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तेज रफ्तार जीवनशैली, देर रात तक मोबाइल-लैपटॉप की स्क्रीन देखना और बढ़ते मानसिक तनाव के बीच नींद आज के समय की बड़ी लेकिन सबसे अनदेखी स्वास्थ्य जरूरत बन गई है। हालांकि भारत की बड़ी आबादी कई वजहों के कारण पूरी नींद नहीं ले पा रही। ऑनलाइन सर्वे प्लेटफॉर्म लोकल सर्किल्स के ताजा सर्वे में 46% भारतीयों ने कहा कि पिछले 12 महीनों में उन्हें रोजाना 6 घंटे से भी कम निर्बाध नींद मिली। देश में 72% लोगों की नींद रात में वॉशरूम जाने से टूटती है। वहीं 23% लोगों ने नींद टूटने की वजह मच्छरों को बताया। जल्दी सोने-जल्दी उठने का चलन बदला अर्ली टू बेड एंड अर्ली टू राइज का नारा अब नर्सरी की पुस्तक तक सीमित है। वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के मुताबिक भारत में औसतन लोग रात 12:26 बजे के बाद सोने जाते हैं। सुबह जल्दी उठने के कारण कुल नींद कम रह जाती है। दुनिया में लोग औसतन 7 घंटे सोते हैं। भारत में यह आंकड़ा साढ़े छह घंटे है। महिलाएं पुरुषों से आधे घंटे कम सो पाती हैं। 42% लोगों की नींद जल्दी उठने के तनाव में टूट जाती है वॉशरूम जाना – 72%
सुबह काम का तनाव – 42%
मच्छर, बाहरी आवाजें – 23%
स्लीप एपनिया/बीमारी – 19%
मोबाइल कॉल/मैसेज – 14%
बच्चे या पार्टनर – 12%
असुविधाजनक बिस्तर – 9% 22% लोगों को मच्छरदानी में चैन की नींद आती है 72% – सकारात्मक माहौल
65% – हल्का डिनर
65% – दिन में व्यायाम
43% – आरामदायक कपड़े
29% – रात 10 बजे तक सोना
25% – रिलैक्सिंग म्यूजिक
22% – मच्छरदानी-रेपेलेंट स्लीप टूरिज्म नया ट्रेंड एक वैश्विक ट्रैवल रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर पांच में से एक यात्री ‘हर्कल-डर्कलिंग’ यानी पूरा दिन आराम से बिस्तर पर बिताने की अवधारणा पसंद करता है। दुनिया भर के होटल इस प्रवृत्ति को देखते हुए विशेष स्लीप-फोकस्ड अनुभव तैयार कर रहे हैं। भारत में भी बढ़ रहा चलन शांत पहाड़ों, समुद्र तटों और वैलनेस रिट्रीट में ऐसे कार्यक्रम शुरू हो रहे हैं, जिनका उद्देश्य शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित करके अच्छी नींद दिलाना है। इनमें सिक्स सेंसेस फोर्ट, राजस्थान, प्रकृति शक्ति केरल और उत्तराखंड में वना जैसे नाम शामिल हैं। सर्कैडियन रिदम से तय होती है नींद नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज जबलपुर के स्लीप एक्सपर्ट डॉ. शैलेष कुमार कहते हैं, हमारे शरीर में 24 घंटे का एक प्राकृतिक चक्र होता है, जिससे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है। यह तय करता है कि हमें कब नींद आएगी और कब अधिक सतर्क रहेंगे। इस का सबसे कमजोर समय रात 2 बजे से सुबह 5:59 बजे के बीच होता है। इस दौरान शरीर की सतर्कता सबसे कम होती है और नींद की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस होती है।
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