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नई दिल्ली10 मिनट पहले
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देश के 7 करोड़ से ज्यादा नौकरीपेशा लोगों के PF अकाउंट में जमा पैसे पर इस बार भी 8.25% की दर से ब्याज मिलेगा। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इस ब्याज दर को आज 18 जून को मंजूरी दी है।
खास बात यह है कि ब्याज का यह पैसा इसी महीने आपके खाते में आ जाएगा। EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने लगातार तीसरे साल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे नौकरीपेशा वर्ग को अपनी बचत पर पहले जितना ही फायदा मिलता रहेगा।
इस फैसले से जुड़े तमाम पहलुओं को सवाल-जवाब समझें…

सवाल 1: सरकार ने EPFO ब्याज दरों को लेकर क्या बड़ा फैसला किया है?
जवाब: केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड पर 8.25% की ब्याज दर को अंतिम मंजूरी दी है। PTI के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने EPFO के इस फैसले पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी है।
सवाल 2: PF खाताधारकों के खातों में ब्याज का पैसा कब तक क्रेडिट होगा?
जवाब: सूत्रों के मुताबिक, श्रम मंत्रालय के निर्देश पर EPFO इसी महीने (जून 2026) के भीतर सभी ग्राहकों के खातों में 8.25% की दर से ब्याज का पैसा क्रेडिट करना शुरू कर देगा।
सवाल 3: इस फैसले का देश के कितने लोगों पर सीधा असर पड़ेगा?
जवाब: सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा देश के 7 करोड़ से ज्यादा सदस्यों को मिलेगा, जो अपनी सैलरी का एक हिस्सा EPF में जमा करते हैं।
सवाल 4: इस बार ब्याज का पैसा ट्रांसफर होने में क्या कुछ बदलाव दिखेगा?
जवाब: हां, EPFO द्वारा विकसित किए गए एक नए इकोसिस्टम (तकनीकी सिस्टम) के तहत इस बार जैसे ही प्रक्रिया शुरू होगी, खाताधारकों के अकाउंट में ब्याज की रकम तुरंत (immediately) क्रेडिट हो जाएगी। इससे मेंबर्स को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
सवाल 5: EPF की यह 8.25% ब्याज दर कब और किसने तय की थी?
जवाब: इससे पहले 2 मार्च 2026 को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के शीर्ष निर्णय लेने वाले निकाय सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक हुई थी। इसी बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज दर तय की गई थी, जिसे बाद में अंतिम मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय भेजा गया था, क्योंकि केंद्र सरकार EPF की गारंटर होती है।
सवाल 6: पिछले कुछ सालों में EPF की ब्याज दरों का क्या ट्रेंड रहा है?
जवाब: EPFO ने लगातार तीसरे साल ब्याज दर को 8.25% पर बरकरार रखा है। मार्च 2022 में ब्याज दर को घटाकर 4 दशक के निचले स्तर 8.10% पर लाया गया था, जो कि इससे पिछले साल (2020-21) में 8.5% थी। 2023-24 में ब्याज दर को 2022-23 के 8.15% से मामूली बढ़ाकर 8.25% किया गया था। वहीं, 2024-25 के लिए पिछले साल फरवरी में भी EPFO ने ब्याज दर को 8.25% पर ही बनाए रखा था।
सवाल 7: EPF के इतिहास में सबसे कम ब्याज दर कब थी?
जवाब: वित्तीय वर्ष 2021-22 में दी गई 8.10% की ब्याज दर साल 1977-78 के बाद से सबसे कम थी। साल 1977-78 में EPF पर ब्याज दर 8% हुआ करती थी। इसके बाद मार्च 2020 में कोरोना काल के दौरान भी 2019-20 के लिए दर को 8.65% से घटाकर 8.5% किया गया था।
सवाल 8: पिछले एक दशक में EPF पर अधिकतम कितना ब्याज मिला है?
जवाब: पिछले 10 साल पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2015-16 में PF पर 8.8% का उच्च ब्याज मिला था। इसके अलावा 2013-14 और 2014-15 में यह दर 8.75% थी। वहीं 2016-17 में 8.65% और 2017-18 में ग्राहकों को 8.55% की दर से ब्याज दिया गया था। साल 2011-12 में भी ब्याज दर ठीक आज की तरह 8.25% ही थी।

UPI-ATM के जरिए निकाल सकेंगे PF
EPFO जल्द ही ATM और UPI के जरिए फंड निकालने की सुविधा शुरू करने जा रहा है। EPFO 3.0 पहल के तहत 7.8 करोड़ सब्सक्राइबर्स को बिना किसी कागजी कार्रवाई के फंड तुरंत मिल सकेगा।
ये सिस्टम लागू होने के बाद PF से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं यूजर फ्रेंडली हो जाएंगी। इसमें ऑटो-क्लेम सेटलमेंट और कर्मचारी की पसंद के बैंक खाते में सीधे फंड ट्रांसफर करने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। EPFO 2.0 में पहले ही कुछ सुधार हुए थे, लेकिन 3.0 को गेम-चेंजर माना जा रहा है।
क्लेम सेटलमेंट: अब ₹5 लाख तक के क्लेम ऑटोमेटिक सेटल होंगे। इससे पैसे मिलने का समय 10-20 दिन से घटकर 2 से 5 दिन रह जाएगा।
पेपरलेस प्रोसेस: आधार-वेरिफाइड अकाउंट्स के लिए चेक की फोटो या पासबुक अपलोड नहीं करना पड़ेगा। पूरा प्रोसेस डिजिटल होगा।
कैटेगरी में कमी: पैसे निकालने की पुरानी 13 जटिल कैटेगरी को खत्म करके सिर्फ 3 आसान ग्रुप बनाए जाएंगे।
- जरूरी: बीमारी, शादी और पढ़ाई के लिए।
- आवास: घर खरीदने या लोन चुकाने के लिए।
- विशेष परिस्थितियां: बेरोजगारी या रिटायरमेंट के समय।
फंड ट्रांसफर: ATM और UPI के जरिए फंड निकाल सकेंगे।
अकाउंट ट्रांसफर: नौकरी बदलने पर PF बैलेंस पुराने एम्प्लॉयर से नए एम्प्लॉयर के खाते में ऑटोमेटिक ट्रांसफर होगा। कंपनी के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी।
एम्प्लॉयर की निर्भरता खत्म: अब KYC अपडेट करने या क्लेम करने के लिए कंपनी की मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।











