सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में नजर आ रहा है कि थर्मोकोल बॉक्स के सहारे स्कूली बच्चे नदी पार कर रहे हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि वायरल वीडियो मध्य प्रदेश का है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो चार साल पुराना और इंडोनेशिया का है। दरअसल, दक्षिण सुमात्रा के एक गांव में पुल और नाव के कमी के कारण बच्चे थर्मोकोल बॉक्स के जरिए स्कूल जा रहे हैं।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि मध्य प्रदेश में थर्मोकोल बॉक्स के सहारे स्कूली बच्चों नदी पार कर रहे हैं।
अशोक बौद्ध (@AshokBuaddha) नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “थर्माकोल में चढ़ के बच्चे नदी पार करते हैं उसके बाद 2 किलोमीटर चलकर जाते हैं पढ़ने मध्यप्रदेश” पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के कई अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें ट्रिब्यून पंतुरा नाम के यूट्यूब यूजर के अकाउंट पर एक वीडियो मिला। यह वीडियो 27 सितंबर 2021 को साझा किया गया है। पोस्ट में हमें वायरल वीडियो देखने को मिला। इसके साथ ही बताया गया है कि यह वीडियो इंडोनेशिया का है।
आगे की पड़ताल में हमें जंबी अपडेट की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 24 सितंबर 2021 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि तीन प्राथमिक विद्यालय के छात्रों का एक वीडियो टिकटॉक पर वायरल हो गया है, जिसमें वे स्टायरोफोम से बने मछली के डिब्बे से नदी पार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि तीनों छात्र कुआला 12 गांव, ओगन कोमेरिंग इलिर रीजेंसी, दक्षिण सुमात्रा के रहने वाले हैं।
इसके बाद हमें टेम्पो की एक रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 27 सितंबर 2021 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि तीन प्राथमिक स्कूल के बच्चों ने स्टायरोफोम बॉक्स के जरिए नदी पार कर स्कूल जा रहे हैं। इस घटना को रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। वीडियो में बताया गया है कि बच्चों को स्कूल जाने के लिए स्टायरोफोम का इस्तेमाल करना पड़ा क्योंकि वहां कोई पुल या नाव नहीं थी।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को इंडोनेशिया का पाया है। वायरल वीडियो को मध्य प्रदेश का बताकर लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।








