भागने में नहीं, जागरूक होकर हर क्षण का सामना करने में है। जब हम अपने मन को शांत करते हैं और वर्तमान में जीते हैं, तब हमें यह समझ में आ जाता है कि सारी शक्तियां तो हमारे भीतर ही छिपी हुई हैं।(द वे ऑफ द पीसफुल वॉरियर-डैन मिलमैन)








