परिजनों के मुताबिक ऐसा भी नहीं लगा कि दोनों को कोई पछतावा है। उन्हें देखकर लगा कि दोनों मेरठ जेल में रहकर खुश हैं। इसलिए अगर अदालत दोनों को सजा सुनाती है तो वे उन्हें दूसरे जिलों की अलग-अलग जेलों में स्थानांतरित करने की मांग करेंगे।
ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंद्रानगर निवासी सौरभ के भाई बबलू ट्रांसपोर्ट का कारोबार करते हैं। उनका कहना है कि अप्रैल में जब दोनों आरोपी न्यायालय में पेशी पर आए थे, तब उन्हें देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि वे जेल से आए हैं। उनका कहना है कि आरोपियों ने सुनियोजित साजिश रचकर वारदात को अंजाम दिया और जेल में भी दोनों के एक साथ रहने से वे काफी खुश दिखाई दिए।
रेनू देवी का कहना है कि पति की मौत के बाद महिलाएं आमतौर पर मेकअप आदि से परहेज करती हैं, लेकिन जेल में रहने के बाद भी मुस्कान इनसे दूर नहीं रह पाई थी।
11 बार बबलू और 9 बार रेनू ने दर्ज कराए बयान
बबलू ने बताया कि वह बयान दर्ज कराने के लिए 11 बार और उनकी मां रेनू देवी 9 बार न्यायालय गई थीं। गवाही के अलावा उनसे बचाव पक्ष की वकील ने लंबी जिरह भी की थी।











