6 घंटे पहले
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किताबों से जानिए, बेचैनी कैसे पैदा होती है? इंसान अपनी असली ताकत कब पहचानता है?
वर्तमान में उपस्थित रहना क्यों अच्छा है हम मानकर चलते हैं कि हमारे पास बहुत समय है, इसलिए काम टालते हैं। जब एहसास होता है कि जीवन सीमित है, तब बेचैनी पैदा होती है। हम समय को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। जब इंसान यह स्वीकार करता है कि सब कुछ करना संभव नहीं, तभी कुछ सार्थक करना शुरू करता है। सीमाओं को स्वीकारना हार नहीं, विवेक का संकेत है। जो वर्तमान में उपस्थित है, वही जीवन जीता है। (फोर थाउजैंड वीक्स -ऑलिवर बर्कमैन)
सच्ची ताकत आराम में नहीं, संघर्ष में है आधुनिक जीवन ने हमें आराम का आदी बनाया है। जरा-सी परेशानी आते ही हम रास्ता बदल लेते हैं। बिना चुनौती के जीवन खोखला है। जब इंसान कठिन परिस्थितियों से गुजरता है, तब अपनी असली क्षमता पहचानता है। थकान, असफलता, अकेलापन, हमें तोड़ने नहीं गढ़ने आते हैं। जो थोड़ी असुविधा को स्वीकारता है, वही असल में मजबूत है। सच्ची ताकत आराम में नहीं, संघर्ष में है। (द कंफर्ट क्राइसिस -माइकल ईस्टर)
धैर्य और ईमानदारी इंसान को मजबूत बनाते हैं कठिन काम करने का अर्थ खुद पर जोर डालना नहीं, खुद को समझना है। अक्सर हम मजबूती को कठोरता समझते हैं, जबकि असली मजबूती संतुलन में है। जो सोच समझकर आगे बढ़ता है, वही लंबी दौड़ में सफल होता है। असफलता कमजोरी नहीं, सीखने का जरिया है। धैर्य और ईमानदारी, वो गुण हैं जो इंसान को अंदर से मजबूत बनाते हैं। फिर चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों। (डू हार्ड थिंग्स -स्टीव मैगनेस)
सुकून चाहिए तो जीवन को समझदारी से स्वीकार करें खुशी को पकड़ने की कोशिश में हम उसे दूर धकेल देते हैं। जब अपेक्षाएं बहुत बढ़ जाती हैं, तो संतोष अपने आप ही गायब हो जाता है। साधारण चीजों के लिए आभार व्यक्त करते रहें। एेसा करने से हमारा मन स्थिर होता है। जो व्यक्ति यह समझ लेता है कि उसकी हर इच्छा पूरी होना बिल्कुल जरूरी नहीं है, वही असल में भीतर से शांत रहता है। जीवन को नियंत्रित करने की कोशिश न करें। जीवन को समझदारी के साथ स्वीकार करना ही सुकून की कुंजी है। (ए गाइड टु द गुड लाइफ -विलियम बी इरविन)








