राजधानी दिल्ली में छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इस संवेदनशील माहौल के बीच अचानक सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का एक बेहद विवादास्पद और भड़काऊ वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। इस कथित वीडियो ने इंटरनेट पर आते ही तहलका मचा दिया। वायरल क्लिप में केंद्रीय मंत्री को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उनका साफ मानना है कि दो-तीन कॉकरोचों को सरेआम लटका देना चाहिए।
आगे वीडियो में यह भी दावा किया गया कि ऐसा करने से इस ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को अपनी असलियत का अंदाजा हो जाएगा और जब लोग अपने साथियों को इस तरह लटकते देखेंगे तो सारा हुड़दंग तुरंत शांत हो जाएगा। इस भड़काऊ वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और माहौल गर्माने लगा। लेकिन जैसे ही प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की फैक्ट चेक टीम ने इस मामले की गहन जांच की, तो एक बहुत बड़ी और खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ। पीआईबी ने स्पष्ट कर दिया कि वायरल हो रहा यह वीडियो पूरी तरह से मनगढ़ंत, फर्जी और झूठा है।
⚠️ Fake Video Alert!
Pakistani propaganda accounts are circulating a video of Union Minister Piyush Goyal claiming that he made threatening remarks about the protesting students. #PIBFactCheck:
❌This video is #Fake and AI-generated.
✅ Union Minister @piyushgoyal did… pic.twitter.com/lowN3RxaHl
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) July 24, 2026
कौन रच रहा है सीमा पार से साजिश?
प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की फैक्ट चेक टीम ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर इस फेक वीडियो का पूरा सच उजागर किया है। PIB के मुताबिक, इस मनगढ़ंत वीडियो को भारत में फैलाने के पीछे पाकिस्तान समर्थित प्रोपेगेंडा सोशल मीडिया अकाउंट्स का हाथ है। जांच में पाया गया कि सीमा पार बैठे देश विरोधी तत्व भारत में जारी छात्र प्रदर्शनों की आड़ लेकर देश का माहौल खराब करना चाहते हैं।
पाकिस्तान समर्थित इन फर्जी अकाउंट्स का मुख्य मकसद भारतीय नागरिकों और प्रदर्शनकारी छात्रों को भड़काना, समाज में भ्रम की स्थिति पैदा करना और शांति भंग करना है। पीआईबी ने इस गंभीर खतरे को देखते हुए आम जनता और सोशल मीडिया यूज़र्स से अपील की है कि वे इस तरह के भड़काऊ वीडियो पर बिल्कुल भी भरोसा न करें। इसके साथ ही सरकार ने सख्त हिदायत दी है कि बिना जांचे-परखे ऐसे फर्जी कंटेंट को आगे फॉरवर्ड या शेयर न करें।
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वास्तव में क्या बोले थे केंद्रीय मंत्री?
अगर बात करें कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने वास्तव में क्या बयान दिया था, तो उसकी हकीकत कुछ और ही है। दरअसल, केंद्रीय मंत्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों के खिलाफ कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि मामलों के जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर अपराधियों को कड़ी सजा दी जाएगी।
उन्होंने आगे यह भी कहा था कि सरकार ऐसे कई कदम उठाएगी जिससे देश के युवाओं की आशाएं और अपेक्षाएं पूरी हो सकें। इसके साथ ही पीयूष गोयल ने विपक्ष और कांग्रेस पार्टी से हाथ जोड़कर अनुरोध किया था कि वे छात्रों से जुड़े इस बेहद संवेदनशील विषय का राजनीतिकरण न करें और संसद में चर्चा से न भागें। इसी असली बयान के वीडियो और ऑडियो को आधुनिक तकनीक से एडिट किया गया और उसमें आपत्तिजनक शब्द जोड़े गए।
एआई और डीपफेक टेक्नोलॉजी का बढ़ता खतरनाक ट्रेंड
यह पूरा मामला एक बार फिर साबित करता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक टेक्नोलॉजी समाज के लिए कितना बड़ा खतरा बन चुकी हैं। आजकल एआई टूल्स की मदद से किसी भी नेता, अभिनेता या आम इंसान का चेहरा और आवाज हूबहू बनाकर कोई भी फर्जी बयान तैयार किया जा सकता है। ये वीडियो देखने और सुनने में बिल्कुल असली महसूस होते हैं, लेकिन इनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं होता।
ऐसी तकनीक का इस्तेमाल अब साइबर अपराधी और देश विरोधी ताकतें प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए कर रही हैं। इसीलिए आज के डिजिटल दौर में किसी भी वायरल वीडियो या ऑडियो को सच मानने से पहले फैक्ट चेक जैसे आधिकारिक और भरोसेमंद स्रोतों से उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी हो गया है। थोड़ी सी सतर्कता देश को किसी बड़े बवाल से बचा सकती है।








