सोशल मीडिया इन दिनों पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक बम धमाका होते नजर आ रहा है। इसके बाद एक इमारत गिरते हुए भी दिखती है। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह मणिपुर में हुई हालिया घटना के दौरान का है। जहां भारतीय सेना लोगो के घरों को नष्ट कर रही है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को भ्रामक पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो को दो साल पुराना मणिपुर का पाया है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो हाल में मणिपुर की है।
ज्योति कुमार नाम की फेसबुक यूजर ने लिखा,’यह मणिपुर है, फिलिस्तीन नहीं। भारतीय सेना मणिपुर में अल्पसंख्यकों के घर नष्ट कर रही है! मणिपुर के चूराचांदपुर में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा विस्फोटक से अपना घर नष्ट किए जाने के बाद एक व्यक्ति ने दुख और गुस्सा जाहिर किया।’ पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें मणिपुर टाइम्स के फेसबुक अकाउंट पर वायरल वीडियो देखने को मिला। यह वीडियो 26 जुलाई 2024 को साझा किया गया है। इसके साथ ही यहां बताया गया है कि चुराचांदपुर में #KukiTerrorists द्वारा विस्फोटक से मैतेई लोगों के घर तबाह करने का पहला सबूत!! यह घटना जून 2023 में हुई थी और हाल ही में सोशल मीडिया पर यह वीडियो सामने आया है, जो इस बात का पहला सबूत है कि कुकी विद्रोही मैतेई लोगों के घरों को नष्ट करने के लिए विस्फोटकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसके बाद हमें एनडीटीवी की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 21 जुलाई 2024 को प्रकाशित की गई है। यहां हमें वायरल वीडियो के कीफ्रेम देखने को मिला। इसके साथ ही यहां बताया गया है कि वीडियो में चार मंजिला घर को खंभों पर बंधे विस्फोटकों से सर्जिकल तरीके से उड़ाते हुए दिखाया गया है, जिससे पता चलता है कि इसमें खास तौर पर तोड़फोड़ की कार्रवाई में माहिर लोगों का हाथ हो सकता है।
आगे की पड़ताल में हमें पीआईबी के फैक्ट चेक की एक पोस्ट मिली। पीआईबी ने वायरल वीडियो को भ्रामक बताया है। पोस्ट में बताया गया है कि यह वायरल वीडियो पुराना है और इसे गलत संदर्भ में शेयर किया जा रहा है।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को दो साल पुराना पाया है। इस वीडियो को शेयर कर लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।








