सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक ट्रेलर पर काले रंग के बेलनाकार संरचना ले जाई जा रही है। लोग इस पर माला चढ़ाकर इसकी पूजा कर रहे हैं। वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि भारतीय पड़ोसी देशों, चीन और पाकिस्तान का मुकाबला करने के लिए बनाए गए एक न्यूक्लियर वॉरहेड की पूजा कर रहे हैं।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी पड़ताल में सामने आया कि इस दावे में किसी तरह की कोई सच्चाई नहीं है। जांच के दौरान सामने आया कि वीडियो में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग को तमिलनाडु से बिहार के गोपालगंज ले जाया जा रहा था।
क्या है दावा
काले रंग के एक ढांचे को ले जाया जा रहा है। इसकी पूजा की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि लोग न्यूक्लियर वॉरहेड की पूजा कर रहे हैं।
कोडेक्स_इंडिया (@Codex_India6) नाम के एक एक्स अकाउंट से इस वीडियो को शेयर करके लिखा गया, “भारतीय चीन और पाकिस्तान का मुकाबला करने के लिए बनाए गए न्यूक्लियर वॉरहेड की पूजा कर रहे हैं।” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
इस तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें एक फेसबुक अकाउंट पर यह वीडियो देखने को मिला। इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा गया था “विश्व का सबसे विशाल शिवलिंग आस्था, भक्ति और सनातन संस्कृति की शाश्वत विरासत का महान प्रतीक है।”
आगे हमने कीवर्ड के माध्यम से इससे जुड़ी कोई मीडिया रिपोर्ट सर्च करने की कोशिश की। यहां हमें एनडीटीवी की रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि यह सबसे बड़ा शिवलिंग है जिसे बिहार लाया गया है। मोतिहारी के केसरिया (कैथवलिया गांव) में बन रहे भव्य विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे विशालकाय शिवलिंग की स्थापना स्थल पहुंच चुका है। 17 जनवरी को मंदिर में ही इसकी स्थापना की जाएगी। तमिलनाडु के महाबलीपुरम की धरती पर पिछले 10 वर्षों से तराशा जा रहा यह शिवलिंग, करीब 2500 किलोमीटर की लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा तय कर बिहार पहुंचा है। जब 96 चक्कों वाला विशाल ट्रक इस शिवलिंग को लेकर कैथवलिया गांव पहुंचा, तो भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। इस रिपोर्ट में शिवलिंग की तस्वीर भी मौजूद थी।
इसके बाद हमने इसके बारे में पता लगाने के लिए अमर उजाला की न्यूज डेस्क से संपर्क किया। यहां हमें पता चला कि विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग शनिवार को बिहार की सीमा में प्रवेश कर गया। तमिलनाडु से लाया जा रहा यह विशालकाय शिवलिंग जैसे ही उत्तर प्रदेश–बिहार सीमा स्थित बलथरी चेकपोस्ट पहुंचा, ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शिवभक्तों ने पुष्प वर्षा और जयघोष के साथ इसका भव्य स्वागत किया।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि वीडियो में दिख रहा विशालकाय ढांचा शिवलिंग हैं। इसका न्यूक्लियर वॉरहेड होने का दावा गलत है।








