25 नवंबर को विवाह पंचमी:  मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी पर हुआ था श्रीराम और सीता का विवाह, इसी तिथि पर तुलसीदास जी ने पूरा किया था श्रीरामचरित मानस ग्रंथ
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25 नवंबर को विवाह पंचमी: मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी पर हुआ था श्रीराम और सीता का विवाह, इसी तिथि पर तुलसीदास जी ने पूरा किया था श्रीरामचरित मानस ग्रंथ

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4 घंटे पहले

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मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी 25 नवंबर को है। इसे विवाह पंचमी कहते हैं। मान्यता है कि त्रेता युग में इसी तिथि पर भगवान श्रीराम और देवी सीता का विवाह हुआ था। इस पर्व पर भगवान राम और सीता के मंदिरों में दर्शन-पूजन करने का विशेष महत्व है। भक्त पूजा, यज्ञ और अनुष्ठान करते हैं। कई स्थानों पर श्रीरामचरितमानस का पाठ भी किया जाता है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, विवाह पंचमी तिथि पर ही गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस ग्रंथ पूर्ण किया था। इसलिए विवाह पंचमी के दिन श्रीरामचरितमानस का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से श्रीराम की कृपा से घर में सुख-शांति बनी रहती है।

विवाह पंचमी पर ऐसे कर सकते हैं श्रीराम-सीता की पूजा

  • विवाह पंचमी पर सुबह जल्दी उठें। स्नान के बाद सूर्य देव को जल चढ़ाएं।
  • घर के मंदिर में पूजा की चौकी तैयार करें।
  • चौकी पर एक कपड़ा बिछाकर राम दरबार यानी श्रीराम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान, भरत-शत्रुघ्न की मूर्तियां स्थापित करें। भगवान का जल और पंचामृत से अभिषेक करें। पंचामृत दूध, दही, घी, मिश्री और शहद मिलाकर बनाया जाता है। पंचामृत के बाद शुद्ध जल चढ़ाएं।
  • अभिषेक के बाद भगवान की मूर्तियों का वस्त्र और हार-फूल से श्रृंगार करें। श्रीराम को दूल्हे और सीता को दुल्हन की तरह सजाएं।
  • फल, फूल और अन्य पूजा सामग्री चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं। मिठाई का भोग लगाएं। आरती करें। पूजा के अंत में जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें। पूजा के बाद प्रसाद बांटें और खुद भी लें। पूजा में सीता-राम, सीता-राम नाम जप कर सकते हैं। आप चाहें रां रामाय नम: मंत्र का जप भी कर सकते हैं। श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।
  • इस दिन श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है।

सुख-शांति बनाए रखने की कामना से करें श्रीराम और सीता की पूजा

भगवान श्रीराम और माता सीता की विशेष पूजा करने से घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। मान्यता है कि जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में कलह है, वाद-विवाद होते हैं, उन्हें खासतौर पर श्रीराम-सीता की पूजा करनी चाहिए। इनकी पूजा से कुंवारे लोगों के विवाह होने मे आ रही बाधाएं भी दूर हो सकती हैं।

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