सोशल मीडिया से लड़कियों की आत्महत्याएं बढ़ीं:  2010 से 2021 के बीच 10 से 14 आयुवर्ग के बच्चों पर स्टडी; ‎आत्महत्याएं 167% और सेल्फ हार्म के मामले 188% बढ़े‎
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सोशल मीडिया से लड़कियों की आत्महत्याएं बढ़ीं: 2010 से 2021 के बीच 10 से 14 आयुवर्ग के बच्चों पर स्टडी; ‎आत्महत्याएं 167% और सेल्फ हार्म के मामले 188% बढ़े‎

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द न्यूयॉर्क टाइम्स2 घंटे पहले

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साइकोलॉजिस्ट जोनाथन हेड के अनुसार-10 से 14 वर्ष की लड़कियों के बीच स्वयं को नुकसान पहुंचाने वाले मामले 188 प्रतिशत और उस आयु के लड़कों में 48 प्रतिशत बढ़ गए।- प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar

साइकोलॉजिस्ट जोनाथन हेड के अनुसार-10 से 14 वर्ष की लड़कियों के बीच स्वयं को नुकसान पहुंचाने वाले मामले 188 प्रतिशत और उस आयु के लड़कों में 48 प्रतिशत बढ़ गए।- प्रतीकात्मक फोटो

फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म इस विचार के कारण सुरक्षित समझे गए थे कि वे न सिर्फ इनोवेटिव टेक्नोलॉजी हैं बल्कि संवाद और अभिव्यक्ति का माध्यम हैं। अब यह सुरक्षा कमजोर होने लगी है। लॉस एंजेल्स की एक अदालत में इंस्टाग्राम और यूट्यूब के खिलाफ चल रहा मुकदमा इसका स्पष्ट संकेत है। एक बीस वर्षीय महिला का आरोप है कि इन प्लेटफॉर्मों की वजह से उसे मानसिक और शारीरिक नुकसान हुआ है। मुकदमा दायर करने वालों का आरोप है कि सोशल मीडिया को जानबूझकर ज्यादा इस्तेमाल का आदी बनाने के हिसाब से डिजाइन किया गया है।

हालांकि ये कंपनियां इनकार नहीं करती हैं कि उनके प्रोडक्ट बहुत अधिक ध्यान खींचने वाले हैं। उनकी दलील है कि अच्छा उपन्यास भी ऐसा होता है। कोई नहीं कहता कि वह लोक स्वास्थ्य के लिए हानिकर है। वैसे, उपन्यास के प्रकाशक को मानहानि के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। लेकिन, सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर आने वाले कंटेंट के लिए जवाबदेह नहीं ठहराया जाता है। बदलते हालात इन दलीलों के खिलाफ हैं। 1990 और 2000 के दशकों में प्लेटफॉर्म दूसरों के कंटेंट पेश करते थे। अब वे खुद सक्रिय हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एल्गोरिद्म, ऑटो वीडियो प्ले जैसे आक्रामक तरीकों से यूजर को अपने साथ बनाए रखते हैं। हम सूचना के युग में रह रहे हैं, लेकिन सूचना का एक दुर्भाग्यपूर्ण साइड इफेक्ट यह है कि वह अभिव्यक्ति का एक तरीका भी है।

साइकोलॉजिस्ट जोनाथन हेड ने अमेरिका के कुछ चौंकाने वाले आंकड़े दिए हैं। 2010 से 2021 के बीच 10 से 14 साल की आयुवर्ग की लड़कियों में आत्महत्या की दर 167 प्रतिशत बढ़ गई। इस अवधि में 10 से 14 वर्ष की लड़कियों के बीच स्वयं को नुकसान पहुंचाने वाले मामले 188 प्रतिशत और उस आयु के लड़कों में 48 प्रतिशत बढ़ गए।



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