सोशल मीडिया पर इन दिनों एक तस्वीर वायरल हो रही है। तस्वीर में एक बुलडोजर मकान को तोड़ता नजर आ रहा है। तस्वीर को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर बिहार की है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल तस्वीर बिहार की नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर बिहार की है, जहां भाजपा राज में दलित, पिछड़े अल्पसंख्यकों पर जुल्म बढ़ेंगे।
देवेंद्र भारती कुशवाहा (@bharti_devendra) नाम के एक्स यूजर ने लिखा “ये बिहार के दृश्य हैं नालंदा से। बुलडोजर चल रहा है दलितों के घर पर। भाजपा राज शुरू हुआ अब बिहार में भी दलित, पिछड़े अल्पसंख्यक पर जुल्म बढ़ेंगे।” पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें स्कॉल की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 12 जून 2022 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पैगंबर पर टिप्पणी के विरोध में पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद प्रयागराज में मुस्लिम कार्यकर्ता का घर ढहा दिया गया। जावेद मोहम्मद के परिवार ने इसके खिलाफ याचिका दायर की है, जिसमें दावा किया गया है कि आदेश में गलत तरीके से उन्हें घर के मालिक के रूप में उल्लेखित किया गया है।
आगे की पड़ताल के लिए हमने अमर उजाला की न्यूज डेस्क से संंपर्क किया। इस दौरान हमेंं एक रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 12 जून 2022 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जुमे की नमाज के बाद प्रयागराज में हिंसा फैलाने के मास्टरमाइंड जावेद पंप के घर पर रविवार को बुलेडोजर चल गया। उसके घर पर भारी भीड़ जमा हो गई है। पीडीए ने उसे मकान खाली करने के लिए रविवार सुबह 11 बजे तक का समय दिया था, जिसकी समय समय सीमा खत्म हो गई है। इसके बाद उसका घर ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। मौके पर भारी फोर्स और भीड़ जमा है।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल तस्वीर को उत्तर प्रदेश का पाया। इसका बिहार से कोई संबंध नहीं हैं।








