भारत और अमेरिका के बीच चल रहे टैरिफ से जोड़कर सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर की जा रही है। इस पोस्ट को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि चीन ने भारत को धमकी दी है कि अगर खुद को बचाना है तो भारत को लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को चीन को दे देना चाहिए।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी पड़ताल में यह दावा गलत साबित हुआ है। हमारी पड़ताल में सामने आया कि चीन का तरफ से भारत को ऐसी कोई धमकी नहीं दी गई है। हाल ही में चीन और भारत के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई है। उसमें भी चीन के द्वारा ऐसी कोई बात नहीं कही गई है। साथ ही अमेरिका के भारत पर 50% प्रतिशत टैरिफ लगाने का चीन भी लगातार विरोध कर रहा है। अमेरिका के इस फैसले के खिलाफ वह भारत के समर्थन में खड़ा हुआ नजर आ रहा है।
क्या है दावा
इस पोस्ट को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि चीन भारत को धमकी दे रहा है कि अगर लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश चीन को नहीं दिया तो भारत नहीं बचेगा। इनमें से ज्यादातर अकाउंट पाकिस्तान से संचालित हैं।
शाहीन (@shaheen003647) नाम के एक एक्स यूजर ने इस वीडियो को शेयर करके लिखा “ब्रेकिंग न्यूज़: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के एक वरिष्ठ चीनी अधिकारी का कहना है कि अगर भारत को अपना अस्तित्व बचाना है, तो उसे लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश चीन को वापस करना होगा।” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
इस तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां, यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां, यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने कीवर्ड के माध्यम से इससे जुड़ी मीडिया रिपोर्ट को सर्च किया। लेकिन हमें कोई भी मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली जिसमें इस बात का जिक्र हो। इस दौरान हमें विदेश मंत्रालय की एक प्रेस रिलीज जरूर मिली। इसमें चीन के विदेश मंत्री और भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि की यात्रा का जिक्र किया गया था। 19 अगस्त की उस प्रेस रिलीज में बताया गया, “विशेष प्रतिनिधि और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल के निमंत्रण पर, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के विदेश मंत्री श्री वांग यी 18-19 अगस्त 2025 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए। अपनी यात्रा के दौरान, मंत्री वांग ने 19 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल के साथ भारत और चीन के बीच सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की 24वें दौर की वार्ता की सह-अध्यक्षता की और 18 अगस्त 2025 को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। उन्होंने 19 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। दो पक्षों में कई बिंदु पर बातचीत हुई और सहमति बनी। इसमें व्यापार, निवेश और पर्यटन के अलावा कई और बिंदु शामिल हैं।” इसे आप यहाँ दिए गए लिंक पर पढ़ सकते हैं।
भारत-चीन सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधि समूह की स्थापना 2003 में सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान ढूंढने के लिए की गई थी। 2012 में, नई दिल्ली और बीजिंग ने सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र की भी शुरुआत की। बीजिंग में 23 वें दौर की वार्ता 2024 में हुई थी। विशेष प्रतिनिधि वार्ता इससे पहले दिसंबर 2019 में नई दिल्ली में हुई थी और तब से पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के कारण इसे स्थगित कर दिया गया थी।
22 अगस्त की टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया कि चीन ने ट्रंप के टैरिफ पर निशाना साधते हुए भारत का समर्थन किया है। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने नई दिल्ली में भारत के खिलाफ अमेरिका के टैरिफ उपायों पर कड़ा विरोध जताया और भारत और चीन के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि चीन के विदेश मंत्री के भारत दौरे के बाद दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर हुए हैं। चीन के भारत के खिलाफ बयान देने का दावा झूठा है।








