स्वास्थ्य विभाग के तबादलों में मनमानी: अब नर्सों के ट्रांसफर पर विवाद, मुख्यमंत्री से जांच की मांग
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स्वास्थ्य विभाग के तबादलों में मनमानी: अब नर्सों के ट्रांसफर पर विवाद, मुख्यमंत्री से जांच की मांग

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उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग संवर्ग के तबादलों को लेकर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि तबादला नीति में एकरूपता नहीं बरती गई और चहेते 11 नर्सिंग अधिकारियों को गृह जिले में तैनाती दे दी गई, जबकि गंभीर पारिवारिक और स्वास्थ्य कारण बताने वाले कई कर्मचारियों के आवेदन खारिज कर दिए गए। राजकीय नर्सेज संघ ने मनमानी का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री से जांच की मांग की है।

नर्सिंग संवर्ग में कुल 348 तबादले हुए हैं, जिसमें 11 को गृह जिले में तैनाती दी गई है जबकि अन्य का खारिज कर दिया गया है। इसी तरह दो वर्षों में पदोन्नति प्राप्त कर वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी बनने वालों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनाती दी गई है, जबकि वहां वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारियों के पद सृजित नहीं हैं। इन्हें जिला अस्पताल में ही तैनाती दी जा सकती है।

इसी तरह तमाम नर्सिंग अधिकारियों ने शिकायत की है कि उनके ही अस्पताल में तीन साल पहले तैनात होने वालों को मनचाहे स्थान पर तैनाती दे दी गई, लेकिन वे 10 से 12 साल से इंतजार कर रहे हैं। राजकीय नर्सेज संघ ने मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री एवं अपर मुख्य सचिव को लिखित शिकायत भेजी है।

केस 1

बरेली निवासी जीनत 2019 से बदायूं में कार्यरत हैं। व सीकेडी और कैंसर से पीड़ित हैं। एम्स में इलाज चल रहा है। उन्होंने खुद की देखरेख होती रहे, इसलिए गृह क्षेत्र के लिए आवेदन किया था। इनका तबादला नहीं हुआ है।

केस 2

चित्रकूट में कार्यरत नर्सिंग अधिकारी के पति 70 फीसदी मानसिक रूप से बीमार हैं। घर में देखभाल करने वाला कोई नहीं है। प्रयागराज के लिए आवेदन की थीं। फिर भी उनके आवेदन पर विचार नहीं किया गया।

संघ के पदाधिकारियों का आरोप

राजकीय नर्सेज संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने तबादले में बड़े पैमाने पर मनमानी का आरोप लगाया है। कहा, गंभीर बीमारियों से पति व बच्चे के पीड़ित होने के बाद भी कई का तबादला नहीं किया गया है। कई नर्सेज 10 से 15 साल से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं, उनका भी तबादला नहीं किया गया है, जबकि तीन से चार साल वालों को मनमाफिक स्थान पर तैनाती दे दी गई है। निदेशालय स्तर के खाली पदों को भी नहीं भरा गया है। इससे संवर्ग में असंतोष है। मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है।

तबादलों में गड़बड़ी के आरोप बेबुनियाद हैं। सभी का एक साथ नहीं किया जा सकता है। यदि किसी का गृह क्षेत्र में हुआ है तो उसे दिखवाया जाएगा की किन परिस्थितियों में हुआ है। -डॉ. पवन कुमार अरुण, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य



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