सेहतनामा- क्या विटामिन D की कमी से होता है कैंसर:  भारत में 70% से ज्यादा लोगों में इसकी कमी, डॉक्टर से जानें कैसे पूरी होगी
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सेहतनामा- क्या विटामिन D की कमी से होता है कैंसर: भारत में 70% से ज्यादा लोगों में इसकी कमी, डॉक्टर से जानें कैसे पूरी होगी

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10 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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विटामिन D को सनशाइन विटामिन भी कहा जाता है। यह हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी विटामिन है। यह हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। यह सेल्स ग्रोथ व ब्लड प्रेशर रेगुलेशन में भी मदद करता है।

विटामिन D की कमी होने पर बॉडी कैल्शियम को अब्जॉर्ब नहीं कर पाती है, जिससे हड्डियां कमजोर होने के साथ कई अन्य समस्याएं होने लगती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि विटामिन D की कमी से कुछ तरह का कैंसर हो सकता है।

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक भारत में 70% से ज्यादा लोग विटामिन D की कमी से जूझ रहे हैं। इसका मतलब हुआ कि हर 4 में से 3 लोगों के शरीर में विटामिन D की कमी है। इसलिए कैंसर का जोखिम भी ज्यादा हो सकता है।

इसलिए ‘सेहतनामा’ में आज विटामिन की कमी से कैंसर के जोखिम पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • विटामिन D की कमी से कौन से कैंसर हो सकते हैं?
  • किन कारणों से विटामिन D की कमी हो सकती है?
  • इसे पूरा करने के लिए क्या करना चाहिए?

विटामिन D की कमी और कैंसर

विटामिन D सिर्फ हड्डियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए जरूरी है। यह कोशिकाओं के विकास को नियंत्रित करता है, इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है और इंफ्लेमेशन कम करता है। शरीर में इसकी कमी होने पर इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है। इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

विटामिन D की कमी से किन कैंसर का जोखिम

डॉ. समित पुरोहित कहते हैं कि विटामिन D की कमी से कैंसर का लिंक ढूंढ़ने के लिए बीते कुछ सालों में लगातार रिसर्च हो रही हैं। इसकी कमी से कौन से कैंसर का जोखिम हो सकता है, ग्राफिक में देखिए-

कुछ स्टडीज में मिले विटामिन D की कमी और कैंसर के लिंक

कोलोरेक्टल कैंसर- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में सितंबर, 2022 में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, विटामिन D कोशिकाओं की असामान्य ग्रोथ को रोकता है। इसकी कमी से कोलोरेक्टल यानी आंतों के कैंसर यानी का खतरा बढ़ सकता है।

ब्रेस्ट कैंसर- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में जनवरी, 2012 में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, महिलाओं में कम विटामिन D की कमी से ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।

फेफड़ों का कैंसर- हेल्थ जर्नल मेडिसिन में नवंबर, 2017 में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, विटमािन D की कमी से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और कोशिकाओं में इंफ्लेमेशन बढ़ जात है। इसके चलते फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

प्रोस्टेट कैंसर- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में अक्टूबर, 2018 में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, पुरुषों में बहुत ज्यादा या बहुत कम विटामिन D लेवल होने पर प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है।

पैंक्रियाटिक कैंसर- जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन एंड मेटाबॉलिज्म में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, अगर विटामिन D बहुत कम हो गया है तो पैंक्रियाटिक कैंसर का खतरा ज्यादा हो सकता है।

क्यों हो रही लोगों में विटामिन D की कमी?

डॉ. समित पुरोहित कहते हैं कि आजकल लोगों में विटामिन D की कमी तेजी से बढ़ने का मुख्य कारण ये है कि लोग सूरज की रोशनी में बहुत कम समय बिताते हैं। लोग ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर रहते हैं, जिससे शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन D बनाने के लिए जरूरी UVB किरणें नहीं मिल पाती हैं। इसके अलावा भी कई कारण हैं, ग्राफिक में देखिए-

ग्रफिक में दिए सभी पॉइंट्स विस्तार से समझिए-

सनलाइट का एक्सपोजर न मिलने से कम हो रहा विटामिन D

अगर कोई ज्यादातर समय घर या ऑफिस में रहता है और धूप में नहीं जा पाता है तो शरीर को विटामिन D बनाने का मौका नहीं मिलता है। ऐसे ज्यादातर लोगों के शरीर में विटामिन D की कमी हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे शरीर को विटामिन D बनाने के लिए UVB किरणों की जरूरत होती है, जो सूरज से आती हैं।

वायु प्रदूषण के कारण नहीं मिल रही पर्याप्त सनलाइट

अगर कोई बहुत प्रदूषित शहर या इलाके में रहता है तो यह भी विटामिन D की कमी का कारण हो सकता है। गाड़ियों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं हवा में मौजूद कार्बन कणों को बढ़ा देता है। ये कण सूरज की UVB किरणों को सोख लेते हैं, जिससे शरीर में विटामिन D बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

सनस्क्रीन के अधिक इस्तेमाल से कम हो रहा विटामिन D

सनस्क्रीन लगाने से सूरज की हानिकारक किरणों से बचाव होता है, लेकिन यह UVB किरणों को भी रोक देती है। UVB किरणें ही शरीर में विटामिन D बनाने का काम करती हैं, इसलिए जरूरत से ज्यादा सनस्क्रीन लगाने से विटामिन D की कमी हो सकती है।

गहरे रंग की त्वचा देर से बना पाती है विटामिन D

गहरे रंग की त्वचा में अधिक मेलेनिन होता है, जो सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता है। हालांकि, ज्यादा मेलेनिन होने के कारण गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों को विटामिन D बनाने के लिए ज्यादा समय तक धूप में रहना पड़ता है। इसलिए, जिनकी त्वचा सांवली या काली होती है, उनमें विटामिन D की कमी का खतरा ज्यादा होता है।

मोटापा या फैट विटामिन D को अवशोषित करते

शरीर में जमा अतिरिक्त फैट विटामिन D को अवशोषित कर लेता है और इसे कोशिकाओं तक पहुंचने से रोकता है। मोटे लोगों में विटामिन D की कमी इसलिए ज्यादा पाई जाती है, क्योंकि शरीर में मौजूद अतिरिक्त चर्बी इसे जमा कर लेती है और शरीर को इसे इस्तेमाल करने में मुश्किल होती है।

उम्र ज्यादा होने पर विटामिन D बनाने की क्षमता कमजोर होती

हमारी उम्र जैसे-जैसे बढ़ती है, त्वचा की विटामिन D बनाने की क्षमता कम हो जाती है। बुजुर्ग लोगों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। इसलिए डॉक्टर अक्सर उन्हें विटामिन D सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं।

खराब गट हेल्थ से रुकता विटामिन D का अवशोषण

विटामिन D जो हम खाने या सप्लीमेंट के जरिए लेते हैं, वह हमारे पेट में अवशोषित होता है। अगर पेट से जुड़ी कोई बीमारी हो, जैसे IBS यानी इरिटेबल बॉउल सिंड्रोम, सीलिएक डिजीज या क्रोहन डिजीज, तो शरीर में विटामिन D सही से नहीं पहुंच पाता और इसकी कमी हो सकती है।

लिवर और किडनी हेल्थ भी सही होनी जरूरी

लिवर और किडनी शरीर में विटामिन D को सक्रिय करते हैं। अगर लिवर खराब हो तो यह सही मात्रा में बाइल जूस नहीं बना पाता है, जो विटामिन D के अवशोषण में मदद करता है। अगर किडनी कमजोर है तो ये विटामिन D को शरीर के लिए उपयोगी रूप में बदल नहीं पाती हैं। इस वजह से किडनी की बीमारियों से जूझ रहे लोगों में विटामिन D की कमी होती है।

विटामिन D की कमी कैसे पूरी होगी?

डॉ. समित पुरोहित कहते हैं कि भारतीयों को विटामिन D का लेवल नॉर्मल बनाए रखने के लिए रोज 1 घंटे धूप की जरूरत है। अगर कोई रोज लगभग 1 घंटे धूप में रहता है तो विटामिन D का लेवल मेन्टेन रह सकता है। हमारी त्वचा का जितना हिस्सा सीधे सूरज की रोशनी के संपर्क में आता है, उतना ही हिस्सा विटामिन D बनाता है। इसलिए कपड़े पहनकर धूप में बैठने का कोई फायदा नहीं होता है। हालांकि, गर्मियों के मौसम में दोपहर की धूप में जानें से बचना चाहिए। इसके फॉलो करें ये टिप्स-

  • सुबह थोड़े कम कपड़े पहनकर धूप लें।
  • वजन कंट्रोल में रखें।
  • खाने में दूध ये दूध से बनी कोई चीज शामिल करें।
  • भोजन में मशरूम, अंडा या मछली भी खा सकते हैं।

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क्या आप जानते हैं कि शरीर में विटामिन D की मात्रा अधिक होना भी सही नहीं है। इसे विटामिन D टॉक्सिसिटी या हाइपरविटामिनोसिस (Hypervitaminosis) D कहते हैं। यह एक गंभीर स्थिति है, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। पूरी खबर पढ़िए…

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