छोटी-छोटी गलतियों पर खुद को जिम्मेदार ठहराना खतरनाक:  ‘मैं फेल हूं’ की जगह ‘मुझसे गलती हुई’ कहना सीखें; ओवरथिंकिंग से बच सकेंगे
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छोटी-छोटी गलतियों पर खुद को जिम्मेदार ठहराना खतरनाक: ‘मैं फेल हूं’ की जगह ‘मुझसे गलती हुई’ कहना सीखें; ओवरथिंकिंग से बच सकेंगे

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काम में छोटी-सी गलती होने पर कई लोग खुद को कमजोर या अयोग्य समझने लगते हैं। उनके मन में बार-बार यही विचार चलता रहता है कि वे उतने काबिल नहीं हैं या नौकरी में अच्छा परफॉर्म नहीं कर पा रहे। मनोवैज्ञानिक इसे ‘इम्पोस्टर सिंड्रोम’ कहते हैं। दुनियाभर में लाखों लोग ओवरथिंकिंग की इस बीमारी से पीड़ित हैं। इसमें व्यक्ति अपनी उपलब्धियों और सफलता के बावजूद खुद पर शक करता है। यह समस्या महिलाओं और लंबे समय से हाशिए पर रहे समूहों में ज्यादा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की नकारात्मक सोच को कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) की मदद से बदला जा सकता है। यह एक तरह की टॉक थेरेपी है, जो लोगों को उनके मन में चल रहे नकारात्मक विचारों को पहचानना और उन्हें चुनौती देना सिखाती है। न्यूयॉर्क के अल्बर्ट एलिस इंस्टीट्यूट की क्रिस्टीन डॉयल कहती हैं कि जब मन कहे- ‘मैं इस नौकरी के लायक नहीं हूं’, तब खुद से पूछना चाहिए- ‘अगर मैं लायक नहीं था, तो मुझे यह नौकरी मिली कैसे?’ ‘मैं फेल हूं’ की जगह ‘मुझसे गलती हुई’ कहना सीखें। इससे ओवरथिंकिंग से बच सकेंगे। पेंसिल्वेनिया के बेक इंस्टीट्यूट फॉर कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी की अध्यक्ष जूडिथ बेक के मुताबिक, सीबीटी में सबसे पहले लोगों को अपनी नकारात्मक सोच पहचानना सिखाया जाता है। इसके बाद उन विचारों की सच्चाई जांची जाती है कि वे वास्तव में कितने सही हैं। हर डर सच नहीं, यह सिर्फ एक विचार सैन फ्रांसिस्को की मनोवैज्ञानिक एविगेल लेव नकारात्मक बातें लिखवाकर उन्हें उल्टा (रिवर्स) पढ़ने को कहती हैं। इससे उन विचारों का असर कम होने लगता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ‘मैं फेल हो जाऊंगा’ सोचने की बजाय ‘मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ूंगा’ जैसी सकारात्मक बातें खुद से कहें। यह समझना जरूरी है कि हर डर सच नहीं होता, कई बार सिर्फ दिमाग में आया एक विचार होता है। नकारात्मक सोच एक दिन में नहीं बदलती, मेंटल जिमिंग जरूरी मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि नकारात्मक सोच एक दिन में नहीं बदलती। इसके लिए मेंटल जिमिंग (लगातार अभ्यास)जरूरी है। रैंडॉल्फ पब्लिक स्कूल्स की क्रिस्टिन ब्रिंक अब हर शाम खुद से कहती हैं- ‘आज मैंने कई अच्छे फैसले लिए। बाकी काम कल कर लेंगे।’ विशेषज्ञों के अनुसार, नकारात्मक सोच की वजह से अगर कोई लगातार खुद को अयोग्य समझेगा, तो उसका आत्मविश्वास भी कमजोर पड़ने लगेगा। इसलिए अपनी खूबियां पहचानें व आत्मविश्वास बढ़ाएं।



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