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15 घंटे पहले
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सोमवार, 13 अप्रैल को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे वरुथिनी एकादशी कहते हैं। एकादशी पर विष्णु जी के लिए व्रत-उपवास करने की परंपरा है। सोमवार के स्वामी शिव जी माने गए हैं। ज्योतिष सोमवार का कारक ग्रह चंद्र को माना जाता है। एकादशी और सोमवार का योग होने से इस दिन विष्णु जी के साथ ही शिव जी और चंद्रदेव की भी पूजा खासतौर पर करनी चाहिए।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, वरुथिनि एकादशी व्रत घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना से किया जाता है। भगवान विष्णु की भक्ति और एकादशी व्रत से भक्तों का जीवन बदल सकता है।
एकादशी पर ऐसे कर सकते हैं भगवान विष्णु की पूजा
- सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर में सबसे पहले प्रथम पूज्य गणपति का पूजन करें।
- गणपति पूजन के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें। विष्णु पूजन और व्रत करने का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। भगवान को जल, पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं। आप चाहें तो विष्णु जी के साथ महालक्ष्मी की प्रतिमा भी स्थापित कर सकते हैं।
- पीले फूल, तुलसी दल और चंदन अर्पित करें। भोग में मिठाई, मौसमी फल चढ़ाएं। धूप और दीप जलाएं।
- ध्यान रखें तुलसी के बिना विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है।
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- वरुथिनी एकादशी की कथा पढ़ें-सुनें। भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें।
- पूरे दिन उपवास रखें। फल, दूध या व्रत का हल्का भोजन ले सकते हैं।
- शाम को फिर से भगवान विष्णु की पूजा करें।
- अगले दिन (द्वादशी) सुबह पूजा के बाद व्रत खोलें।
- जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं और इसके बाद स्वयं भोजन करें।
एकादशी पर कर सकते हैं ये शुभ काम
- शिवलिंग के पास दीपक जलाएं और तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं, काले तिल चढ़ाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
- सूर्यास्त के बाद घर के मंदिर में और तुलसी के पास दीपक जलाएं।
- हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगर आपके पास पर्याप्त समय हो, तो सुंदर कांड का पाठ भी कर सकते हैं। ऊँ रामदूताय नम: मंत्र का जप भी किया जा सकता है।
- जिन लोगों की कुंडली में चंद्र ग्रह से संबंधित दोष हैं, उन्हें सोमवार और एकादशी के योग में चंद्रदेव की विशेष पूजा करनी चाहिए। चंद्र की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इसलिए शिवलिंग पर चांदी के लोटे से दूध चढ़ाएं। ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जप 108 बार करें। पूजा के बाद दूध का दान करें।
- किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं। किसी तालाब में मछलियों के लिए आटे की गोलियां बनाकर डालें।
- आज अनाज, फल, जूते-चप्पल, कपड़े, छाता, पानी, मटका दान करें।
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सोमवार को वरुथिनी एकादशी व्रत: पूजा-व्रत के साथ करें तिल, अन्न, भोजन, जूते-चप्पल, छाता, मटका, पानी, धन और हल्दी का दान

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