मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हुई हिंसा के बाद वहां राष्ट्रपति शासन भी लगाया गया। अब मणिपुर का हालात पहले से बेहतर होते हुए नजर आ रहे हैं। 14 मई 2025 को मणिपुर के चंदेल जिसमें सुरक्षा बलों उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में 10 उग्रवादी मारे गए थे। इसी के साथ सुरक्षाबलों ने घटनास्थल से बड़ी मात्रा में हथियार जब्त किये। अब इस बीच, एक वीडियो वायरल हो रहा है इस वीडियो में बड़ी संख्या में जब्त किए गए हथियार एक जगह पर रखे हुए दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि मणिपुर में उग्रवादियों से भारतीय सेना ने हथियारों का एक बहुत बड़ा जखीरा और नकदी बरामद की है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी जांच में सामने आया कि कि यह वीडियो भारत का नहीं, बल्कि म्यांमार का है। मणिपुर में भी हथियार बरामद किए गए है लेकिन वायरल हो रहा वीडियो मणिपुर का नहीं बल्कि म्यांमार का है।
क्या है दावा
वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि मणिपुर से सुरक्षाबलों ने हथियार की काफी बड़ी खेप पकड़ी है।
urooj fatima (@urjfati) नाम के एक एक्स यूजर ने वीडियो को शेयर करे लिखा “मणिपुर में उग्रवादियों से भारतीय सेना ने हथियारों का एक बहुत बड़ा जखीरा और नकदी बरामद की है देखिए!” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
इस तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले मणिपुर में पकड़े गए हथियार की मीडिया रिपोर्ट देखी। यहां हमें इंडिया टुडे की रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि मणिपुर में तलाशी के दौरान, सैनिकों को भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ, जिसमें सात एके-47 राइफलें, एक एम 4 राइफल, एक आरपीजी लॉन्चर, चार सिंगल-बैरल ब्रीच-लोडिंग राइफलें और अन्य युद्ध संबंधी सामान शामिल थे। इंडिया टुडे के द्वारा जब्त किए गए हथियारों की फोटो भी थी। यहां जो फोटो दिख रही थी वो वायरल तस्वीर से बिल्कुल अलग थी। वायरल फोटो में हथियारों की संख्या काफी ज्यादा थी, लेकिन रिपोर्ट में दिख रहे फोटो में हथियार उसके मुकाबले कम हैं। साथ ही वायरल फोटो में कैश भी नजर आ रहा है और मणिपुर में किसी भी तरह के कैश जब्त होने की बात नहीं की गई है।
आगे हमने वीडियो को कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें म्यांमार न्यूज एजेंसी नाम के एक फेसबुक अकाउंट पर यह वीडियो देखने को मिला। यहां इस वीडियो को 10 अप्रैल 2025 को शेयर किया गया था। इस वीडियो के साथ बर्मी भाषा में एक कैप्शन लिखा गया था, जिसका अनुवाद है “फलाम पर कब्जा करने की लड़ाई से दुर्लभ हथियार और गोला-बारूद”
आगे हमें एक और फेसबुक पोस्ट मिला। इस पोस्ट में #ChinBrotherHood का इस्तेमाल किया गया था। यहां से हमने इसे कीवर्ड की तरह इस्तेमाल करते हुए सर्च किया। हमें म्यांमार नाउ की एक खबर मिली। इस खबर को 9 अप्रैल 2025 को प्रकाशित किया गया था। इस खबर में बताया गया था “चिन ब्रदरहुड गठबंधन ने पांच महीने की झड़पों के बाद सोमवार रात को चिन राज्य के फलाम शहर में म्यांमार सेना के एकमात्र बचे हुए पहाड़ी बेस पर कब्ज़ा कर लिया, ऐसा जुंटा विरोधी लड़ाकों ने दावा किया। सेना की इन्फैंट्री बटालियन (आईबी) 268 के बेस पर कब्जा करके, चिन ब्रदरहुड ने उत्तरी चिन राज्य के फलाम शहर पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया है।
Tachileik नाम की एक वेबसाइट पर इसी से जुड़ी बर्मी भाषा में एक खबर थी। इस खबर को हमने अनुवाद किया। खबर में बताया गया था कि चिन न्यू ईयर पार्टी ने आज, 9 अप्रैल, 2025 को घोषणा की कि उसने चिन राज्य के फलाम शहर पर कब्जा कर लिया है। फलाम, जिस पर 9 नवंबर, 2024 से हमला किया गया था और उस पर कब्ज़ा कर लिया गया था, को 9 अप्रैल, 2025 को सैन्य परिषद-मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया। इस रिपोर्ट में जो तस्वीर थी वह वायरल हो रही तस्वीर से मेल खा रही थी।
आगे हमें वीडियो में वर्दी पहने हुए कुछ लोग दिखे। वर्दी के बाजू पर एक लोगो के साथ BNRA लिखा हुआ था। हमने इस लोगो के बारे में पता लगाने की कोशिश की तो पता चला कि BNRA का मतलब है (Burma National Revolutionary Army)। यह लोगो म्यांमार की किसी सेना की वर्दी पर बना होता है। यहां से हमें पता चला कि वीडियो म्यांमार की किसी जगह का हो सकता है।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि वीडियो भारत का नहीं है। इसे भारत का बताकर भ्रामक दावा किया जा रहा है।








