10 मिनट देरी से स्‍कूल पहुंचने पर अमानवीय सजा:  क्‍लास 6 की अंशिका से स्‍कूल बैग के साथ कराए 100 सिटअप्‍स; इलाज के दौरान मौत
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10 मिनट देरी से स्‍कूल पहुंचने पर अमानवीय सजा: क्‍लास 6 की अंशिका से स्‍कूल बैग के साथ कराए 100 सिटअप्‍स; इलाज के दौरान मौत

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39 मिनट पहले

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महाराष्‍ट्र के पालघर जिले के एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा 6 की छात्रा अंशिका की 15 नवंबर को मौत हो गई। छात्रा पिछले एक सप्‍ताह से अस्‍पताल में थी। दरअसल एक सप्‍ताह पहले उसे 10 मिनट देर से पहुंचने पर स्‍कूल में सिटअप्‍स यानी उठक-बैठक लगाने की सजा दी गई थी। छात्रा की मां का कहना है कि उसके बाद से ही बेटी उठ भी नहीं पा रही थी। छात्रा की मौत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

स्‍कूल बैग के साथ कराईं 100-100 उठक-बैठक

13 साल की अंशिका गौड़ वसई के सातीवली में स्थित श्री हनुमत स्कूल में पढ़ती थी। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के सदस्यों के अनुसार, 8 नवंबर को अंशिका और अन्य 4 बच्‍चे 10 मिनट देरी से स्कूल पहुंचे थे। उनसे सजा के तौर पर 100-100 उठक-बैठक कराई गईं।

अंशिका की मां का आरोप है कि उनकी बेटी की मौत उसकी टीचर द्वारा दी गई अमानवीय सजा की वजह से ही हुई है। स्कूल बैग पीठ पर रखकर 100 उठक-बैठक करने के बाद बेटी की हालत बिगड़ गई थी। उसकी गर्दन और पीठ में असहनीय दर्द होने लगा और वो उठ भी नहीं पा रही थी, जिसके चलते उसे अस्‍पताल ले जाना पड़ा।

टीचर ने कहा- अभी मौत की वजह साफ नहीं

वसई के मनसे नेता सचिन मोरे ने बताया कि अंशिका को पहले से कुछ स्वास्थ्य समस्याएं थीं, फिर भी उसे ऐसी सजा दी गई। स्कूल के एक टीचर ने कहा, ‘यह पक्‍का पता नहीं है कि इस बच्ची ने असल में कितनी उठक-बैठक की थीं। यह भी पक्का नहीं है कि उसकी मौत का कारण यही सजा थी या कुछ और।’

परिजनों का हंगामा, मामले की जांच शुरू

छात्रा की मौत के बाद परिजनों में गुस्‍सा है। खंड शिक्षा अधिकारी पांडुरंग गालंगे ने पुष्टि की कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘जांच से ही पता चलेगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या है।’ अब तक इस मामले में कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं हुई है।

छात्रा की मौत के बाद बड़ी संख्‍या में लोग सड़कों पर जमा हुए।

छात्रा की मौत के बाद बड़ी संख्‍या में लोग सड़कों पर जमा हुए।

मीडिया से बात करते हुए अंशिका की मां ने कहा, ‘सजा मिलने के बाद बेटी की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। उसे गर्दन और पीठ में तेज दर्द हुआ और वह उठ भी नहीं पा रही थी।’ उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपनी बेटी की हालत को लेकर शिक्षिका से बात की, तो शिक्षिका ने सजा को जायज बताते हुए कहा कि स्‍कूल में कड़ा अनुशासन जरूरी है।

अंशिका की मां ने कहा, ‘मैंने शिक्षिका से कहा कि सजा देने का मतलब यह नहीं है कि बच्चों को बैग के साथ उठक-बैठक करने पर मजबूर किया जाए। मेरी बेटी को अमानवीय सजा दी गई, जिसकी वजह से उसकी मौत हुई।’

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