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- Avdheshanand Giri Maharaj Life Lesson. When We Realize That We Are Part Of God, Then There Is Lasting Joy In Life.
हरिद्वार4 घंटे पहले
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जीवन में आनंद तब आता है जब व्यक्ति अपने सच्चे स्वरूप को समझता है। शास्त्र कहते हैं कि परमात्मा सदा रहने वाला है और हर पल नया है। हम उसी परमात्मा के अंश हैं, इसलिए यह गुण हमारे भीतर भी है। नित्यता का अर्थ है जो हमेशा बना रहता है। जब हम इस बात को महसूस करते हैं, तो मन में स्वाभाविक आनंद आता है। हमारा वास्तविक स्वरूप कभी पुराना नहीं होता, क्योंकि उसमें कोई बदलाव या दोष नहीं होता।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए तनाव कैसे दूर हो सकता है?
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