- Hindi News
- Jeevan mantra
- Dharm
- Pitru Paksha Till 21 September, Significance Of Pitru Paksha In Hindi, Matra Navami On 15th September, Sarvpitru Moksha Amawasya On 21st September
17 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

अभी पितृ पक्ष चल रहा है और ये पक्ष 21 सितंबर तक चलेगा। पितृ पक्ष की कुछ खास तिथियां आने वाली हैं, जैसे मातृ नवमी, एकादशी, चतुर्दशी और सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या। इन तिथियों का महत्व काफी अधिक है।
15 सितंबर को है मातृ नवमी
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, ये तिथि विशेष रूप से दिवंगत महिलाओं, जैसे मां, दादी, नानी आदि महिलाओं के लिए समर्पित है। इस तिथि पर कुटुंब की उन मृत महिलाओं के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि हमें मालूम नहीं है। इसके साथ इस दिन उन मृत लोगों के लिए भी श्राद्ध करना चाहिए, जिनकी मृत्यु तिथि नवमी है।
17 सितंबर को है एकादशी श्राद्ध
इस तिथि पर उन मृत लोगों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि एकादशी है। इसके बाद 18 सितंबर को द्वादशी तिथि का श्राद्ध है, इस दिन उन लोगों के श्राद्ध करें, जिन्होंने संन्यास धारण किया था।
20 सितंबर को चतुर्दशी श्राद्ध
इस तिथि महत्व काफी अधिक है, क्योंकि इस तिथि उन लोगों के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं, जिनकी मृत्यु असमय हुई हो। इस दिन वीरगति प्राप्त सैनिक, जल में डूबे व्यक्ति या किसी दुर्घटना में मरे हुए पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। जिन लोगों ने आत्महत्या की थी, उनके लिए इसी तिथि पर श्राद्ध करने की परंपरा है।
21 सितंबर को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या
यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन है, इसे सर्व पितृ अमावस्या या महालय अमावस्या कहा जाता है। जिन पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, उनके लिए इसी दिन श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। इस पितृ पक्ष में जिन मृत लोगों के लिए श्राद्ध करना भूल गए हैं, उनके लिए इसी तिथि पर श्राद्ध करना चाहिए। इस दिन तर्पण और पिंडदान करने से सभी पितरों की आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है।
कुतुप काल में करना चाहिए श्राद्ध कर्म
श्राद्ध करने के लिए दोपहर में करीब 12 बजे का समय सबसे अच्छा रहता है, इसे कुतुप काल कहते हैं। सुबह और शाम का समय देवी-देवताओं की पूजा के लिए श्रेष्ठ रहता है।









